{"_id":"5e31c5538ebc3e4b130d50f7","slug":"apeal-of-jauhar-trust-rejected-moradabad-news-mbd338030985","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्व परिषद में जौहर ट्रस्ट की द्वितीय अपील भी हुई खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्व परिषद में जौहर ट्रस्ट की द्वितीय अपील भी हुई खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को विनिमय के आधार पर चकरोड की 17 बीघा जमीन दिए जाने के मामले में ट्रस्ट के अध्यक्ष और सांसद आजम खां को राजस्व परिषद से झटका लगा है। राजस्व परिषद ने इस मामले में जौहर ट्रस्ट की ओर से दायर की गई द्वितीय अपील को खारिज कर दिया है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से 24 जुलाई 2012 को एसडीएम टांडा के समक्ष वाद दायर करके चकरोड की जमीन विनिमय के आधार पर मांगी गई थी। एसडीएम टांडा ने 13 सितंबर 2012 को सामुदायिक उपयोग की लगभग 17 बीघा भूमि के विनिमय की अनुमति देकर उसे ट्रस्ट को दे दिया था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद 20 सितंबर 2017 को भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। मुख्यमंत्री द्वारा मामले में संज्ञान लिए जाने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद , प्रयागराज में चार वाद दायर कराए थे। तीन अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। 20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खां ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। जिसमें जिलाधिकारी के साथ-साथ आकाश सक्सेना को भी प्रतिवादी बनाया गया था। 26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। 23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड ने अपने फैसले में मुरादाबाद कमिश्नर को इस वाद को चार हफ्ते में निस्तारित करने का आदेश दिया। कमिश्नर की कोर्ट ने दो सितंबर 2019 को एसडीएम टांडा द्वारा जौहर ट्रस्ट को दी गई सरकारी चकरोड के जमीन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद एसडीएम सदर ने जौहर ट्रस्ट को चकरोड की जमीन खाली करने का नोटिस दिया था, जिस पर ट्रस्ट की ओर से राजस्व परिषद में द्वितीय अपील दायर की गई थी। राजस्व परिषद की सदस्य भावना श्रीवास्तव ने द्वितीय अपील को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से 24 जुलाई 2012 को एसडीएम टांडा के समक्ष वाद दायर करके चकरोड की जमीन विनिमय के आधार पर मांगी गई थी। एसडीएम टांडा ने 13 सितंबर 2012 को सामुदायिक उपयोग की लगभग 17 बीघा भूमि के विनिमय की अनुमति देकर उसे ट्रस्ट को दे दिया था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद 20 सितंबर 2017 को भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। मुख्यमंत्री द्वारा मामले में संज्ञान लिए जाने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद , प्रयागराज में चार वाद दायर कराए थे। तीन अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। 20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खां ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। जिसमें जिलाधिकारी के साथ-साथ आकाश सक्सेना को भी प्रतिवादी बनाया गया था। 26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। 23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड ने अपने फैसले में मुरादाबाद कमिश्नर को इस वाद को चार हफ्ते में निस्तारित करने का आदेश दिया। कमिश्नर की कोर्ट ने दो सितंबर 2019 को एसडीएम टांडा द्वारा जौहर ट्रस्ट को दी गई सरकारी चकरोड के जमीन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद एसडीएम सदर ने जौहर ट्रस्ट को चकरोड की जमीन खाली करने का नोटिस दिया था, जिस पर ट्रस्ट की ओर से राजस्व परिषद में द्वितीय अपील दायर की गई थी। राजस्व परिषद की सदस्य भावना श्रीवास्तव ने द्वितीय अपील को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन