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घटने लगी गंगा, लोगों ने ही राहत की सांस
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:49 PM IST
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मिर्जापुर। दो सप्ताह से लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर घटने लगा है। गुरुवार को जलस्तर 71.710 था जो शुक्रवार की शाम तक घटकर 71.560 मीटर पर पहुंच गया। जलस्तर घटने की जानकारी होने पर तटवर्ती ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
अगस्त की शुुरूआत से हो रही बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हो गई थी। 15 अगस्त के बाद से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा था। इससे गंगा किनारे रहने वाले लोगों की नींद उड़ गई थी। स्थिति यहां तक पहुुंच गई थी कि कोन ब्लाक के हरसिंगपुर गांव में पानी घुस गया था जिससे वहां की फसलें डूब गई थी। ग्रामीण अपने पशुओं को सुरक्षति स्थान पर ले जाने लगे थे। वहीं गृहस्थी के सामान भी अपने अपने घरों से हटाकर छतों पर रखना शुरू कर दिया था। पानी बढ़ने से प्रशासन भी सतर्क हो गया था और कंट्रोल रूम तथा बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को लगातार जलस्तर पर निगाह बनाए रखने को कहा था। गुरुवार को तो गंगा का जलस्तर 71.710 हो गया था। 72 मीटर के करीब जलस्तर पहुंचने पर सभी हैरत में पड़ गए थे। लोगों ने सोचा कि अब गंगा घटने वाली नहीं है। दो तीन दिनों में जलस्तर काफी बढ़ जाएगा लेकिन शुक्रवार की सुबह जब जलस्तर रिकार्ड किया गया तो पाया गया कि गुरुवार के दिन से गंगा लगभग दो सौ सेंटीमीटर कम हो गई है और 71.560 पर आ गई है।
गंगा का पानी घटने से हरसिंगपुर और मल्लेपुर में लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बोई गई बच गई है। यह देख किसानों ने राहत की सांस ली है। ग्राम प्रधान हरसिंगपुर सत्यनाम सिंह ने 60 लाख रुपये की लागत से लगभग 70 बीघे में परोरा, कोहड़ा, बैगन, लौकी आदि सब्जी बोई थी। कुल्ली सिंह पटेल ने 30 लाख की लागत से लगभग 20 बीघा तथा महेंद्र यादव ने 15 लाख रुपये की लागत से 12 बीघा, कैलाश यादव ने 30 लाख की लागत से 20 बीघा,फफई यादव ने चार बीघा, बोड़ई यादव ने चार बीघा, नवमी ने 50 बीघा आदि किसानों ने सब्जी बोई थी। जिनका गांव में गंगा का पानी घुसने के चलते नष्ट होने के कागार पर पहुंच गई थी। लेकिन शुक्रवार की सुबह से पानी घटने पर सब्जिया बच गई थी। वहां पशु पालक भी अपने अपने पशुओं को गांव में लेकर आने लगे है।
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अगस्त की शुुरूआत से हो रही बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हो गई थी। 15 अगस्त के बाद से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा था। इससे गंगा किनारे रहने वाले लोगों की नींद उड़ गई थी। स्थिति यहां तक पहुुंच गई थी कि कोन ब्लाक के हरसिंगपुर गांव में पानी घुस गया था जिससे वहां की फसलें डूब गई थी। ग्रामीण अपने पशुओं को सुरक्षति स्थान पर ले जाने लगे थे। वहीं गृहस्थी के सामान भी अपने अपने घरों से हटाकर छतों पर रखना शुरू कर दिया था। पानी बढ़ने से प्रशासन भी सतर्क हो गया था और कंट्रोल रूम तथा बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को लगातार जलस्तर पर निगाह बनाए रखने को कहा था। गुरुवार को तो गंगा का जलस्तर 71.710 हो गया था। 72 मीटर के करीब जलस्तर पहुंचने पर सभी हैरत में पड़ गए थे। लोगों ने सोचा कि अब गंगा घटने वाली नहीं है। दो तीन दिनों में जलस्तर काफी बढ़ जाएगा लेकिन शुक्रवार की सुबह जब जलस्तर रिकार्ड किया गया तो पाया गया कि गुरुवार के दिन से गंगा लगभग दो सौ सेंटीमीटर कम हो गई है और 71.560 पर आ गई है।
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गंगा का पानी घटने से हरसिंगपुर और मल्लेपुर में लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बोई गई बच गई है। यह देख किसानों ने राहत की सांस ली है। ग्राम प्रधान हरसिंगपुर सत्यनाम सिंह ने 60 लाख रुपये की लागत से लगभग 70 बीघे में परोरा, कोहड़ा, बैगन, लौकी आदि सब्जी बोई थी। कुल्ली सिंह पटेल ने 30 लाख की लागत से लगभग 20 बीघा तथा महेंद्र यादव ने 15 लाख रुपये की लागत से 12 बीघा, कैलाश यादव ने 30 लाख की लागत से 20 बीघा,फफई यादव ने चार बीघा, बोड़ई यादव ने चार बीघा, नवमी ने 50 बीघा आदि किसानों ने सब्जी बोई थी। जिनका गांव में गंगा का पानी घुसने के चलते नष्ट होने के कागार पर पहुंच गई थी। लेकिन शुक्रवार की सुबह से पानी घटने पर सब्जिया बच गई थी। वहां पशु पालक भी अपने अपने पशुओं को गांव में लेकर आने लगे है।
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