{"_id":"6aaee636c78ad4a0b60fb6a3","slug":"based-on-logic-and-mathematics-mirzapur-news-c-192-1-svns1033-161510-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: संस्कृत का व्याकरण, पाणिनि की अष्टाध्यायी तर्क गणित पर आधारित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: संस्कृत का व्याकरण, पाणिनि की अष्टाध्यायी तर्क गणित पर आधारित
विज्ञापन
केबी कालेज में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करती वक्ता, सोशल मीडिया
- फोटो : 1
डिजिटल युग में संस्कृत की प्रासंगिकता विषय पर केबी पीजी कॉलेज में संगोष्ठी
मिर्जापुर। ग्लोबल संस्कृत फोरम विंध्याचल मंडल और केबी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को संगोष्ठी हुई। संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘डिजिटल युग में संस्कृत की प्रासंगिकता’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज प्रयागराज के संस्कृत विभागाध्यक्ष व ग्लोबल संस्कृत फोरम (प्रयागराज मंडल) के संयोजक डॉ. आरुणेय मिश्र ने कहा कि संस्कृत का व्याकरण, विशेषकर पाणिनि की अष्टाध्यायी, पूरी तरह तर्क और गणितीय नियमों पर आधारित है। यह एल्गोरिदम की तरह काम करता है, जो कंप्यूटर की कोडिंग के बेहद करीब है।
प्राच्य भाषा संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिशिर चंद्र उपाध्याय ने कहा कि आधुनिक संस्कृत संगीत में यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत रॉक, संस्कृत रैप और सुगम संगीत को नए आयाम दिए जा रहे हैं। विशिष्ट अतिथि केएम पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रितु सिंह ने कहा कि पाणिनि व्याकरण से लेकर आधुनिक संस्कृत तक संगीत का सफर ध्वन्यात्मक शुद्धता, शास्त्रीय नियमों और आधुनिक प्रयोगों का एक अद्भुत संयोजन है।
सीएमपी पीजी कॉलेज प्रयागराज के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न भाषाओं के आपसी अनुवाद के लिए संस्कृत बेहतरीन मध्यस्थ भाषा का काम कर सकती है।
विज्ञापन
संचालन करते हुए संयोजक डॉ. किरन प्रकाश ने कहा कि डिजिटल दौर में संस्कृत भाषा केवल कर्मकांड या इतिहास तक सीमित नहीं है। प्राच्य भाषा संस्कृत के लिए आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने किया।
इस मौके पर प्रो. अशोक कुमार सिंह चंदेल, प्रो. इंदुभूषण द्विवेदी, प्रो. मकरंद जायसवाल, प्रो. प्रभात सिंह, डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. सत्यकेतु शुक्ल, डॉ. स्नेह लता पटेल, डॉ. नेहा पटेल व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मिर्जापुर। ग्लोबल संस्कृत फोरम विंध्याचल मंडल और केबी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को संगोष्ठी हुई। संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘डिजिटल युग में संस्कृत की प्रासंगिकता’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज प्रयागराज के संस्कृत विभागाध्यक्ष व ग्लोबल संस्कृत फोरम (प्रयागराज मंडल) के संयोजक डॉ. आरुणेय मिश्र ने कहा कि संस्कृत का व्याकरण, विशेषकर पाणिनि की अष्टाध्यायी, पूरी तरह तर्क और गणितीय नियमों पर आधारित है। यह एल्गोरिदम की तरह काम करता है, जो कंप्यूटर की कोडिंग के बेहद करीब है।
प्राच्य भाषा संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिशिर चंद्र उपाध्याय ने कहा कि आधुनिक संस्कृत संगीत में यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत रॉक, संस्कृत रैप और सुगम संगीत को नए आयाम दिए जा रहे हैं। विशिष्ट अतिथि केएम पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रितु सिंह ने कहा कि पाणिनि व्याकरण से लेकर आधुनिक संस्कृत तक संगीत का सफर ध्वन्यात्मक शुद्धता, शास्त्रीय नियमों और आधुनिक प्रयोगों का एक अद्भुत संयोजन है।
विज्ञापन
सीएमपी पीजी कॉलेज प्रयागराज के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न भाषाओं के आपसी अनुवाद के लिए संस्कृत बेहतरीन मध्यस्थ भाषा का काम कर सकती है।
विज्ञापन
संचालन करते हुए संयोजक डॉ. किरन प्रकाश ने कहा कि डिजिटल दौर में संस्कृत भाषा केवल कर्मकांड या इतिहास तक सीमित नहीं है। प्राच्य भाषा संस्कृत के लिए आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने किया।
इस मौके पर प्रो. अशोक कुमार सिंह चंदेल, प्रो. इंदुभूषण द्विवेदी, प्रो. मकरंद जायसवाल, प्रो. प्रभात सिंह, डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. सत्यकेतु शुक्ल, डॉ. स्नेह लता पटेल, डॉ. नेहा पटेल व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।