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Mirzapur News: छह महीने में ही दम तोड़ दे रही पहाड़ी नदियां
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मिर्जापुर। जिले में पहाड़ी नदियां छह महीनें में ही दम तोड़ दे रही हैं। यदि खजुरी नदी की बात करें तो जनवरी में नदी नाले में तब्दील हो गई है। ऐसे में इस नदी से जुड़ी नहरें भी पानी का अभाव झेल रही हैं। जिले में ऐसी कई नदियां है जिन पर हजारो लोग रोजी रोजगार के लिए नदियों पर आश्रित हैं। पहाड़ी नदियों के सूख जाने के चलते उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
जिले में पहाड़ों से निकली आधा दर्जन से अधिक नदियां हैं। जो 20 से 28 किलोमीटर का सफर तय करती हुई गंगा में मिल रही हैं। ऐसे नदियों से सैकड़ों की संख्या में गांव जुड़े हुए हैं। छानबे क्षेत्र में पहाड़ो से निकली कर्णावती नदी जनवरी महीने में दम तोड़ चुकी है जगह-जगह सूखी नदी के चलते पानी की किल्लत शुरु हो गई है। जिला मुख्यालय से सटे खजुरी नदी की बात करें तो पहाड़ से निकली उक्त नदी से शाहपुर चौसा, बरजी मुकुंदपुर, रायपुर पोख्ता, कतरन, भेंवरकरमनपुर, राजपुर, देवापुर पचवल, दुल्लहपुर, चेरुईराम, हरिहहरपुर बेदौली, महेंवा, इंदी पर्वतपुर, वीरशाहपुर, बढ़ौली, भटौली सहित अन्य गांव जुड़े हुए हैं। एक समय था कि उक्त नदी भयंकर गर्मी में भी पानी से लबालब रहा करते थे। फरवरी और मार्च महीने में पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। जिगना छानबे क्षेत्र के ग्राम पंचायत चितौली ,बघेडाखुर्द ,कुशहा ,बघेडाकला,कोलाही ,चतुरिया ,विजयपुर ,भाउसिंहका पूरा ,गाजीपुर ,भटेवरा, बलापुर ,अरगीसरपती, बिरोही ,महडौरा ,अकोढी, देवरी आदि मे सिंचाई के लिए मात्र कर्णावती नदी सहारा है। लेकिन वर्षा न होने से नदी सूख गई है। जगह जगह जहाँ चेक डैम बने हैं जहां इन दिनों कीचड़युक्त पानी नजर आ रहे हैं।
लोवर खजुरी से ठप हुआ नहरों का संचालन
मिर्जापुर। खजुरी नदी से जुड़े लोवर खजुरी बांध से निकले दाई और बाई नजर का संचालन पानी के अभाव में पूरी तरह से ठप है। बारिश के बाद कुछ ही महीने में किसानों को पानी का संकट झेलना पड़ता है। सीजन के दौरान पानी न मिलने से किसान पूरी तरह से वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे खेती करने को विवश हैं।
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मार्च बाद ठप हो जाता है पंप कनालों का संचालन
मिर्जापुर। खजुरी नदी में लघुडाल विभाग की ओर से तीन पंप कैनाल स्थापित किया गया है। जनवरी माह में ही नाले के रुप में तब्दील नदी मार्च आते-आते पूरी तरह से सूख जाती है। ऐसे में पानी के अभाव में पंप कैनाल का संचालन न होने से दुबेपुर, दुल्लहपुर, ककराही, खजुरी और हरिहरपुर बेदौली के किसान गेहूं की अंतिम सिंचाई भी नही कर पाते हैं।
वर्जन
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शासन के निर्देश पर मनरेगा योजना के तहत नदी और नालों का जीर्णोद्धार कराए जाने की योजना है। जिससे बंधी और बंधों में बारिश के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी एकत्रित हो सके। पिछले वर्ष इस योजना के तहत कुछ विकास खंडों में संबंधित ग्राम पंचायत की ओर से कार्य कराया गया था।
-वैभव सिंह, अधिशासी अभियंता, मिर्जापुर नहर प्रखंड।
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जिले में पहाड़ों से निकली आधा दर्जन से अधिक नदियां हैं। जो 20 से 28 किलोमीटर का सफर तय करती हुई गंगा में मिल रही हैं। ऐसे नदियों से सैकड़ों की संख्या में गांव जुड़े हुए हैं। छानबे क्षेत्र में पहाड़ो से निकली कर्णावती नदी जनवरी महीने में दम तोड़ चुकी है जगह-जगह सूखी नदी के चलते पानी की किल्लत शुरु हो गई है। जिला मुख्यालय से सटे खजुरी नदी की बात करें तो पहाड़ से निकली उक्त नदी से शाहपुर चौसा, बरजी मुकुंदपुर, रायपुर पोख्ता, कतरन, भेंवरकरमनपुर, राजपुर, देवापुर पचवल, दुल्लहपुर, चेरुईराम, हरिहहरपुर बेदौली, महेंवा, इंदी पर्वतपुर, वीरशाहपुर, बढ़ौली, भटौली सहित अन्य गांव जुड़े हुए हैं। एक समय था कि उक्त नदी भयंकर गर्मी में भी पानी से लबालब रहा करते थे। फरवरी और मार्च महीने में पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। जिगना छानबे क्षेत्र के ग्राम पंचायत चितौली ,बघेडाखुर्द ,कुशहा ,बघेडाकला,कोलाही ,चतुरिया ,विजयपुर ,भाउसिंहका पूरा ,गाजीपुर ,भटेवरा, बलापुर ,अरगीसरपती, बिरोही ,महडौरा ,अकोढी, देवरी आदि मे सिंचाई के लिए मात्र कर्णावती नदी सहारा है। लेकिन वर्षा न होने से नदी सूख गई है। जगह जगह जहाँ चेक डैम बने हैं जहां इन दिनों कीचड़युक्त पानी नजर आ रहे हैं।
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लोवर खजुरी से ठप हुआ नहरों का संचालन
मिर्जापुर। खजुरी नदी से जुड़े लोवर खजुरी बांध से निकले दाई और बाई नजर का संचालन पानी के अभाव में पूरी तरह से ठप है। बारिश के बाद कुछ ही महीने में किसानों को पानी का संकट झेलना पड़ता है। सीजन के दौरान पानी न मिलने से किसान पूरी तरह से वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे खेती करने को विवश हैं।
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मार्च बाद ठप हो जाता है पंप कनालों का संचालन
मिर्जापुर। खजुरी नदी में लघुडाल विभाग की ओर से तीन पंप कैनाल स्थापित किया गया है। जनवरी माह में ही नाले के रुप में तब्दील नदी मार्च आते-आते पूरी तरह से सूख जाती है। ऐसे में पानी के अभाव में पंप कैनाल का संचालन न होने से दुबेपुर, दुल्लहपुर, ककराही, खजुरी और हरिहरपुर बेदौली के किसान गेहूं की अंतिम सिंचाई भी नही कर पाते हैं।
वर्जन
शासन के निर्देश पर मनरेगा योजना के तहत नदी और नालों का जीर्णोद्धार कराए जाने की योजना है। जिससे बंधी और बंधों में बारिश के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी एकत्रित हो सके। पिछले वर्ष इस योजना के तहत कुछ विकास खंडों में संबंधित ग्राम पंचायत की ओर से कार्य कराया गया था।
-वैभव सिंह, अधिशासी अभियंता, मिर्जापुर नहर प्रखंड।