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पति की हत्या में पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:15 AM IST
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मैनाठेर के चर्चित हरि सिंह हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कांत शुक्ल की अदालत ने पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि दोनों को पंद्रह पंद्रह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित भी किया।
मैनाठेर थानाक्षेत्र के लालपुर हमीर निवासी हरि सिंह की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। उसकी लाश 27 सितंबर 2016 को फरीदपुर पुल के पास जंगल में मिली थी। हरि सिंह के चाचा ओम प्रकाश ने इस मामले में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल और तफ्तीश के आधार हरि सिंह की पत्नी रानी और उसके प्रेमी ओमकार निवासी बारीपुर थाना नखासा जनपद संभल को हिरासत में लिया।
दोनों ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया था कि हरि सिंह की हत्या उन्होंने ही की थी। हत्या करने के बाद लाश जंगल में फेंक दी थी। इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीकांत शुक्ल की अदालत में चली। सरकार की ओर से डीजीसी संजीव कुमार सिंह और एडीजीसी संजीव अग्रवाल ने जिरह की और दोनों मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पत्नी रानी और उसके प्रेमी ओमकार को हत्या में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि पंद्रह- पंद्रह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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मैनाठेर थानाक्षेत्र के लालपुर हमीर निवासी हरि सिंह की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। उसकी लाश 27 सितंबर 2016 को फरीदपुर पुल के पास जंगल में मिली थी। हरि सिंह के चाचा ओम प्रकाश ने इस मामले में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल और तफ्तीश के आधार हरि सिंह की पत्नी रानी और उसके प्रेमी ओमकार निवासी बारीपुर थाना नखासा जनपद संभल को हिरासत में लिया।
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दोनों ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया था कि हरि सिंह की हत्या उन्होंने ही की थी। हत्या करने के बाद लाश जंगल में फेंक दी थी। इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीकांत शुक्ल की अदालत में चली। सरकार की ओर से डीजीसी संजीव कुमार सिंह और एडीजीसी संजीव अग्रवाल ने जिरह की और दोनों मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पत्नी रानी और उसके प्रेमी ओमकार को हत्या में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि पंद्रह- पंद्रह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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