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भू-राजनीति: ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी छवि से बचाना भारत की असल चुनौती, नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को शिखर बैठक

Tue, 08 Sep 2026 03:35 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:35 AM IST
सार

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचेंगे। हालांकि, ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी छवि से बचाना भारत की असल चुनौती होगी। नजरें 12-13 सितंबर को होने वाले शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं।

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Geopolitics real challenge for India shielding BRICS from anti-West image New Delhi summit on September 12–13
दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पश्चिम के भू-राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो रही है कि क्या इस समूह का उद्देश्य पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था को चुनौती देना है। एक तरफ ब्रिक्स के विस्तार ने इसे वैश्विक दक्षिण की बड़ी आवाज बनाया है, वहीं पश्चिम में ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि यह संगठन किसी नए शीत युद्ध के अखाड़े में तब्दील न हो जाए। ऐसे में भारत की असल चुनौती ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी धड़े वाली छवि से बचाने की होगी।

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पश्चिम विरोध ब्लॉक की छवि से बचना बड़ी चुनौती
यूएई, मिस्र और ईरान जैसे देशों से ब्रिक्स का दायरा बढ़ा है, लेकिन इस विस्तार ने इसके वैचारिक अंतर्विरोध भी सतह पर ला दिए हैं। रूस और चीन ब्रिक्स को डॉलर के वर्चस्व को तोड़ने और पश्चिमी संस्थानों के विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। इससे पश्चिमी नीति-निर्माताओं में इसे एक पश्चिम विरोध ब्लॉक के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। पश्चिमी मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक तक अपने विश्लेषणों में यही अंदेशा जताते रहे हैं। ईरान जैसे देशों की मौजूदगी इस धारणा को और हवा देती है।
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भारत का कूटनीतिक इम्तिहान
ब्रिक्स की बैठक भारत की कूटनीतिक भूमिका का असली इम्तिहान है। भारत हमेशा बहुपक्षीय कूटनीति पर चलता आया है। क्वॉड के जरिये अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गहरी साझेदारी, तो ब्रिक्स के मंच से विकासशील दुनिया के अधिकारों की पैरवी।

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  • भारत के लिए ब्रिक्स किसी के खिलाफ खड़ा किया गया मोर्चा होने की बजाये वैश्विक शासन प्रणालियों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएमएफ में सुधार लाने का जरिया रहा है।

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विकास का एजेंडा

राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा जिसकी थीम है-लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।

  • भारत की कोशिश है कि इसमें भू-राजनीतिक टकराव के मुद्दे को दरकिनार कर व्यावहारिक व विकास-केंद्रित एजेंडे को तरजीह दी जाए।
  • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा संक्रमण और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे जैसे विषयों को आगे बढ़ाकर भारत यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि ब्रिक्स का एजेंडा प्रतिरोध की बजाय  समावेशी विकास का है।

ब्रिक्स देशों में कितने नाम?
ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे।

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