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आतंकवाद के खात्मे के साथ दुश्मन को सिखाएं सबक
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मुरादाबाद।
...चारपाई पर बैठी सावित्री देवी को जब पुलवामा हमले का प्रतिशोध वायु सेना द्वारा लेने की जानकारी मिली तो उनकी आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे। उनके जेहन में 57 वर्ष पहले की वह दुख भरी यादें ताजा हो गईं, जब पति के पति गंगाप्रसाद वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए थे। मूलरूप से हरदोई के शाहबाद के मीरा बस्ती और वर्तमान में अवंतिका कालोनी डबल स्टोरी निवासी सावित्री देवी के सीने में पति की शहादत के 57 वर्ष बीत जाने के बाद भी गम बरकरार है। वह कहती हैं कि पति के जाने के गम की भरपाई नहीं हो सकती है, लेकिन वायु सेना के जवाबी हमले से कलेजे को ठंडक मिली है। एक शहीद की विधवा होने के बावजूद जिंदगी संघर्षों में बीत गई। जब-जब देश पर हमला होता है, दुख की यादें ताजा हो जाती हैं। वह पल याद आता है, जब पति के शव की जगह तिरंगा और बक्सा आया था। उन्होंने कहा कि भगवान के सामने चिराग जला रहे हैं कि आतंकवाद और दुश्मन देशों का सफाया हो जाए, ताकि जो दर्द और परेशानी हमारे परिवार ने झेली है, वह किसी को झेलनी नहीं पड़े। वह कहती हैं कि वह आठ माह की गर्भवती थीं, जब पति शहीद हुए। बेटा अनिल भंवर कहते हैं कि ऐसी कार्रवाई तो बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। मोदी सरकार ने जो कहा था वह करके दिखाया। शहीद का बेटा हूं, इसलिए कह सकता हूं कि यह कार्रवाई शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। जब भी हमला होता है तो मन व्याकुल हो जाता है और सीमा पर जाकर खुद ही दुश्मन से बदला लेने की भावना प्रबल हो जाती है। जब भी सैनिक मारे जाते थे तो मन में अफसोस होता था। लगता था कि कब वह दिन आएगा जब हमारा देश अपना बदला लेगा। आज वायु सेना के साहसिक कदम से सुकून मिला है।
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...चारपाई पर बैठी सावित्री देवी को जब पुलवामा हमले का प्रतिशोध वायु सेना द्वारा लेने की जानकारी मिली तो उनकी आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे। उनके जेहन में 57 वर्ष पहले की वह दुख भरी यादें ताजा हो गईं, जब पति के पति गंगाप्रसाद वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए थे। मूलरूप से हरदोई के शाहबाद के मीरा बस्ती और वर्तमान में अवंतिका कालोनी डबल स्टोरी निवासी सावित्री देवी के सीने में पति की शहादत के 57 वर्ष बीत जाने के बाद भी गम बरकरार है। वह कहती हैं कि पति के जाने के गम की भरपाई नहीं हो सकती है, लेकिन वायु सेना के जवाबी हमले से कलेजे को ठंडक मिली है। एक शहीद की विधवा होने के बावजूद जिंदगी संघर्षों में बीत गई। जब-जब देश पर हमला होता है, दुख की यादें ताजा हो जाती हैं। वह पल याद आता है, जब पति के शव की जगह तिरंगा और बक्सा आया था। उन्होंने कहा कि भगवान के सामने चिराग जला रहे हैं कि आतंकवाद और दुश्मन देशों का सफाया हो जाए, ताकि जो दर्द और परेशानी हमारे परिवार ने झेली है, वह किसी को झेलनी नहीं पड़े। वह कहती हैं कि वह आठ माह की गर्भवती थीं, जब पति शहीद हुए। बेटा अनिल भंवर कहते हैं कि ऐसी कार्रवाई तो बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। मोदी सरकार ने जो कहा था वह करके दिखाया। शहीद का बेटा हूं, इसलिए कह सकता हूं कि यह कार्रवाई शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। जब भी हमला होता है तो मन व्याकुल हो जाता है और सीमा पर जाकर खुद ही दुश्मन से बदला लेने की भावना प्रबल हो जाती है। जब भी सैनिक मारे जाते थे तो मन में अफसोस होता था। लगता था कि कब वह दिन आएगा जब हमारा देश अपना बदला लेगा। आज वायु सेना के साहसिक कदम से सुकून मिला है।