फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   labour go back to metro cities for employment

रोजगार के लिए फिर से शहर लौट रहे हैं प्रवासी श्रमिक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 02:36 AM IST
विज्ञापन
labour go back to metro cities for employment
मुरादाबाद। लॉकडाउन में बेरोजगारी का संकट होने पर हजारों प्रवासी श्रमिकों ने अपने घरों को पलायन किया था। यातायात का साधन न होने पर मजदूर पैदल ही अपने गंतव्य को चल दिए थे। जिसमें भूख-प्यास व थकान ने कई लोगों की जिंदगी छीन ली थी। रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों व रोडवेज ने बसों से श्रमिकों को घर पहुंचाने में मदद की थी। उस समय उन्होंने तौबा की थी कि कभी लौटकर वापस नहीं जाएंगे लेकिन पेट की आग इस पर भारी पड़ी। उन्होंने फिर से वापसी की राह पकड़ ली है। सोमवार को सौ से अधिक प्रवासी श्रमिक रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरे। ये सभी बिहार के अलग अलग जनपदों के रहने वाले हैं व निर्माण कार्य करने के लिए उत्तराखंड जा रहे हैं।
विज्ञापन

सूनसान पड़े मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर सोमवार को उस समय भीड़ लग गई। जब मोतीहारी से दिल्ली जाने वाली स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन 04009 से प्रवासी श्रमिक उतरे। 150 लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग से एक पंक्ति में लगाकर सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। श्रमिकों ने बताया कि वह बिहार के रहने वाले हैं। लॉकडाउन में काम न होने के कारण अपने घरों को लौट गए थे। इस बीच वहां खेती बाड़ी करके या सब्जी बेचकर गुजारा किया। अब निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ठेकेदार ने उन्हें फिर से बुला लिया है। वे सभी उत्तराखंड के अलग अलग जनपदों में जाकर निर्माण कार्य करेंगे। वहीं प्रतिदिन यात्रियों के आवागमन का ब्यौरा रखने वाले टीटीई स्टाफ ने बताया कि बिहार से आने वाली ट्रेनों में प्रवासी श्रमिक लगातार आ रहे हैं। पिछले दो तीन दिन में यह संख्या अचानक बढ़ी है। उन्होंने बताया कि सद्भावना स्पेशल एक्सप्रेस, चंपारण सत्याग्रह स्पेशल एक्सप्रेस व बिहार से आने वाली अन्य ट्रेनों से उतरने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है।
विज्ञापन

श्रमिकों की ज़बानी
पिछले 12 सालों से बाहर रहकर मजदूरी कर रहे हैं। लॉकडाउन में काम धंधा बंद हो गया तो मजबूरन लौटना पड़ा। अब काम दोबारा शुरू हो गया तो मालिक ने टिकट करवा दिया और वापस बुला लिया। देहरादून में मकान बनाने का काम करने जा रहे हैं। - राकेश कुमार
विज्ञापन
विज्ञापन

सोचा तो था कि दोबारा वापस नहीं लौटेंगे लेकिन गांव में रहकर भी गुजारा हो नहीं पाता। गांव में मजदूरी ज्यादा नहीं है घर के खर्चे भी पूरे नहीं हो पाते। इसलिए अब मालिक के बुलाने पर वापस लौटा हूं। - महेश शाह
शहर में रहकर ठीक ठाक कमा लेते हैं। लॉकडाउन के पांच महीनें बहुत मुसीबत से कटे हैं। सब्जी बेचकर, ठेला चलाकर परिवार पालना पड़ा। अब हमारा काम फिर से शुरू हो गया है। अब परेशानी नहीं होगी। - रामप्यारे

गांव में कोई रोजगार नहीं है साहब। हम गरीब आदमी हैं कोई जमीन जायदाद भी नहीं है जहां खेती किसानी कर लें। बाहर जाकर मजदूरी करने से ही परिवार का पेट भरता है। ठेकेदार ने वापसी का टिकट करवा दिया, अब सहारनपुर में निर्माण का काम करेंगे। चमनलाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed