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शिकायत के तीन साल बाद निरस्त किए थे चार लाइसेंस

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 02:00 AM IST
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four license cancle after three year of issued date
मुरादाबाद। निष्क्रिय औद्यानिक सहकारी संघ के फर्जी पदाधिकारियों को उर्वरकों के लाइसेंस जारी करने के मामले में एक बार ही मामूली एक्शन हुआ है। डीएचओ ने भी इसके लिए दो बार पत्र लिखा तब जाकर जनवरी 2020 में उर्वरक बिक्री का चार लाइसेंस निरस्त हो सका था।
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उद्यान विभाग के अभिलेखों में औद्यानिक सहकारी संघ मुरादाबाद के अध्यक्ष रफीउद्दीन व सचिव व सचिव अरशद अली हैं। इस संघ का गठन वर्ष 2004 में किया गया था। लेकिन उसके बाद कभी भी संघ का चुनाव नहीं हुआ। जबकि नियमानुसार इसका चुनाव हर पांच साल बाद होना था। इसके चलते उद्यान विभाग के अभिलेखों में यह संघ वर्ष 2009 से ही निष्क्रिय चल रहा था। रफीउद्दीन ने बताया कि वर्ष 2017 में उसे इसकी जानकारी मिली कि उनके संघ के नाम पर उर्वरक की दुकानें चल रहीं हैं। जबकि निष्क्रिय होने के कारण उसका संघ न तो उर्वरक बिक्री लाइसेंस के लिए पात्र था और न ही उसने कभी उर्वरक बिक्री लाइसेंस के लिए कोई आवेदन ही किया था। अभिलेख चेक कराए तो चला कि दो लोगों शादाब और खालिद ने खुद को संघ का क्रमश: फर्जी तौर पर अध्यक्ष व सचिव दर्शाते हुए कई साल पहले जिला कृषि कार्यालय से उर्वरक विक्री का लाइसेंस प्राप्त कर एक नहीं बल्कि चार उर्वरक बिक्री केंद्र संचालित कर रखे हैं। यह उर्वरक केंद्र आरोपियों ने काजीपुरा, गोठ ठीकरी, मोहम्मद कुलीपुर और वीरपुर वरिवार में खोले थे। रफीउद्दीन ने जिला कृषि अधिकारी को दिए शिकायती पत्र में साक्ष्य के तौर संघ से संबंधित सभी अभिलेख व संघ के नाम पर लाइसेंस प्राप्त कर खोले गए उर्वरक केंद्रों के फोटो ग्राफ आदि भी प्रस्तुत करते हुए लाइसेंस निरस्त कर, आरोपियों आदि के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि आरोपी जीएसटी आदि की भी चोरी कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार ने भी जिला कृषि अधिकारी को संघ के निष्क्रिय होने तथा उसके नाम पर चार लाइसेंस प्राप्त कर किए जा रहे कारोबार को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की संस्तुति की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में यह फाइल दबा दी गई। जनवरी 2020 में रफीउद्दीन ने फिर मामले की शिकायत की और डीएचओ ने भी तीन साल बाद भी फर्जी अभिलेखों के आधार पर प्राप्त किए गए उर्वरक लाइसेंसों को निरस्त न करने पर आपत्ति जताई गई तब जाकर जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने 22 जनवरी 2020 को आरोपियों को निर्गत उर्वरक लाइसेंस निरस्त करते हुए पॉस मशीन जमा करने और मौजूद स्टाक का निस्तारण तीन दिन में करने का आदेश किया।
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औद्यानिक संघ का फर्जी पदाधिकारी बन जिन लोगों ने लाइसेंस प्राप्त किया था उनका कहना था कि सारे अभिलेख उन्हें शिकायतकर्ता ने ही दिए थे। आपस में रिश्तेदार भी बताए जा रहे थे। जिला उद्यान अधिकारी ने संबंधित संघ को निष्क्रिय बताते हुए भी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसके बाद संघ के नाम से जारी चारों उर्वरक लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। बीच में दोनों पक्ष आपस में समझौता करने के चक्कर में पड़े रहें इसलिए कार्रवाई में विलंब लगा।
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ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
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