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मुस्लिम वोटर फिर बनेंगे निर्णायक
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मुरादाबाद।
सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बाद जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। राजनीतिक लोगों के साथ साथ आम आदमी भी पुराने चुनावों से इस गठबंधन को लेकर चल रहे हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या भले ही हिंदुओं की तुलना में कम है, लेकिन मुस्लिम मतदाता हमेशा से निर्णायक की भूमिका में रहे हैं। मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण के चलते ही राजनीतिक दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर दाव खेलकर जीत दर्ज की है। 1952 से 2014 तक 17 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं। इनमें गैर मुस्लिम प्रत्याशी महज छह बार निर्वाचित हुए हैं। 11 बार मुस्लिम प्रत्याशी ही निर्वाचित होकर संसद तक पहुंचे हैं।
मुरादाबाद लोकसभा में पांच विधानसभाएं शामिल हैं। इनमें चार विधानसभाएं मुरादाबाद जिले और एक बिजनौर की शामिल है। लोकसभा में 1868715 वोटर हैं। सर्वाधिक वोटर 470792 मुरादाबाद नगर विधानसभा में शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक लोकसभा में 47.12 फीसदी मुस्लिम और 52.14 फीसदी हिंदू मतदाता हैं। मुस्लिम वोटरों का प्रतिशत हमेशा हिंदू मतदाताओं से कम रहा है। इसके बाद भी मुस्लिम वोटर ही प्रत्याशी की जीत का आधार बने हैं।
1952 से 2014 तक के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो मुरादाबाद से अधिकतर पार्टियों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को ही चुनाव मैदान में उतारा है। कई बार तो राजनीतिक दलों को बाहरी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा और रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। 17 चुनावों में से 11 बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। 1977 के बाद से 2014 तक मात्र दो हिंदू प्रत्याशियों ने सांसद तक का सफर तय किया है। इनमें मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश कुमार और 1999 में चंद्र विजय सिंह शामिल रहे हैं। लोकसभा की सियासत पर गौर करने वाली बात है कि बसपा आज तक अपना खाता नहीं खोल पाई है, जबकि 1962 में निर्दलीय सैयद मुजफ्फर हुसैन सांसद निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस से पांच, जनसंघ से दो, लोकदल से एक, जनता पार्टी से एक, जनता दल से दो, सपा से तीन और भाजपा से एक बार सांसद निर्वाचित हुए हैं।
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2014 के लोकसभा चुनाव पर एक नजर
भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार 485224 वोट के साथ विजयी रहे
सपा के डा. एसटी हसन को 397720 वोट मिले
बसपा के मो याकूब को 160945 वोट मिले
कांग्रेस की नूर बानो को मात्र 19732 वोट मिले
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सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बाद जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। राजनीतिक लोगों के साथ साथ आम आदमी भी पुराने चुनावों से इस गठबंधन को लेकर चल रहे हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या भले ही हिंदुओं की तुलना में कम है, लेकिन मुस्लिम मतदाता हमेशा से निर्णायक की भूमिका में रहे हैं। मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण के चलते ही राजनीतिक दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर दाव खेलकर जीत दर्ज की है। 1952 से 2014 तक 17 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं। इनमें गैर मुस्लिम प्रत्याशी महज छह बार निर्वाचित हुए हैं। 11 बार मुस्लिम प्रत्याशी ही निर्वाचित होकर संसद तक पहुंचे हैं।
मुरादाबाद लोकसभा में पांच विधानसभाएं शामिल हैं। इनमें चार विधानसभाएं मुरादाबाद जिले और एक बिजनौर की शामिल है। लोकसभा में 1868715 वोटर हैं। सर्वाधिक वोटर 470792 मुरादाबाद नगर विधानसभा में शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक लोकसभा में 47.12 फीसदी मुस्लिम और 52.14 फीसदी हिंदू मतदाता हैं। मुस्लिम वोटरों का प्रतिशत हमेशा हिंदू मतदाताओं से कम रहा है। इसके बाद भी मुस्लिम वोटर ही प्रत्याशी की जीत का आधार बने हैं।
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1952 से 2014 तक के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो मुरादाबाद से अधिकतर पार्टियों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को ही चुनाव मैदान में उतारा है। कई बार तो राजनीतिक दलों को बाहरी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा और रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। 17 चुनावों में से 11 बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। 1977 के बाद से 2014 तक मात्र दो हिंदू प्रत्याशियों ने सांसद तक का सफर तय किया है। इनमें मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश कुमार और 1999 में चंद्र विजय सिंह शामिल रहे हैं। लोकसभा की सियासत पर गौर करने वाली बात है कि बसपा आज तक अपना खाता नहीं खोल पाई है, जबकि 1962 में निर्दलीय सैयद मुजफ्फर हुसैन सांसद निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस से पांच, जनसंघ से दो, लोकदल से एक, जनता पार्टी से एक, जनता दल से दो, सपा से तीन और भाजपा से एक बार सांसद निर्वाचित हुए हैं।
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भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार 485224 वोट के साथ विजयी रहे
सपा के डा. एसटी हसन को 397720 वोट मिले
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कांग्रेस की नूर बानो को मात्र 19732 वोट मिले