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श्रद्धालु दो दिन मना सकते हैं मकर संक्रांति पर्व
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मुरादाबाद। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, तिल का दान, जप और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर में प्रवेश करते हैं। इस दिन से सूर्यदेव की यात्रा दक्षिणायन से उत्तरायण दिशा की ओर होने लगती है। दिन लंबे और रातें छोटी होने प्रारंभ हो जाती है। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन को लेकर पंचांग में भेद हैं, जिस वजह से मकर संक्रांति दो दिन यानी 14 और 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
देश के कई क्षेत्रों में अलग-अलग पंचांग गणना करने का विधान है। ऐसे में सूर्य के राशि परिवर्तन को लेकर भेद होने के कारण ही मकर संक्रांति को लेकर भी दो मत है। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकेश शुक्ला का कहना है कि वाराणसी से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन 14 जनवरी शुक्रवार को रात आठ बजकर 49 मिनट होगा। इस कारण से मकर संक्रांति 15 जनवरी शनिवार को प्रात: काल सूर्योदय के उपरांत मनाई जा सकती है। 14 जनवरी को रोहिणी नक्षत्र रात्रि आठ बजकर 45 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। चंद्रमा वृष राशि में गोचर करेगा।
वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि पत्रा व ज्योतिष सॉफ्टवेयर के अनुसार 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर राशि के सूर्य के साथ ही पुण्यकाल में स्नान व दान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होता है। पुण्यकाल में स्नान के बाद तिल का होम करने और चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री, गर्म कपड़े दान करने का बड़ा महत्व है। इसे ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। मकर संक्रांति के दिन रोहिणी नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है।
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यह खास संयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा। सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन 29 वर्ष बाद तीन ग्रहों का संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध और शनि तीन ग्रहों की युति से त्रिगृही योग बनेगा। महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का दिन ही चुना था। कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी, इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है।
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देश के कई क्षेत्रों में अलग-अलग पंचांग गणना करने का विधान है। ऐसे में सूर्य के राशि परिवर्तन को लेकर भेद होने के कारण ही मकर संक्रांति को लेकर भी दो मत है। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकेश शुक्ला का कहना है कि वाराणसी से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन 14 जनवरी शुक्रवार को रात आठ बजकर 49 मिनट होगा। इस कारण से मकर संक्रांति 15 जनवरी शनिवार को प्रात: काल सूर्योदय के उपरांत मनाई जा सकती है। 14 जनवरी को रोहिणी नक्षत्र रात्रि आठ बजकर 45 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। चंद्रमा वृष राशि में गोचर करेगा।
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वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि पत्रा व ज्योतिष सॉफ्टवेयर के अनुसार 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर राशि के सूर्य के साथ ही पुण्यकाल में स्नान व दान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होता है। पुण्यकाल में स्नान के बाद तिल का होम करने और चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री, गर्म कपड़े दान करने का बड़ा महत्व है। इसे ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। मकर संक्रांति के दिन रोहिणी नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है।
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यह खास संयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा। सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन 29 वर्ष बाद तीन ग्रहों का संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध और शनि तीन ग्रहों की युति से त्रिगृही योग बनेगा। महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का दिन ही चुना था। कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी, इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है।