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जो राम का नहीं, वह हमारे किसी काम का नहीं:जगदगुरु शंकराचार्य
Updated Sat, 17 Nov 2018 01:44 AM IST
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चंदौसी। शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सारा देश एक है और आंदोलित है। सरकार जन अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए राम मंदिर का निर्माण नहीं कराती है तो यह योगी आदित्यनाथ व नरेंद्र मोदी की रामभक्ति की निष्ठा पर प्रश्नचिह्न होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अध्यादेश लाकर या फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भूमि अधिग्रहण कर राम मंदिर बनवाना चाहिए। गाय को सिर्फ पशु नहीं माना चाहिए, वह भारतीय सनातन संस्कृति की धरोहर है। इस पर केंद्रीय कानून बनना चाहिए। हिंदू समाज को संकल्प लेना चाहिए कि वह सिर्फ गाय का ही दूध पीयेगा, तो गोहत्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।
वह शुक्रवार को शुगर मिल का आगाज करने के बाद पत्रकारों से बातें कर रहे थे।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर तो पहले से ही है। सरकार को तो सिर्फ उसे भव्यता प्रदान करना है। सरकारों को समझ लेना चाहिए, जो राम का नहीं, वह हमारे काम का नहीं। महात्मा गांधी ने भी रामराज की कल्पना की थी, तभी अंत्योदय की परिकल्पना सामने आई। रामराज का अर्थ होता है समाज के अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाए। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गांधी जी शिष्य हैं, इसलिए आवश्यक है कि पहले राम मंदिर का निर्माण किया जाए। क्योंकि काम कोई व्यक्ति या संस्था के प्रतीक नहीं है, अपितु वह आदर्श हैं, जिनका अनुकरण पूरा विश्व कर रहा है। सरकार को राम मंदिर बनाकर जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर उनकी प्राथमिकता में नहीं है, इससे बड़ी प्राथमिकताएं और भी हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनसमर्थन का बड़ा महत्व होता है। यहां मामला करोड़ों की आस्था का है। जब विघटनकारी आरक्षण व अन्य छोटे-छोटे मामलों पर अदालत विशेष तौर पर खुल सकती है तो सुप्रीम कोर्ट को राम मंदिर पर भी दोबारा विचार करना चाहिए।
अध्यादेश लाकर राम मंदिर बनवाए सरकार: जगद्गुरु शंकराचार्य
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी की थी रामराज की कल्पना
अयोध्या में श्रीराम मंदिर पहले से ही, केंद्र व प्रदेश सरकारों को सिर्फ भव्यता प्रदान करनी है
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो-
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वह शुक्रवार को शुगर मिल का आगाज करने के बाद पत्रकारों से बातें कर रहे थे।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर तो पहले से ही है। सरकार को तो सिर्फ उसे भव्यता प्रदान करना है। सरकारों को समझ लेना चाहिए, जो राम का नहीं, वह हमारे काम का नहीं। महात्मा गांधी ने भी रामराज की कल्पना की थी, तभी अंत्योदय की परिकल्पना सामने आई। रामराज का अर्थ होता है समाज के अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाए। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गांधी जी शिष्य हैं, इसलिए आवश्यक है कि पहले राम मंदिर का निर्माण किया जाए। क्योंकि काम कोई व्यक्ति या संस्था के प्रतीक नहीं है, अपितु वह आदर्श हैं, जिनका अनुकरण पूरा विश्व कर रहा है। सरकार को राम मंदिर बनाकर जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर उनकी प्राथमिकता में नहीं है, इससे बड़ी प्राथमिकताएं और भी हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनसमर्थन का बड़ा महत्व होता है। यहां मामला करोड़ों की आस्था का है। जब विघटनकारी आरक्षण व अन्य छोटे-छोटे मामलों पर अदालत विशेष तौर पर खुल सकती है तो सुप्रीम कोर्ट को राम मंदिर पर भी दोबारा विचार करना चाहिए।
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अध्यादेश लाकर राम मंदिर बनवाए सरकार: जगद्गुरु शंकराचार्य
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी की थी रामराज की कल्पना
अयोध्या में श्रीराम मंदिर पहले से ही, केंद्र व प्रदेश सरकारों को सिर्फ भव्यता प्रदान करनी है
अमर उजाला ब्यूरो
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