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नामचीन नेत्र विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
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मुरादाबाद। मुरादाबाद ओफ्थल्मिक सोसायटी की शनिवार को सीएमई आयोजित हुई। प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ एवं पद्मश्री डा. जेएस तितियाल समेत देश के कई नामी नेत्र विशेषज्ञों ने पुतली और मोतियाबिंद के विकारों और शल्य चिकित्सा पर चर्चा करते हुए अपने अनुभव एवं आधुनिक तकनीक साझा की।
दिल्ली रोड स्थित एक होटल में आयोजित सीईएम का उद्घाटन पद्मश्री एवं एम्स के डा. जेएस तितियाल ने किया। उन्होंने मुरादाबाद जनरल आफ ओथ्मल्मोलोग्य का विमोचन भी किया। डा. तितियाल ने आंखों से जुड़े विकार एवं चिकित्सा पद्धति पर व्याख्यान दिया। नेत्र विशेषज्ञ डा. हरबंस लाल, डा. झकेला लाल, डा. टिंकू बाली, डा. प्रतीक तेवलिया, डा. नीलिमा मेहरोत्रा, डा. प्रशांत बावनकुले ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान आयोजक डा. पीके पांडेय, डा. गोपेश मेहरोत्रा, डा. नीतू वार्ष्णेय, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. स्मिता अग्रवाल, डा. अतुल नाथ, डा. सचिन देव और डा. भावुतोष समेत दर्जनों चिकित्सक मौजूद रहे। अध्यक्षता सोसायटी अध्यक्ष डा. अनिल कुमार और संचालन सचिव डा. इरम परवीन ने किया। इससे पूर्व सोसायटी के तत्वावधान में सुबह नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट में सेमिनार आयोजित हुआ।
आंखों को कमजोर बना रहे डिजिटल गैजेट्स
नागपुर के नामी रेटिना स्पेशलिस्ट डा. प्रशांत बावनकुले ने कहा कि आंखों के विकार बुढ़ापे की परेशानी नहीं रह गई। डिजिटल गैजेट्स आंखों की रोशनी छीन रहे हैं। डा. प्रशांत के मुताबिक दुनिया में जापान और चीन के बाद भारत में तेजी से बच्चों की आंखों की समस्या हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर का अत्यधिक इस्तेमाल है।
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बच्चों की आंखों की जांच जरूरी
सर गंगाराम दिल्ली के वरिष्ठ रेटिना सर्जन डा. टिंकू बाली ने बताया कि हर अभिभावक को बच्चे का स्कूल में दाखिला से पहले उसकी आंखों की जांच करानी चाहिए। मोबाइल और कंप्यूटर से बच्चों को दूर रखना चाहिए। आंखों को दुरुस्त रखने के लिए बच्चों की शारीरिक एक्टिविटी के प्रति ध्यान देने की जरूरत है। कंप्यूटर पर नियमित काम करने वालों की आंखों में ड्राईनेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
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दिल्ली रोड स्थित एक होटल में आयोजित सीईएम का उद्घाटन पद्मश्री एवं एम्स के डा. जेएस तितियाल ने किया। उन्होंने मुरादाबाद जनरल आफ ओथ्मल्मोलोग्य का विमोचन भी किया। डा. तितियाल ने आंखों से जुड़े विकार एवं चिकित्सा पद्धति पर व्याख्यान दिया। नेत्र विशेषज्ञ डा. हरबंस लाल, डा. झकेला लाल, डा. टिंकू बाली, डा. प्रतीक तेवलिया, डा. नीलिमा मेहरोत्रा, डा. प्रशांत बावनकुले ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान आयोजक डा. पीके पांडेय, डा. गोपेश मेहरोत्रा, डा. नीतू वार्ष्णेय, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. स्मिता अग्रवाल, डा. अतुल नाथ, डा. सचिन देव और डा. भावुतोष समेत दर्जनों चिकित्सक मौजूद रहे। अध्यक्षता सोसायटी अध्यक्ष डा. अनिल कुमार और संचालन सचिव डा. इरम परवीन ने किया। इससे पूर्व सोसायटी के तत्वावधान में सुबह नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट में सेमिनार आयोजित हुआ।
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आंखों को कमजोर बना रहे डिजिटल गैजेट्स
नागपुर के नामी रेटिना स्पेशलिस्ट डा. प्रशांत बावनकुले ने कहा कि आंखों के विकार बुढ़ापे की परेशानी नहीं रह गई। डिजिटल गैजेट्स आंखों की रोशनी छीन रहे हैं। डा. प्रशांत के मुताबिक दुनिया में जापान और चीन के बाद भारत में तेजी से बच्चों की आंखों की समस्या हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर का अत्यधिक इस्तेमाल है।
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बच्चों की आंखों की जांच जरूरी
सर गंगाराम दिल्ली के वरिष्ठ रेटिना सर्जन डा. टिंकू बाली ने बताया कि हर अभिभावक को बच्चे का स्कूल में दाखिला से पहले उसकी आंखों की जांच करानी चाहिए। मोबाइल और कंप्यूटर से बच्चों को दूर रखना चाहिए। आंखों को दुरुस्त रखने के लिए बच्चों की शारीरिक एक्टिविटी के प्रति ध्यान देने की जरूरत है। कंप्यूटर पर नियमित काम करने वालों की आंखों में ड्राईनेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है।