{"_id":"68d2f6379b2a9b6c280753ea","slug":"devotees-are-delighted-to-see-the-form-of-brahmacharini-pray-for-happiness-and-prosperity-by-worshipping-her-mirzapur-news-c-192-1-svns1034-140644-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: ब्रह्मचारिणी स्वरूप के दर्शन कर भक्त निहाल, आराधना कर मांगी सुख-समृद्धि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: ब्रह्मचारिणी स्वरूप के दर्शन कर भक्त निहाल, आराधना कर मांगी सुख-समृद्धि
विज्ञापन
शारदीय नवरात्र मेले के द्वितीय तिथि पर मां के दर्शन पूजन के लिए मंदिर प्रांगण में लगी भक्तों की
विंध्याचल । शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को भी विंध्य धाम देवी भक्तों से पटा रहा। भक्त मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के लिए बेताब रहे। गलियां भक्तों से पटी रहीं। भक्तों ने दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी स्वरूप का दर्शन किया। परिवार के लिए मंगलकामना की। गंगा घाटों पर देर रात तक स्नान करने का तांता लगा रहा। भोर में चार बजे मंगला आरती से पहले ही गर्भगृह के दोनों मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारे लगी रहीं। चार बजे मंगला आरती के बाद मां का कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। पट खुलते ही माता के जयकारे से विंध्य दरबार गूंज उठा।
मां का गुड़हल, गुलाब, कमल पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से शृंगार किया गया। मां के अद्भुत स्वरूप का दर्शन कर भक्त अभिभूत हो गए। न्यू वीआईपी रोड, जयपुरिया गली, सदर बाजार और पक्का घाट गली में भक्तों की लगी लंबी कतारें लगी रहीं। किसी ने गर्भगृह से तो कोई झांकी से मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर भाव विभोर हो गया। मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के बाद श्रद्धालु नंगे पांव त्रिकोण यात्रा के लिए निकल पड़े। पहले कालीखोह पहुंचकर माता काली के दर्शन फिर अष्टभुजा देवी दरबार में पहुंचकर मां अष्टभुजा देवी का दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की।
काली खोह व अष्टभुजा मंदिर भक्तों से रहा पटा
काली खोह और अष्टभुजा मंदिर में मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ रही। मां काली के दर्शन के बाद किसी ने रोप-वे तो किसी ने मंदिर के पीछे बनी सिढ़ी के सहारे पहाड़ पर चढ़कर दुर्गम रास्तों के बीच होकर अष्टभुजा मंदिर पहुंच कर दर्शन किया।
विज्ञापन
त्रिकोण परिक्रमा : साधना बनती है सिद्धि
आचार्य त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया कि विंध्याचल में नवरात्र केवल उपवास और अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, साधना और आध्यात्मिक उत्थान का परम अवसर है। त्रिकोण मां विंध्यवासिनी, माता अष्टभुजा और महाकाली के अलौकिक दर्शन भक्तों को शक्ति, भक्ति और सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता है। यहां की साधना केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मा को ऊर्जा, चेतना और दिव्यता से भरने का एक दुर्लभ अवसर है। त्रिकोण यात्रा से भक्त को शक्ति मिलती है, साधना का सार मिलता है और जीवन में सिद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गंगा महाआरती में शामिल हुए जनप्रतिनिधि
मिर्जापुर। विंध्य विकास परिषद के तत्वावधान में शारदीय नवरात्र के पहले दिन पक्काघाट पर मां गंगा की महाआरती की गई। पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन श्रीमाली व विधान परिषद सदस्य श्याम नारायण उर्फ विनीत सिंह ने आरती व पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रिद्धि-सिद्धि के रूप में कन्याओं ने थाली लेकर मां गंगा की अर्चकों ने आरती उतारी। आरती प्रमुख रामानंद तिवारी व टीम की तरफ से मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया। इस दौरान युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष रोहित त्रिपाठी, मंगल, जितेंद्र मिश्रा, प्रशांत उपाध्याय, धीरज तिवारी, दिनेश गुप्ता, आनंद तिवारी आदि मौजूद रहे।
अदलपुरा शीतला धाम में देवी भक्तों की लगी रही कतार
सीखड़। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को अदलपुरा स्थित बड़ी शीतला माता धाम में देवी भक्तों की कतार लगी रही। मंगला आरती के बाद भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। वाराणसी, जौनपुर, भदोही, चंदौली, सोनभद्र जिले से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किया।
गड़बड़ा शीतला धाम में 30 हजार भक्तों ने टेका मत्था
हलिया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार गड़बड़ाधाम में नवरात्र के दूसरे दिन 30 हजार देवी भक्तों ने मां शीतला के दर्शन किए। भोर में भक्तों ने सेवटी नदी में स्नान किया। इसके बाद हाथ में नारियल, चुनरी, फूल माला लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
विज्ञापन
मां का गुड़हल, गुलाब, कमल पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से शृंगार किया गया। मां के अद्भुत स्वरूप का दर्शन कर भक्त अभिभूत हो गए। न्यू वीआईपी रोड, जयपुरिया गली, सदर बाजार और पक्का घाट गली में भक्तों की लगी लंबी कतारें लगी रहीं। किसी ने गर्भगृह से तो कोई झांकी से मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाकर भाव विभोर हो गया। मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के बाद श्रद्धालु नंगे पांव त्रिकोण यात्रा के लिए निकल पड़े। पहले कालीखोह पहुंचकर माता काली के दर्शन फिर अष्टभुजा देवी दरबार में पहुंचकर मां अष्टभुजा देवी का दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की।
विज्ञापन
काली खोह व अष्टभुजा मंदिर भक्तों से रहा पटा
काली खोह और अष्टभुजा मंदिर में मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ रही। मां काली के दर्शन के बाद किसी ने रोप-वे तो किसी ने मंदिर के पीछे बनी सिढ़ी के सहारे पहाड़ पर चढ़कर दुर्गम रास्तों के बीच होकर अष्टभुजा मंदिर पहुंच कर दर्शन किया।
विज्ञापन
त्रिकोण परिक्रमा : साधना बनती है सिद्धि
आचार्य त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया कि विंध्याचल में नवरात्र केवल उपवास और अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, साधना और आध्यात्मिक उत्थान का परम अवसर है। त्रिकोण मां विंध्यवासिनी, माता अष्टभुजा और महाकाली के अलौकिक दर्शन भक्तों को शक्ति, भक्ति और सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता है। यहां की साधना केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मा को ऊर्जा, चेतना और दिव्यता से भरने का एक दुर्लभ अवसर है। त्रिकोण यात्रा से भक्त को शक्ति मिलती है, साधना का सार मिलता है और जीवन में सिद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गंगा महाआरती में शामिल हुए जनप्रतिनिधि
मिर्जापुर। विंध्य विकास परिषद के तत्वावधान में शारदीय नवरात्र के पहले दिन पक्काघाट पर मां गंगा की महाआरती की गई। पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन श्रीमाली व विधान परिषद सदस्य श्याम नारायण उर्फ विनीत सिंह ने आरती व पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रिद्धि-सिद्धि के रूप में कन्याओं ने थाली लेकर मां गंगा की अर्चकों ने आरती उतारी। आरती प्रमुख रामानंद तिवारी व टीम की तरफ से मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया। इस दौरान युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष रोहित त्रिपाठी, मंगल, जितेंद्र मिश्रा, प्रशांत उपाध्याय, धीरज तिवारी, दिनेश गुप्ता, आनंद तिवारी आदि मौजूद रहे।
अदलपुरा शीतला धाम में देवी भक्तों की लगी रही कतार
सीखड़। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को अदलपुरा स्थित बड़ी शीतला माता धाम में देवी भक्तों की कतार लगी रही। मंगला आरती के बाद भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। वाराणसी, जौनपुर, भदोही, चंदौली, सोनभद्र जिले से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किया।
गड़बड़ा शीतला धाम में 30 हजार भक्तों ने टेका मत्था
हलिया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार गड़बड़ाधाम में नवरात्र के दूसरे दिन 30 हजार देवी भक्तों ने मां शीतला के दर्शन किए। भोर में भक्तों ने सेवटी नदी में स्नान किया। इसके बाद हाथ में नारियल, चुनरी, फूल माला लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे।