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मुरादाबाद: नरेश टिकैत बोले- किसान ढीले पड़े तो 30-40 साल में नहीं रहेगा कोई नाम लेने वाला 

Fri, 12 Feb 2021 03:43 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बिलारी (मुरादाबाद)
अमर उजाला ब्यूरो, बिलारी (मुरादाबाद) Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Fri, 12 Feb 2021 03:43 PM IST
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Farmers said in mahapanchayat kisan movement will return only after the ending of agricultural laws
महापंचायत में शामिल किसाना। - फोटो : अमर उजाला
गन्ना समिति के मैदान में आयोजित किसान संघर्ष मोर्चा की महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को अपमानित करने पर उतर आई है। किसान को अब मान सम्मान की लड़ाई लड़नी होगी और सरकार को झुकना होगा। उन्होंने किसानों से मनमुटाव दूरकर एकजुट होने की अपील की।
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महापंचायत में मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और बदायूं से बड़ी संख्या में किसान आए। टिकैत ने कहा कि सरकार ने किसानों को कृषि कानूनों को लेकर बहुत परेशान कर दिया है। वह किसी को बोलने देना नहीं चाहती। उल्टे सीधे आरोप लगाए जा रहे हैं। लेकिन, भाकियू ने किसानों के भरोसे ही सरकार की लगाम खींच रखी है। यदि किसान ढीले पड़े तो 30-40 साल में उनका कोई नाम लेने वाला नहीं रहेगा और आने वाली पीढी हमें माफ नहीं करेगी।
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आंदोलनजीवी एक मजाक का शब्द
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों को आंदोलनजीवी कहकर हंसते हैं। आंदोलनजीवी एक मजाक का शब्द है। पंचायतों को जमात कह रहे हैं। कृषि कानून की लड़ाई तो होती रहेगी, लेकिन अब सम्मान की लड़ाई लड़नी पड़ेगी। राजनीतिक दलों के नेताओं को मंच पर जगह नहीं दी गई थी।
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2013 में बहुत बड़ी गलती हो गई
टिकैत ने मुजफ्फरनगर दंगों के समय का जिक्र करते हुए कहा कि 2013 में उनसे गलती हुई थी। वह गुमराह हो गए थे। भाजपा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि उस वक्त लोगों में खाई पैदा कर दी थी। अब उसे भुलाकर एकजुट होना होगा।

98 प्रतिशत हिंदुओं ने दी वोट, अब दो प्रतिशत ही देंगे
भाजपा को 98 प्रतिशत हिंदुओं ने वोट दिए हैं, लेकिन अब दो प्रतिशत ही मिल पाएंगे। इसलिए युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों का कहना मानकर नशे से दूर रहें। और सम्मान से जीना सीखें।


मुकदमों से नहीं डरते किसान
इस क्षेत्र में गन्ने बिजली की समस्या गंभीर है। हरियाणा में एक नलकूप का ढाई सौ रुपये महीना है। यूपी मे 2200 रुपये है। हरियाणा में गन्ने का भाव 350 रुपये क्विंटल है। यहां 325 रुपये क्विंटल है। हम यही तो कह रहे हैं कि इतना फर्म क्यों हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। बोलने वाले किसानों पर बेहिसाब मुकदमों कर दिए गए। किसानों का तो सदियों से साथ रहा है। मुकदमों से नहीं डरते। अलग-थलग मत पड़ो।
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