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घोटालों के नाम रहा 2018
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मुरादाबाद।
2018 जिले में घोटालों के नाम रहा। कलक्ट्रेट से लेकर ट्रेजरी और शिक्षा विभाग से लेकर नगर निगम तक घोटाले दर घोटाले हुए लेकिन कार्रवाई इनमें से किसी एक में भी नहीं हुई। अधिकारियों का रवैय्या मातहतों को बचाने वाला रहा तो जनप्रतिनिधियों को जैसे इन घोटालों से कोई सरोकार ही नहीं था। पब्लिक के हक पर डाका पड़ता देख जनप्रतिनिधियों ने नजरें फेर लीं तो अधिकारियों ने जिंदा सुबूत सामने आने के बाद भी घोटालों में फंसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
15 करोड़ का ट्रेजरी घोटाला
मुरादाबाद। कलक्ट्रेट और ट्रेजरी के कुछ कर्मचारियों और कुछ पूर्व कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी बिलों के जरिए ट्रेजरी से करीब 15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। यह रकम जिले में तैनात कुछ लेखपालाें, उनके रिश्तेदारों, एक पूर्व लेखपाल और उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों में गई। सेवानिवृत्त कर्मियों के खिलाफ तो कार्रवाई हुई लेकिन घोटाले में फंसे लेखपाल और दूसरे कर्मचारी अभी तक कार्रवाई से दूर हैं। इतने बड़े घोटाले में किसी अधिकारी के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सीलिंग भूमि - जेल भूमि घोटाला
मुरादाबाद। एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की करीब 68000 वर्ग मीटर भूमि अफसरों ने प्रॉपर्टी डीलरों के सिंडिकेट से मिलकर कथित किसानों के नामों पर दर्ज कर दी। नई जेल के लिए हुई भूमि खरीद में भी अफसरों ने सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। दोनों घोटालों में पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर, सेवानिवृत्त एडीएम एके श्रीवास्तव समेत 13 अफसरों के खिलाफ विजिलेंस ने सिविल लाइंस और मूंढापांडे में रिपोर्ट दर्ज कराई है। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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सीलिंग भूमि का सौदा कर गए पूर्व वीसी
मुरादाबाद। एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की दिल्ली हाईवे से सटी अरबों रुपये की भूमि को एमडीए के पूर्व वीसी सीएल शेखर और पूर्व सचिव प्रदीप कुमार सिंह प्रॉपर्टी डीलरों को दे गए। प्राधिकरण को अधिकार नहीं होने के बावजूद हाईटेंशन लाइन के नीचे की भूमि से से बेशकीमती भूमि को एक्सचेंज किया गया। मौजूदा वीसी कनक त्रिपाठी ने दोनों अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति मांगी। लेकिन एक महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी शासन ने अनुमति नहीं दी है।
41 शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति को दबाया
मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में 41 शिक्षकों की नियुक्ति जांच में फर्जी मिलने के बाद भी प्रशासनिक अफसर इस मामले को दबाए बैठे हैं। इसी तरह के मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों में शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन मुरादाबाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रीति जायसवाल चार माह बाद भी जांच पूरी नहीं कर सकी हैं। पूर्व में एसडीएम द्वारा की गई जांच में सभी नियुक्तियों को फर्जी बताते हुए इन शिक्षकों का रिकार्ड सील कर कार्रवाई के लिए डीएम को भेजा गया था।
स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग घोटाला
मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग में बड़ा घोटाला हुआ। जिले में प्रदेश के बाकी जिलों की तुलना में दोगुनी दर पर प्रोफाइल प्रिंट कराई गई। भाजपा महानगर अध्यक्ष की शिकायत पर जांच बैठी। इसके बाद ठेका निरस्त किया गया। लेकिन घोटाले में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
निलंबन - तबादले का खेल भी दबा गए अफसर
मुरादाबाद। पूर्व बीएसए के समय में जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 60 से अधिक शिक्षक - शिक्षिकाओं को निलंबित किया गया। जिले में दूर - दराज स्थित स्कूलों में तैनात इन शिक्षकों को निलंबन के 15 दिन के भीतर बहाली देकर शहर के नजदीक के स्कूलों में तैनाती दे दी गई। शिकायत हुई कि शिक्षकों को तबादले के लिए डील के तहत निलंबित कर नई तैनाती दी गई। डीएम ने रिकार्ड तलब किया, जांच के आदेश दिए। लेकिन यह जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी। इससे पहले 60 शिक्षकों के समायोजन की जांच भी वक्त के साथ दफन कर दी गई।
20 करोड़ का टैक्स घोटाला
मुरादाबाद। नगर निगम में 20 करोड़ रुपये का हाउस टैक्स घोटाला प्रकाश में आया। जांच बैठी लेकिन आज तक पूरी नहीं हो सकी। बनी बनाई सड़कों के टेंडर निकालकर कागजों में सड़कें बनाने और भुगतान लेने के मामले सामने आए, उनमें भी कार्रवाई नहीं हो सकी। सफाई कर्मचारियों के पीएफ का घोटाला भी समय के साथ दफन कर दिया गया। डीएम के पास निगम का चार्ज आने के बाद भी इन मामलों में कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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2018 जिले में घोटालों के नाम रहा। कलक्ट्रेट से लेकर ट्रेजरी और शिक्षा विभाग से लेकर नगर निगम तक घोटाले दर घोटाले हुए लेकिन कार्रवाई इनमें से किसी एक में भी नहीं हुई। अधिकारियों का रवैय्या मातहतों को बचाने वाला रहा तो जनप्रतिनिधियों को जैसे इन घोटालों से कोई सरोकार ही नहीं था। पब्लिक के हक पर डाका पड़ता देख जनप्रतिनिधियों ने नजरें फेर लीं तो अधिकारियों ने जिंदा सुबूत सामने आने के बाद भी घोटालों में फंसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
15 करोड़ का ट्रेजरी घोटाला
मुरादाबाद। कलक्ट्रेट और ट्रेजरी के कुछ कर्मचारियों और कुछ पूर्व कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी बिलों के जरिए ट्रेजरी से करीब 15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। यह रकम जिले में तैनात कुछ लेखपालाें, उनके रिश्तेदारों, एक पूर्व लेखपाल और उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों में गई। सेवानिवृत्त कर्मियों के खिलाफ तो कार्रवाई हुई लेकिन घोटाले में फंसे लेखपाल और दूसरे कर्मचारी अभी तक कार्रवाई से दूर हैं। इतने बड़े घोटाले में किसी अधिकारी के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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सीलिंग भूमि - जेल भूमि घोटाला
मुरादाबाद। एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की करीब 68000 वर्ग मीटर भूमि अफसरों ने प्रॉपर्टी डीलरों के सिंडिकेट से मिलकर कथित किसानों के नामों पर दर्ज कर दी। नई जेल के लिए हुई भूमि खरीद में भी अफसरों ने सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। दोनों घोटालों में पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर, सेवानिवृत्त एडीएम एके श्रीवास्तव समेत 13 अफसरों के खिलाफ विजिलेंस ने सिविल लाइंस और मूंढापांडे में रिपोर्ट दर्ज कराई है। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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सीलिंग भूमि का सौदा कर गए पूर्व वीसी
मुरादाबाद। एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की दिल्ली हाईवे से सटी अरबों रुपये की भूमि को एमडीए के पूर्व वीसी सीएल शेखर और पूर्व सचिव प्रदीप कुमार सिंह प्रॉपर्टी डीलरों को दे गए। प्राधिकरण को अधिकार नहीं होने के बावजूद हाईटेंशन लाइन के नीचे की भूमि से से बेशकीमती भूमि को एक्सचेंज किया गया। मौजूदा वीसी कनक त्रिपाठी ने दोनों अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति मांगी। लेकिन एक महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी शासन ने अनुमति नहीं दी है।
41 शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति को दबाया
मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में 41 शिक्षकों की नियुक्ति जांच में फर्जी मिलने के बाद भी प्रशासनिक अफसर इस मामले को दबाए बैठे हैं। इसी तरह के मामलों में प्रदेश के अन्य जिलों में शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन मुरादाबाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रीति जायसवाल चार माह बाद भी जांच पूरी नहीं कर सकी हैं। पूर्व में एसडीएम द्वारा की गई जांच में सभी नियुक्तियों को फर्जी बताते हुए इन शिक्षकों का रिकार्ड सील कर कार्रवाई के लिए डीएम को भेजा गया था।
स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग घोटाला
मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में स्टूडेंट प्रोफाइल प्रिंटिंग में बड़ा घोटाला हुआ। जिले में प्रदेश के बाकी जिलों की तुलना में दोगुनी दर पर प्रोफाइल प्रिंट कराई गई। भाजपा महानगर अध्यक्ष की शिकायत पर जांच बैठी। इसके बाद ठेका निरस्त किया गया। लेकिन घोटाले में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
निलंबन - तबादले का खेल भी दबा गए अफसर
मुरादाबाद। पूर्व बीएसए के समय में जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 60 से अधिक शिक्षक - शिक्षिकाओं को निलंबित किया गया। जिले में दूर - दराज स्थित स्कूलों में तैनात इन शिक्षकों को निलंबन के 15 दिन के भीतर बहाली देकर शहर के नजदीक के स्कूलों में तैनाती दे दी गई। शिकायत हुई कि शिक्षकों को तबादले के लिए डील के तहत निलंबित कर नई तैनाती दी गई। डीएम ने रिकार्ड तलब किया, जांच के आदेश दिए। लेकिन यह जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी। इससे पहले 60 शिक्षकों के समायोजन की जांच भी वक्त के साथ दफन कर दी गई।
20 करोड़ का टैक्स घोटाला
मुरादाबाद। नगर निगम में 20 करोड़ रुपये का हाउस टैक्स घोटाला प्रकाश में आया। जांच बैठी लेकिन आज तक पूरी नहीं हो सकी। बनी बनाई सड़कों के टेंडर निकालकर कागजों में सड़कें बनाने और भुगतान लेने के मामले सामने आए, उनमें भी कार्रवाई नहीं हो सकी। सफाई कर्मचारियों के पीएफ का घोटाला भी समय के साथ दफन कर दिया गया। डीएम के पास निगम का चार्ज आने के बाद भी इन मामलों में कार्रवाई नहीं हो सकी है।