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जूता-चप्पल कारीगरों की हड़ताल जारी, उत्पादन चौपट
Updated Sat, 17 Nov 2018 01:44 AM IST
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चंदौसी। मजदूरी बढ़ाने के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिक हड़ताल पर हैं लेकिन ना तो श्रम विभाग को चिंता है और न ही प्रशासन को, कारखाना संचालक भी खामोश हैं। श्रमिक तीसरे दिन भी आंबेडकर पार्क खुर्जागेट पर बेमियादी धरने पर बैठे हैं लेकिन उनकी कोई फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। तीसरे दिन भी किसी अधिकारी ने उनकी सुधि नहीं ली।
चंदौसी में करीब पचास से अधिक छोटे बड़े जूता-चप्पल बनाने के कारखाने हैं जिसमें सैकड़ों श्रमिक कार्यरत हैं। लेकिन अब श्रमिकों का कहना है कि उन्हें प्रति जोड़ी जूता बनाने में बीस रुपये व प्रति जोड़ी चप्पल बनाने पर दस रुपये मिलते हैं। एक श्रमिक 12 जोड़ी जूते या फिर 24 जोड़ी चप्पले बना पाता है जिससे प्रति कारीगर पूरे दिन लगातार मेहनत करने के बाद 240 रुपये कमाता है लेकिन यह मजदूरी कम है। मजदूर मांग कर रहे हैं कि प्रति जोड़ी जूता बनाने पर पांच रुपये व प्रति जोड़ी चप्पल पर तीन रुपये बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ताकि मजदूर को दैनिक मजदूरी 300 से 312 रुपये तक प्रति कमा पाएगा। कई बार कारखाना संचालकों से मजदूरी बढ़ाने के लिए कहा गया लेकिन कारखाना प्रबंधक मजदूरी बढ़ाने को तैयार नहीं है। कोई संगठन नहीं है, इसलिए सौ से अधिक श्रमिकों ने एक साथ हड़ताल कर दी है, जिससे जूता चप्पल निर्माण ठप हो गया है। जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इसमें राजवीर सागर, राज कुमार, सौरभ, राकेश सागर, रविकांत, जुगुल किशोर, सोनू सागर, कन्हैया, दीपक, राजू गौतम, किशन कुमार आदि शामिल रहे। उधर, कारीगर राजवीर ने कहा कि जानकारी नहीं है कि असंगठित क्षेत्र क्या होता है या संगठित क्षेत्र किसे कहते हैं, कोई ऐसोसिएशन ही हमारी नहीं है, इसलिए हमारी मांगों पर भी कोई ध्यान नहीं देता है, रजिस्ट्रेशन के बारे में कभी किसी ने बताया ही नहीं। कारीगर हृदेश कुमार ने कहा कि श्रम प्रवर्तन विभाग में पंजीकरण आदि की व्यवस्था की कोई जानकारी नहीं है, यही कारण है कि किसी ने पंजीकरण कराया ही नहीं, कारखाना प्रबंधकों को चाहिए था कि यह लोग इसके बारे में बताते। हमें तो इतना मालूम है कि हमारी मजदूरी नहीं बढ़ रही है, जिसके लिए हम सभी संघर्ष कर रहे हैं।
कारीगर गौरव कुमार और राजू गौतम ने कहा कि हम लोगों का भी घर परिवार है, कड़ी मेहनत करके जूता चप्पल बनाते हैै, हमें हमारी मजदूरी भी देेने को तैयार नहीं है कारखाना प्रबंधक। धरना देने के तीसरे दिन भी कोई कारखाना प्रबंधक उनसे बातचीत करने नहीं आया है, लेकिन हड़ताल तभी खत्म होगी, जब मांगे पूरी हो जाएगी।
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चंदौसी में जूता-चप्पल का निर्माण होता है, धरना चल रहा है। इसकी भी जानकारी नहीं है, लेकिन कोई लिखित रूप में उन्हें जानकारी देगा तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। श्रमिक असंगठित क्षेत्र के हैं, कोई एसोसिएशन भी नहीं है, ऐसे में समझौता ही कराया जा सकता है। श्रमिकों को ऑन लाइन अपना पंजीकरण कराना चाहिए।
जितेंद्र चौधरी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी चंदौसी
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चंदौसी में करीब पचास से अधिक छोटे बड़े जूता-चप्पल बनाने के कारखाने हैं जिसमें सैकड़ों श्रमिक कार्यरत हैं। लेकिन अब श्रमिकों का कहना है कि उन्हें प्रति जोड़ी जूता बनाने में बीस रुपये व प्रति जोड़ी चप्पल बनाने पर दस रुपये मिलते हैं। एक श्रमिक 12 जोड़ी जूते या फिर 24 जोड़ी चप्पले बना पाता है जिससे प्रति कारीगर पूरे दिन लगातार मेहनत करने के बाद 240 रुपये कमाता है लेकिन यह मजदूरी कम है। मजदूर मांग कर रहे हैं कि प्रति जोड़ी जूता बनाने पर पांच रुपये व प्रति जोड़ी चप्पल पर तीन रुपये बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ताकि मजदूर को दैनिक मजदूरी 300 से 312 रुपये तक प्रति कमा पाएगा। कई बार कारखाना संचालकों से मजदूरी बढ़ाने के लिए कहा गया लेकिन कारखाना प्रबंधक मजदूरी बढ़ाने को तैयार नहीं है। कोई संगठन नहीं है, इसलिए सौ से अधिक श्रमिकों ने एक साथ हड़ताल कर दी है, जिससे जूता चप्पल निर्माण ठप हो गया है। जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इसमें राजवीर सागर, राज कुमार, सौरभ, राकेश सागर, रविकांत, जुगुल किशोर, सोनू सागर, कन्हैया, दीपक, राजू गौतम, किशन कुमार आदि शामिल रहे। उधर, कारीगर राजवीर ने कहा कि जानकारी नहीं है कि असंगठित क्षेत्र क्या होता है या संगठित क्षेत्र किसे कहते हैं, कोई ऐसोसिएशन ही हमारी नहीं है, इसलिए हमारी मांगों पर भी कोई ध्यान नहीं देता है, रजिस्ट्रेशन के बारे में कभी किसी ने बताया ही नहीं। कारीगर हृदेश कुमार ने कहा कि श्रम प्रवर्तन विभाग में पंजीकरण आदि की व्यवस्था की कोई जानकारी नहीं है, यही कारण है कि किसी ने पंजीकरण कराया ही नहीं, कारखाना प्रबंधकों को चाहिए था कि यह लोग इसके बारे में बताते। हमें तो इतना मालूम है कि हमारी मजदूरी नहीं बढ़ रही है, जिसके लिए हम सभी संघर्ष कर रहे हैं।
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कारीगर गौरव कुमार और राजू गौतम ने कहा कि हम लोगों का भी घर परिवार है, कड़ी मेहनत करके जूता चप्पल बनाते हैै, हमें हमारी मजदूरी भी देेने को तैयार नहीं है कारखाना प्रबंधक। धरना देने के तीसरे दिन भी कोई कारखाना प्रबंधक उनसे बातचीत करने नहीं आया है, लेकिन हड़ताल तभी खत्म होगी, जब मांगे पूरी हो जाएगी।
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चंदौसी में जूता-चप्पल का निर्माण होता है, धरना चल रहा है। इसकी भी जानकारी नहीं है, लेकिन कोई लिखित रूप में उन्हें जानकारी देगा तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। श्रमिक असंगठित क्षेत्र के हैं, कोई एसोसिएशन भी नहीं है, ऐसे में समझौता ही कराया जा सकता है। श्रमिकों को ऑन लाइन अपना पंजीकरण कराना चाहिए।
जितेंद्र चौधरी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी चंदौसी