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शहर में योगी जी और भूखे रहे बच्चे

Tue, 10 Jul 2018 02:28 AM IST
Updated Tue, 10 Jul 2018 02:28 AM IST
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शहर में योगी जी और भूखे रहे बच्चे
मुरादाबाद। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के दो दिन शहर में रहने के बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चे भूखे रह गए। उन्हें बांटे जा रहे मिड डे मील में रोजाना की तरह अव्यवस्थाएं देखने को मिली। साप्ताहिक रोस्टर की अनदेखी कर आधे स्कूलों में रोटी - सब्जी के बजाए रोटी - चावल बांटा गया। आधे स्कूलों में सब्जी रोटी बांटी गई। उनमें रोटियां सूखी होने के कारण बच्चे नहीं तोड़ पाए। अमर उजाला टीम को सोमवार में मिड डे मील के मानक पूरे नहीं मिले।
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प्राथमिक विद्यालय कन्या मझोला: स्कूल में 73 बच्चे थे। मिड डे मील में चावल और आलू-लौकी की सब्जी बंटी। प्रधान अध्यापिका मनीषा पवार ने बताया कि एनजीओ संचालक रोटी नहीं लाता है।
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प्राथमिक विद्यालय बालक मझोला: स्कूल में 205 बच्चे पंजीकृत हैं। सोमवार को 110 बच्चों को चावल के साथ आलू, लौकी की सब्जी परोसी गई। प्रधान अध्यापिका ऊषा देवी ने बताया कि मिड डे मिल वितरण के वक्त बेसिक शिक्षा अधिकारी बैठे हुए थे। इसके बावजूद रोटी नहीं मिली।
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कन्या जूनियर हाईस्कूल मझोला: 60 बच्चे आए थे। अधिकतर अपने घर से टिफन लाए थे। प्रधान अध्यापिका अलका सिक्का ने बताया कि सिर्फ आठ - दस बच्चों ने मिड डे मील का खाना खाया। लेकिन गुणवत्ता अच्छी नहीं थी।
प्राथमिक स्कूल गांधी नगर: इस स्कूल में 28 बच्चे थे। आलू, टमाटर और सोयाबीन बरी की सब्जी बांटी गई। बच्चों ने सब्जी चाव से खाई। लेकिन सूखी रोटियां नहीं चबा पाए। रोटियां सुबह मशीन से बन जाती हैं, और साढ़े दस बजे वितरित होती हैं।
जूनियर हाईस्कूल दांग: प्रत्येक बच्चे के लिए दो रोटियां दी जाती हैं लेकिन सोमवार को सब्जी के साथ बच्चों को भरपेट रोटियां दी गई। बच्चे सब्जी तो खा गए, लेकिन रोटी एक भी नहीं चबा पाए। 7वीं की निशा ने बताया कि बच्चे अक्सर खाना छोड़ देते हैं लेकिन आज अच्छी सब्जी थी।
जूनियर हाईस्कूल बाजार गंज: 27 बच्चे दांग स्कूल में शिफ्ट हैं। कक्षा छह की दीपा ने बताया कि सोमवार को सब्जी स्वादिष्ट और घर जैसी थी। बाकी दिनों में आलू का पानी बांटा जाता है। कक्षा तीन के हस्सान अली और फैजान का कहना है कि दाल - चावल अच्छा नहीं होता है।

खराब खाने को झाड़ियों में फेंकते हैं
मझोला जूनियर एवं प्राथमिक स्कूल के बच्चों ने बताया कि सब्जी - चावल खाते-खाते ऊब चुके हैं। ऐसे में ज्यादातर बच्चे घरों से खाना लाते हैं। मिड डे मील के खाने को बच्चे स्कूल परिसर की झाड़ियों में फेंक देते हैं।

झाड़ू लगाते मिले बच्चे
प्राइमरी कन्या पाठशाला खुशहालपुर में मध्याह्न भोजन के समय बच्चे झाड़ू लगाते नजर आए। प्रधान अध्यापिका अविनाश रानी ने बताया कि पंजीकृत 89 बच्चों में से 45 बच्चे आए थे और उन्हें सब्जी के साथ रोटी दी गई।

ये है मिड डे मील की सूची
सोमवार को रोटी-सब्जी के साथ फल, मंगलवार को दाल-चावल, बुधवार को तहरी के साथ दूध, गुरुवार को सब्जी रोटी, शुक्रवार को तहरी, शनिवार को सब्जी चावल वितरण होता है।

दूध में ज्यादा पानी होने के कारण नहीं पीते हैं। कभी-कभी मैडम के कहने पर भले पी लें। - संजना, कक्षा आठ
चार-पांच दिन खराब खाने के कारण पेट में दर्द होने लगा। इसलिए यहां खाना नहीं खाते हैं। - ललिता, कक्षा छह।
कक्षा छह में पूरे साल घर से ही टिफिन लेकर आई हूं। यहां खाने का मन नहीं करता है। - पायल, कक्षा सात।

फल के नाम पर सिर्फ केला
साप्ताहिक रोस्टर के हिसाब से सोमवार को बच्चों को फल वितरण होता है। बच्चों को पिछले कई सालों से फल के नाम पर सिर्फ केला एक-एक दिया जाता है। केले भी खराब और छोटे वितरण होते हैं। सोमवार को अच्छी क्वालिटी के केले बांटे गए।


मिड डे मील के खाने की चेकिंग होती है। इसके लिए डीएम के स्तर पर कमेटी भी गठित है। कमेटी और शिक्षा विभाग के अधिकारी खाने की चेकिंग करेंगे। - योगेंद्र कुमार, बीएसए
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