फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   टीबी की दवा की मारामारी, मरीजों की लाचारी

टीबी की दवा की मारामारी, मरीजों की लाचारी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2019 02:24 AM IST
विज्ञापन
टीबी की दवा की मारामारी, मरीजों की लाचारी
मुरादाबाद। ट्यूबरोक्युलोसिस (टीबी) की खतरनाक श्रेणी मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंशन (एमडीआर) के मरीजों के लिए दवा का संकट हो गया है। सरकारी अस्पतालों में एमडीआर की एक दवा की सप्लाई बाधित हो गई है। इससे मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ रही है। कई मरीज बाजार से दवा नहीं खरीद पा रहे हैं। इलाज बाधित होने से दूसरे लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं।
विज्ञापन

2025 तक उत्तरप्रदेश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जागरूकता के साथ साल में चार बार मरीजों की स्क्रीनिंग अभियान चलाता है। चिह्नित मरीजों का सरकारी अस्पतालों में फ्री में इलाज के साथ पांच सौ रुपये मासिक पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाता है। निजी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले मरीजों को भी भत्ता मिलता है। टीबी का अधूरा इलाज जानलेवा है। इससे रोगी खतरनाक एमडीआर की श्रेणी आ जाता है। टीबी का इलाज छह माह और एमडीआर का दो साल तक इलाज चलता है। एमडीआर के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिसके चलते हाई पावर की दवाएं दी जाती हैं। दवाएं बाजार में काफी महंगी हैं। सरकारी अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से एमडीएम के मरीजों की एक दवा नहीं हैं। दवा की सरकारी सप्लाई बाधित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मरीज दवा के लिए भटक रहे हैं। दवा कब तक आएगी, मरीजों को जानकारी नहीं दी जा रही है।
विज्ञापन


- एमडीआर के मरीजों की एक दवा की सप्लाई नहीं मिल रही है। मरीज बाजार से दवा की खरीद रहे हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. विनीता अग्निहोत्री को दवा की सप्लाई बाधित होने की जानकारी दी गई है। अस्पताल के स्तर पर जल्द ही दवा की खरीद की जाएगी, ताकि मरीजों को मेडिकल से खरीदनी न पड़े। - दिनेश कुमार प्रेमी, जिला क्षय रोग अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन


263 एमडीआर के मरीज
मुरादाबाद जिले में 263 एमडीआर के मरीज चिह्नित हैं। मरीजों की दो साल तक दवाएं चलती हैं। सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं। पिछले साल एमडीआर की आशंका के चलते 7666 टीबी के मरीजों की जांच की गई। इनमें 263 मरीजों में एमडीआर की पुष्टि हुई। चिह्नित मरीजों का इलाज चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed