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कृषि वैज्ञानिकों ने मिर्च की नर्सरी वाले क्षेत्रों का लिया जायजा

Fri, 02 Sep 2022 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Sep 2022 01:15 AM IST
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Agricultural scientists took stock of the chilli nursery areas
अदलपुरा स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. तुसार कांति बेहरा के नेतृत्व में प्रधान वैज्ञानिक मिर्च विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार, सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह एवं पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. सुदर्शन मौर्य ने शहंशाहपुर गांव में मिर्च की नर्सरी का निरीक्षण कर अवलोकन किया। इस दौरान किसानों से नर्सरी में पैदा होने वाली समस्याओं की जानकारी लेकर उसके समाधान के लिए सुझाव भी दिया।
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शहंशाहपुर में काफी संख्या में किसान मिर्च की नर्सरी लगाते हैं। खुद मिर्च की खेती के अलावा बचे पौधों को बेचकर अच्छी आय प्राप्त करते हैं। निरीक्षण के दौरान निदेशक डॉ तुसार कांति बेहरा ने किसानों को बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने सब्जी की खेती के लिए उत्पादन की तकनीकी का विकास किया है। तकनीकी किसानों के खेतों तक पहुंचाई जा रही है। उन्होेंने सुझाव दिया कि कम लागत में अच्छी फसल लेने के साथ ही कम से कम रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग करें। ताकि मिट्टी खराब होने से बचाया जा सके। डॉ. राजेश कुमार ने संस्थान की तरफ से विकसित मिर्च की विभिन्न किस्म के बारे में किसानों को जानकारी दी। डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि खेतों में लगे पौधों को रोगमुक्त व स्वस्थ रखने और मिट्टी में पोषक तत्व बनाए रखने के लिए जैव-रासायनिक पौध-स्टिमुलेन्ट काशी बायो मिक्स और 6 विभिन्न सूक्ष्म जीवों के कंसोर्टियम बीसी-6 का विकास किया गया है। डॉ. सुदर्शन मौर्य ने बताया कि बीसी 6 कंसोर्टियम से बीज व मृदा शोधन से मिर्च की पौध पर रोगों एवं कीटों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है। साथ ही पौधे बिना शोधित पौधों के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। एक एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक देवेश सिंह ने बताया कि इस वर्ष शहंशाहपुर गांव में ही लगभग 40-50 किलो मिर्च के बीज की 6-7 एकड़ में नर्सरी लगी हुई है। इसे बाढ़ का पानी उतरते ही खेतों में लगा दिया जाएगा। प्रगतिशील युवा किसान चंदन सिंह ने बताया कि वर्तमान में नर्सरी में पौध के तनों के गलन, उकठा, जड़ सड़न तथा कम-बढ़वार की समस्या है। इन समस्याओं के निदान के लिए संस्थान के माध्यम से प्रदान किये गए बैसिलस सूक्ष्मजीव के कंसोर्टियम बीसी 6 का उपयोग नर्सरी में पौध में वृद्धि और विकास के लिए लाभकारी रहा है। इस दौरान आशीष सिंह, अनिल सिंह, शरद चंद्र सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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