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धनराशि जारी होने के बाद भी नहीं बन पाया बायोगैस प्लांट

Fri, 01 Jul 2022 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jul 2022 12:36 AM IST
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Biogas plant could not be built even after release of funds
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के ओडीएफ प्लस के तहत बनने वाला बायोगैस प्लांट अभी तक नहीं बन सका है। जिले में उन बड़े पशु आश्रय स्थलों में जहां पर दो सौ से अधिक संख्या में गोवंश हैं, वहां पर इस योजना का क्रियान्वयन किया जाना है। इसके लिए हलिया व पहाड़ी विकास खंड का चयन किया गया है। दोनों जगह लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट लगाया जाना है।
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विकास खंड पहाड़ी स्थित महुआरी गांव स्थित गो आश्रय केंद्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए 20 लाख 74 हजार रुपये की लागत से बायो गैस प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। जो लगभग तीन माह से बंद पड़ा है। बायो गैस प्लांट का निर्माण कार्य अधूरा होने तथा बिजली आपूर्ति बाधित होने पर पशुओं को पानी की किल्लत के साथ ही साथ गो शाला में अंधेरा पसरा रहता है। फिलहाल प्लांट का कार्य 70 प्रतिशत हो चुका है। गैस पाइप लाइन के लिये गड्ढे तो खोद दिए गए हैं, लेकिन पाइप नहीं बिछाए जाने तथा जनरेटर नहीं लगने के कारण बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जल निगम के अवर अभियंता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन स्तर से जितनी धनराशि उपलब्ध कराई गई थी, उससे अधिक कार्य करा दिया गया है। ठेकेदार का बिल भुगतान नहीं होने से कार्य बंद पड़ा है। जैसे ही धनराशि प्राप्त होगी, कार्य शुरू करा दिया जाएगा। उधर, गो आश्रय केंद्र तक जाने के लिये लगभग एक किलोमीटर कच्चा रास्ता है। जिस पर गिट्टी तो डाली गई है, लेकिन कुछ किसानों द्वारा सिंचाई के लिए कटिंग कर दिए जाने लोगों को आने-जाने में असुविधा हो रही है।
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उधर हलिया विकास खंड के गलरा स्थित अस्थायी पशु आश्रय में जनवरी माह से बनाया जा रहा बायोगैस प्लांट काम भी पूरा नहीं हो पाया है। गोवर्धन योजना के तहत लगभग 24 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित बायोगैस प्लांट का मात्र टैंक बना कर छोड़ दिया गया है। खुले में टैंक बनने से बारिश के मौसम में उसके ढहने का खतरा भी बना हुआ है। लोगों का कहना है कि खुले में टैंक होने के कारण कभी भी ढह सकता है। मात्र टैंक ही बनाकर चार माह से छोड़ दिया गया है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरुण मिश्र का कहना है कि दो माह पूर्व मुख्य विकास अधिकारी लक्ष्मी वीएस ने संबंधित कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए अविलंब कार्य पूरा कराने का निर्देश भी दिया था। इसके बावजूद अभी तक कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। गलरा की ग्राम प्रधान ममता मिश्रा का कहना है कि कार्यदायी संस्था द्वारा गोवर्धन योजना के तहत लगभग 24 लाख की लागत से गलरा अस्थाई पशु आश्रय स्थल में मात्र टैंक बनाकर खुले में छोड़ दिया गया है। अगर यह प्लांट समय से पूर्ण हो जाता तो महिलाओं के लिए ईंधन गैस, किसानों के लिए खाद तथा ग्रामीणों के लिए बिजली सुलभ हो जाती। सीडीओ श्रीलक्ष्मी वीएस का कहना है कि काम कुछ दिनों के लिए बंद था, लेकिन बजट जारी कर दिया गया है और कार्य फिर से शुरू करा दिया गया है। शीघ्र ही प्लांट तैयार हो जाएगा।
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