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Mirzapur News: देव दीपावली आज, 11 हजार दीपों से सजाया जाएगा विष्णु मंदिर
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देव दीपावली की पूर्व संध्या प सजी रंगोली, नारघाट पर तैयारियों का जायजा लेते ईओ जी.लाल।-सोशल मीड
मिर्जापुर। कार्तिक पूर्णिमा पांच नवंबर को धूमधाम से देव दीपावली मनाई जाएगी। पूर्व संध्या पर मंगलवार को नगर सहित ग्रामीण अंचलों में इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं।
दीपदान महोत्सव ज्यादातर स्थानों पर देवोत्थान एकादशी पर ही मनाया गया था, लेकिन विंध्याचल व नगर के कचहरी घाट, बड़ी माता इमली महादेव मंदिर पर देव दीपावली बुधवार को मनाई जाएगी। चेतगंज, चेतना सरोवर पर देव दीपावली धूमधाम से मनाई जाएगी। विष्णु मंदिर पर 11000 दीपों से सजाया जाएगा। चील्ह, कोन ब्लॉक क्षेत्र के भोगांव गंगा घाट, जगदीशपुर शिव मंदिर, मल्लेपुर गांव स्थित कुटी पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर दीपदान किया जाएगा।
प्रकाश की साधना और विज्ञान का संगम है देव दीपावली
संवाद न्यूज एजेंसी मिर्जापुर। देव दीपावली वह पावन पर्व है जो कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया था।उस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने स्वर्गलोक में दीप प्रज्वलित किए। तभी से यह दिन देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी नारायण उर्फ मिट्ठू मिश्र ने बताया यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संदेश भी है। कहा कि त्रिपुरासुर का अंत वास्तव में रज, तम और अहंकार जैसे मनुष्य के भीतर बसे तीन अंधकारों का नाश है। इसलिए देव दीपावली हर साधक को यह प्रेरणा देती है कि बाहरी दीप तभी अर्थपूर्ण हैं, जब भीतर का अंधकार मिटे। देव दीपावली का प्रत्येक दीपक यह सिखाता है जो स्वयं जलता है, वही दूसरों के जीवन को प्रकाशित करता है। आध्यात्मिक धर्म गुरु ने वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस पर्व का गहरा प्रभाव बताया। कहा घी या तिल के तेल का दीप जलाने से वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो वायु को शुद्ध और मन को शांत करती है।
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दीपदान महोत्सव ज्यादातर स्थानों पर देवोत्थान एकादशी पर ही मनाया गया था, लेकिन विंध्याचल व नगर के कचहरी घाट, बड़ी माता इमली महादेव मंदिर पर देव दीपावली बुधवार को मनाई जाएगी। चेतगंज, चेतना सरोवर पर देव दीपावली धूमधाम से मनाई जाएगी। विष्णु मंदिर पर 11000 दीपों से सजाया जाएगा। चील्ह, कोन ब्लॉक क्षेत्र के भोगांव गंगा घाट, जगदीशपुर शिव मंदिर, मल्लेपुर गांव स्थित कुटी पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर दीपदान किया जाएगा।
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प्रकाश की साधना और विज्ञान का संगम है देव दीपावली
संवाद न्यूज एजेंसी मिर्जापुर। देव दीपावली वह पावन पर्व है जो कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया था।उस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने स्वर्गलोक में दीप प्रज्वलित किए। तभी से यह दिन देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी नारायण उर्फ मिट्ठू मिश्र ने बताया यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संदेश भी है। कहा कि त्रिपुरासुर का अंत वास्तव में रज, तम और अहंकार जैसे मनुष्य के भीतर बसे तीन अंधकारों का नाश है। इसलिए देव दीपावली हर साधक को यह प्रेरणा देती है कि बाहरी दीप तभी अर्थपूर्ण हैं, जब भीतर का अंधकार मिटे। देव दीपावली का प्रत्येक दीपक यह सिखाता है जो स्वयं जलता है, वही दूसरों के जीवन को प्रकाशित करता है। आध्यात्मिक धर्म गुरु ने वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस पर्व का गहरा प्रभाव बताया। कहा घी या तिल के तेल का दीप जलाने से वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो वायु को शुद्ध और मन को शांत करती है।
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