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मेजर ध्यानचंद की खबर
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मुरादाबाद। हाकी के जादूगर को देश के सर्वोच्च सम्मान नहीं दिए जाने से खेल जगत के दिग्गज नाराज हैं। उन्होंने कहा कि देश को खेल के पटल पर पहचान दिलाने वाले खेल और उसके मसीहा को इस तरह से नकारना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने इसे हाकी के साथ दुर्व्यवहार बताया।
जिला हाकी संघ के सचिव इकबाल खान ने कहा कि क्रिकेट का नाम ओलंपिक तालिका में नहीं है, लेकिन क्रिकेटरों को सभी तरह का सम्मान दिया जाता है। यहां तक कि खेल रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी मिला है। जबकि उनसे पहले देश के राष्ट्रीय खेल की धाक दुनिया में मेजर ध्यानचंद ने ही दिलाई थी। हाकी में देश आठ बार की स्वर्ण विजेता है। किसी देश के पास यह सम्मान नहीं है तो मसीहा को खेल रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया जा रहा है। यह तो हाकी के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, इसलिए खेल गर्त में जा रहा है। पूर्व में आल इंडिया नारायण दत्त तिवारी हाकी प्रतियोगिता के संयोजक रहे विनोद गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1970 से पहले से ही मेजर ध्यानचंद को सम्मानित करने की मांग की जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक को पत्र लिखा है, लेकिन कोई गंभीर नहीं है। यह हाकी के साथ खिलवाड़ है।
बेटे अशोक भी आ चुके हैं शहर
विनोद गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1971 से 89 तक नारायण दत्त तिवारी प्रतियोगिता कराई थी। उसमें सभी ओलंपिक के खिलाड़ी आए थे। उनमें अशोक कुमार ध्यानचंद भी शामिल थे। वहीं, इकबाल खान ने बताया कि तीन मई 2008 को एक मैत्री मैच हुआ था। 27 भारतीय खिलाड़ियों को ध्यानचंद 11 और केडी सिंह बाबू 11 टीमों में बांटा था। उस समय मोहम्मद साहिद, अशोक कुमार ध्यानचंद, जफर इकबाल, आरपी सिंह, ओलंपियन सैय्यद अली, संजय बिष्ट आरके टंडन, धनराज पिल्लई आदि भारतीय खिलाड़ी थे। सभी ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की थी। स्थानीय स्तर पर भी मांग उठाई जाती है, लेकिन अभी तक नजरअंदाज किया जा रहा है।
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जिला हाकी संघ के सचिव इकबाल खान ने कहा कि क्रिकेट का नाम ओलंपिक तालिका में नहीं है, लेकिन क्रिकेटरों को सभी तरह का सम्मान दिया जाता है। यहां तक कि खेल रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी मिला है। जबकि उनसे पहले देश के राष्ट्रीय खेल की धाक दुनिया में मेजर ध्यानचंद ने ही दिलाई थी। हाकी में देश आठ बार की स्वर्ण विजेता है। किसी देश के पास यह सम्मान नहीं है तो मसीहा को खेल रत्न से सम्मानित क्यों नहीं किया जा रहा है। यह तो हाकी के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, इसलिए खेल गर्त में जा रहा है। पूर्व में आल इंडिया नारायण दत्त तिवारी हाकी प्रतियोगिता के संयोजक रहे विनोद गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1970 से पहले से ही मेजर ध्यानचंद को सम्मानित करने की मांग की जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक को पत्र लिखा है, लेकिन कोई गंभीर नहीं है। यह हाकी के साथ खिलवाड़ है।
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बेटे अशोक भी आ चुके हैं शहर
विनोद गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1971 से 89 तक नारायण दत्त तिवारी प्रतियोगिता कराई थी। उसमें सभी ओलंपिक के खिलाड़ी आए थे। उनमें अशोक कुमार ध्यानचंद भी शामिल थे। वहीं, इकबाल खान ने बताया कि तीन मई 2008 को एक मैत्री मैच हुआ था। 27 भारतीय खिलाड़ियों को ध्यानचंद 11 और केडी सिंह बाबू 11 टीमों में बांटा था। उस समय मोहम्मद साहिद, अशोक कुमार ध्यानचंद, जफर इकबाल, आरपी सिंह, ओलंपियन सैय्यद अली, संजय बिष्ट आरके टंडन, धनराज पिल्लई आदि भारतीय खिलाड़ी थे। सभी ने मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग की थी। स्थानीय स्तर पर भी मांग उठाई जाती है, लेकिन अभी तक नजरअंदाज किया जा रहा है।
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