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विंध्याचल: मातृ नवमी पर सीता कुंड में स्नान और तर्पण के लिए उमड़ी महिलाओं की भीड़, सदियों से चली आ रही ये पंरपरा
Thu, 30 Sep 2021 02:51 PM IST
उत्पल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 30 Sep 2021 02:51 PM IST
सार
सीताकुंड पर स्नान बाद महिलाओं ने तर्पण कर अपने पूर्वजों को याद किया। महिलाओं ने सौभाग्य सामग्री का दान भी दिया। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है।
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सीता कुंड में स्नान के लिए उमड़ी महिलाओं की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मातृ नवमी तिथि पर विंध्याचल स्थित अष्टभुजा के पहाड़ी पर स्थित सीता कुंड पर महिलाओं ने स्नान के बाद तर्पण किया। गुरुवार अहले सुबह से ही सीता कुंड पर स्नान करने के लिए महिलाओं का रेला उमड़ पड़ा। सीताकुंड पर स्नान बाद महिलाओं ने तर्पण कर अपने पूर्वजों को याद किया।
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महिलाओं ने सौभाग्य सामग्री का दान भी दिया। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सीता ने वनवास के दौरान अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। तब से ही यह पंरपरा चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस श्राद्ध के करने से सुहागिन स्त्रियों का सौभाग्य बढ़ता है। पितरगण प्रसन्न होते हैं।
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पितृपक्ष के बारे में
भारतीय संस्कृति में पितरों के लिए एक पक्ष ही निर्धारित कर दिया गया है, जो आश्विन मास से कृष्ण पक्ष के नाम से है, उसे लोग पितृपक्ष के नाम से जानते हैं। पितरों के उद्देश्य से पूर्णिमा से आरंभ होकर, प्रतिपदा से अमावस्या तक कुल सोलह तिथियों का उल्लेख है।
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वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पंडित तियोगी नारायण मिश्र ने बताया कि जिन के पिता या माता दिवंगत हो चुके हैं, ऐसे लोग अपने-अपने पितरों का श्राद्ध पितृपक्ष में करते हैं। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि का ज्ञान नहीं होता, ऐसे लोग स्त्रियों से संबंधित तिथि को मातृ नवमी में मान लेते हैं।
मातृ नवमी का महत्व
जो लोग केवल एक ही तिथि करना चाहते हैं वह अमावस्या में माता-पिता एवं नाना-नानी का श्राद्ध अमावस्या को कर देते हैं। इस तरह से कुल पितरों की सत्रह तिथि होती है। जिसमें से स्त्री समुदाय का मातृ नवमी में ही श्राद्ध किया जाता है। इसे मातृ नवमी एवं बुढ़िया नवमी के नाम से जाना जाता है।
मातृ नवमी के दिन सुहागिन स्त्री को भोजन कराकर सौभाग्य की सामग्री भी दी जाती है। यह तिथि पितृपक्ष के मध्य में पड़ती है। इस दिन सीता कुंड पर सौभाग्य सामग्री का दान तथा स्नान का एवं पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है। यह श्राद्ध अष्टभुजा पहाड़ी पर स्थित सीता कुंड और रामगया घाट पर किया जाता है।
मातृ नवमी के दिन सुहागिन स्त्री को भोजन कराकर सौभाग्य की सामग्री भी दी जाती है। यह तिथि पितृपक्ष के मध्य में पड़ती है। इस दिन सीता कुंड पर सौभाग्य सामग्री का दान तथा स्नान का एवं पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है। यह श्राद्ध अष्टभुजा पहाड़ी पर स्थित सीता कुंड और रामगया घाट पर किया जाता है।