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Moradabad News : आईपीएस शगुन गौतम के दामन पर पहले भी लग चुके हैं भ्रष्टाचार के दाग

Sat, 30 Jul 2022 02:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Sat, 30 Jul 2022 02:32 AM IST
सार

रामपुर के अल्कोहल कांड और रामपुर के बहुचर्चित गैंगरेप में समझौता कराने में भी उनका नाम सामने आया था। इन मामलों में उनके खिलाफ जांच तक बैठ चुकी है।

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blame imposed on ips sagun gautam has a contoversial history
शगुन गौतम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्जी मुठभेड़ में फंसे आईपीएस शगुन गौतम का दामन भ्रष्टाचार के ‘शगुन’ से दागदार रहा है। रामपुर के अल्कोहल कांड और रामपुर के बहुचर्चित गैंगरेप में समझौता कराने में भी उनका नाम सामने आया था। इन मामलों में उनके खिलाफ जांच तक बैठ चुकी है। ये तो वो मामले हैं जिनमें कुछ लोगों ने सामने आकर शिकायतें कीं, वरना पुलिस विभाग के कुछ लोगों का तो दबी जुबान यहां तक दावा है कि तमाम मामलों में लोग सामने ही नहीं आए।

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एक मार्च 2020 से एक अगस्त 2021 तक शगुन गौतम रामपुर में बतौर एसपी तैनात रहे। इसकी तैनाती के दौरान कारोबारी संजीव गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई के अलावा दो और मामले चर्चा में रहे थे। इनमें एक मामले में रामपुर निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खां ने मुख्यमंत्री के को टैग कर एक पोस्ट ट्वीट की थी। जिसमें आईपीएस शगुन गौतम के रामपुर में एसपी पद पर तैनात रहने के दौरान एक गैंगरेप के मामले में एक अस्पताल संचालक से समझौते के नाम पर लाखों रुपये की डील होने का वीडियो वायरल होने की बात कहते हुए शिकायत की गई थी।
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इस मामले में शासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तत्कालीन सीओ सिटी विद्या किशोर शर्मा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद दानिश खां की शिकायत पर तत्कालीन सीओ सिटी विद्या किशोर शर्मा और आईपीएस शगुन गौतम के खिलाफ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने मामला दर्ज किया था। आरटीआई एक्टिविस्ट ने बताया कि उन्होंने आईजी प्रशांत कुमार को बयान दर्ज कराए थे। जबकि दूसरा मामला भी रामपुर से जुड़ा है।
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जून 2020 में रामपुर में शिकायत के आधार पर एसटीएफ ने रामपुर के शहजादनगर थाना क्षेत्र में एक टैंकर पकड़ा था। जिसमें करीब 25 हजार लीटर एएनए (एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल) था। एसटीएफ ने मौके से राजेंद्र सक्सेना उर्फ राजू सक्सेना, अखिलेश मौर्य और राजेंद्र को पकड़ा था। पुलिस को जानकारी मिली थी कि टैंकर पंजाब के पठानकोट स्थित एक फैक्टरी से असम जा रहा था।

रास्ते में आरोपियों द्वारा टैंकर चालक से सांठगांठ कर अल्कोहल चोरी किया जा रहा था। एसटीएफ के पकड़े जाने पर शराब के इस अवैध धंधे का पता चला था। यह मामला तब और चर्चा में आ गया था, जब एडीजी कानून व्यवस्था ने स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर पत्र लिखा। इसके बाद तत्कालीन शहजादनगर थाना प्रभारी सतेंद्र कुमार और धमोरा चौकी प्रभारी अनुराग चौधरी को हटा दिया गया था। इसके बाद आईजी रमित शर्मा ने भी धमोरा आकर जांच पड़ताल की थी।

इस प्रकरण से जुड़ा एक मुकदमा पठानकोट में भी दर्ज हुआ था। गिरोह की धरपकड़ न होने पर आरोप लगा कि पुलिस ने 50 लाख रुपये लेकर मामला रफा-दफा कर दिया। इसकी जांच एडीजी बरेली के निर्देश पर आईजी बरेली स्तर से की गई तो तत्कालीन एसपी शगुन गौतम समेत 18 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। इस मामले से जुड़े सभी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका अन्य जनपदों में तबादला कर दिया गया था।

विस्तृत जांच में खुलेगा पुलिस और तस्करों की यारी का राज
डीआईजी शलभ माथुर ने जांच कर रामपुर में एसपी रहे शगुन गौतम समेत 24 पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब रामपुर के एसपी पूरे मामले की विस्तृत जांच करेंगे। इस जांच में पुलिस और तस्करों की यारी का खुलासा होगा। तब साफ हो जाएगा कि तस्करी में कौन-कौन और लोग शामिल थे। उन्हें बचाने वाले पुलिस कर्मी कौन हैं।

डीआईजी की जांच में ये बात तो साफ हो चुकी है कि मुठभेड़ में फर्जी है। साथ ही इस बात की भी पुष्टि हुई है कि 32 लाख रुपये की तस्करी की शराब बरामद हुई थी। इस शराब की तस्करी में कुछ और लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। कारोबारी संजीव गुप्ता को घर से उठाकर फर्जी मुठभेड़ दिखा दी थी। पुलिस और असली तस्करों के बीच भी डील होने संभावना जताई जा रही है।


शासन के आदेश पर जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस मामले में रामपुर एसपी विस्तृत जांच करेंगे। संबंधित लोगों और पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज करेंगे। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शलभ माथुर, डीआईजी

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