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भूमि की नकल खतौनी और घोषणापत्र अवश्य देंगे किसान
Updated Thu, 12 Jul 2018 01:40 AM IST
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बिलारी (मुरादाबाद)। गन्ना विभाग द्वारा गन्ने का सर्वे कार्य पूरा करने के बाद अब गांव गांव सूचियों का प्रदर्शन शुरू किया जा रहा है। इसी बीच बुधवार को गन्ना समिति के चेयरमैन ने किसानों के साथ गन्ना परिषद के निरीक्षक से मिलकर किसानों की समस्याएं बताईं।
गन्ना विभाग द्वारा गन्ने का सर्वे इस उद्देश्य से किया जाता है ताकि यह सही जानकारी मिल सके कि मौके पर किस किसान के खेत में गन्ने की फसल का रकबा कितना है। इसी सर्वे के आधार पर आगामी गन्ना सीजन में गन्ना किसानों को तौल पर्चियां जारी की जाएंगीं। पूर्व में गन्ना विभाग ने किसानों से उनके गन्ने के खेतों के हिस्सा प्रमाणपत्र भी मांगे थे। बाद में प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि किसानों को राजस्व विभाग से हिस्सा प्रमाण पत्र लेने की कोई बाध्यता अब नहीं है। गन्ना आयुक्त के आदेश के बाद भी अधिकतर ग्रामों में गन्ना सर्वे के दौरान किसानों के सामने समस्याएं आईं।
बुधवार की दोपहर सहकारी गन्ना विकास समिति के चेयरमैन अरविंद मोहन और समिति के निदेशक रामौतार सिंह यादव के नेतृत्व में पहले तो गन्ना किसानों ने गन्ना समिति अधिकारियों के साथ बैठक की। बाद में किसान गन्ना विकास परिषद के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक संजीव कुमार सिंह से मिले। इस दौरान गन्ना पर्यवेक्षकों को बुलाकर उनके सामने ही समस्याएं बताई गईं। बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसान को राजस्व अधिकारी से हिस्सा प्रमाण पत्र लाने की आवश्यकता नहीं है बल्कि हर हाल में अपने नाम वाली कृषि भूमि की नकल खतौनी और आधार कार्ड देना होगा। गन्ना परिषद के पर्यवेक्षकों ने यह बताया कि अनेक किसान अभी भी अपनी भूमि की नकल खतौनी नहीं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके सर्वे का रिकार्ड फीडर कराने में दिक्कत आएगी। गन्ना परिषद के निरीक्षक ने बताया कि गन्ने के सर्वे और कृषकों की सदस्यता सूची का गांव गांव प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है।
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गन्ना विभाग द्वारा गन्ने का सर्वे इस उद्देश्य से किया जाता है ताकि यह सही जानकारी मिल सके कि मौके पर किस किसान के खेत में गन्ने की फसल का रकबा कितना है। इसी सर्वे के आधार पर आगामी गन्ना सीजन में गन्ना किसानों को तौल पर्चियां जारी की जाएंगीं। पूर्व में गन्ना विभाग ने किसानों से उनके गन्ने के खेतों के हिस्सा प्रमाणपत्र भी मांगे थे। बाद में प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि किसानों को राजस्व विभाग से हिस्सा प्रमाण पत्र लेने की कोई बाध्यता अब नहीं है। गन्ना आयुक्त के आदेश के बाद भी अधिकतर ग्रामों में गन्ना सर्वे के दौरान किसानों के सामने समस्याएं आईं।
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बुधवार की दोपहर सहकारी गन्ना विकास समिति के चेयरमैन अरविंद मोहन और समिति के निदेशक रामौतार सिंह यादव के नेतृत्व में पहले तो गन्ना किसानों ने गन्ना समिति अधिकारियों के साथ बैठक की। बाद में किसान गन्ना विकास परिषद के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक संजीव कुमार सिंह से मिले। इस दौरान गन्ना पर्यवेक्षकों को बुलाकर उनके सामने ही समस्याएं बताई गईं। बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसान को राजस्व अधिकारी से हिस्सा प्रमाण पत्र लाने की आवश्यकता नहीं है बल्कि हर हाल में अपने नाम वाली कृषि भूमि की नकल खतौनी और आधार कार्ड देना होगा। गन्ना परिषद के पर्यवेक्षकों ने यह बताया कि अनेक किसान अभी भी अपनी भूमि की नकल खतौनी नहीं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके सर्वे का रिकार्ड फीडर कराने में दिक्कत आएगी। गन्ना परिषद के निरीक्षक ने बताया कि गन्ने के सर्वे और कृषकों की सदस्यता सूची का गांव गांव प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है।
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