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गांव- गांव में शिक्षा का अलख जगा रहे राघवेंद्र
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मिर्जापुर। सिटी विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय मेवली में तैनात सहायक अध्यापक घर-घर जाकर लोगों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। कोरोना के कारण बच्चों के विद्यालय न आने पर उन्होंने स्वत: ही अपनी जिम्मेदारी समझते हुए घर-घर जाकर बच्चों को चिह्नित किया और उनको उनके घरों पर ही शिक्षित कर रहे हैं। इतना ही नहीं बच्चों के साथ-साथ आवश्यकतानुसार अभिभावकों को भी जानकारी दे रहे हैं। जनसेवा की इस भावना के चलते उनको विभिन्न संस्थाओं के साथ ही विभागीय रूप से भी सम्मानित भी किया जा चुका है।
जनसेवा की यह भावना उन्होंने अपने पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विद्यासागर शुक्ल से पायी है। राघवेंद्र शुक्ला को रोटरी क्लब द्वारा शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी किया गया। साथ ही तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी द्वारा भी उत्कृष्ट अध्यापक के रूप में भी सम्मानित किया गया है। लॉकडाउन के दौरान बच्चों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शिक्षण कार्य कराने का पूरा प्रयास किया पर गरीबी के कारण यह संभव नहीं हुआ। बच्चों के पास स्मार्टफोन,टीवी, रेडियो की अनुपलब्धता के कारण उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया। विद्यालय में समस्त स्टाफ के साथ ‘आपका विद्यालय, आपके द्वार‘ के तहत कार्य शुरू किया। उनके इस पहल को अभिभावकों ने काफी सराहा। अभिभावक रोजगार के निमित्त बाहर चले जाते हैं, इसलिए बच्चों को समूह में बैठकर पढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया गया। इस कार्य में विद्यालय के सहायक अध्यापक राम जी श्रीवास्तव, सुधारानी सिंह, विनीता व शिल्पा देवी शिक्षकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिलता रहा। खंड शिक्षा अधिकारी महेंद्र मौर्य ने राघवेंद्र शुक्ला की जिम्मेदारियों को देखते हुए उनको शिक्षक संकुल के पद पर तैनात कर दिया ताकि वे विद्यालय के साथ-साथ ब्लॉक को भी एक प्रेरक ब्लॉक बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
बच्चों को दिलाया राज्यपाल अवार्ड
मिर्जापुर। राघवेन्द्र कुंवर शुक्ल एक स्काउट शिक्षक भी हैं और प्रदेश स्तर के एक कुशल स्काउट प्रशिक्षक भी हैं। समय- समय पर वे विभिन्न शिविरों में तो जाते ही रहते हैं। इसके साथ ही अपने विद्यालय की ही दो बालिकाओं को प्रशिक्षित कर उनको शिविर में भेजा। नतीजे में बालिकाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया और स्काउटिंग के माध्यम से राज्यपाल अवार्ड भी प्राप्त किया।
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जनसेवा की यह भावना उन्होंने अपने पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विद्यासागर शुक्ल से पायी है। राघवेंद्र शुक्ला को रोटरी क्लब द्वारा शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी किया गया। साथ ही तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी द्वारा भी उत्कृष्ट अध्यापक के रूप में भी सम्मानित किया गया है। लॉकडाउन के दौरान बच्चों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शिक्षण कार्य कराने का पूरा प्रयास किया पर गरीबी के कारण यह संभव नहीं हुआ। बच्चों के पास स्मार्टफोन,टीवी, रेडियो की अनुपलब्धता के कारण उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया। विद्यालय में समस्त स्टाफ के साथ ‘आपका विद्यालय, आपके द्वार‘ के तहत कार्य शुरू किया। उनके इस पहल को अभिभावकों ने काफी सराहा। अभिभावक रोजगार के निमित्त बाहर चले जाते हैं, इसलिए बच्चों को समूह में बैठकर पढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया गया। इस कार्य में विद्यालय के सहायक अध्यापक राम जी श्रीवास्तव, सुधारानी सिंह, विनीता व शिल्पा देवी शिक्षकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिलता रहा। खंड शिक्षा अधिकारी महेंद्र मौर्य ने राघवेंद्र शुक्ला की जिम्मेदारियों को देखते हुए उनको शिक्षक संकुल के पद पर तैनात कर दिया ताकि वे विद्यालय के साथ-साथ ब्लॉक को भी एक प्रेरक ब्लॉक बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
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बच्चों को दिलाया राज्यपाल अवार्ड
मिर्जापुर। राघवेन्द्र कुंवर शुक्ल एक स्काउट शिक्षक भी हैं और प्रदेश स्तर के एक कुशल स्काउट प्रशिक्षक भी हैं। समय- समय पर वे विभिन्न शिविरों में तो जाते ही रहते हैं। इसके साथ ही अपने विद्यालय की ही दो बालिकाओं को प्रशिक्षित कर उनको शिविर में भेजा। नतीजे में बालिकाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया और स्काउटिंग के माध्यम से राज्यपाल अवार्ड भी प्राप्त किया।
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