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दो मदरसों ने किया फर्जी नियुक्तियां दर्शाकर लाखों का फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो/ अनुज मित्तल, मेरठ
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:03 AM IST
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मदरसों में फर्जीवाड़ा
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मेरठ में प्रबंध समिति में माता-पिता अध्यक्ष और सचिव बन गए जबकि बेटियों को मदरसों में नियम विरुद्ध नियुक्ति दे दी गई। पूरा खेल शासन से मिलने वाले मदरसा शिक्षक वेतन मानदेय को हड़पने का खेला जा रहा है। विभागीय साठगांठ से दो मदरसे लंबे अर्से से यह फर्जीवाड़ा करते आ रहे हैं। जिस पर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे ने जांच कराने की बात कही है।
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ये है मामले
न्यू पब्लिक स्कूल, शकूर नगर सोसायटी फर्म्स सोसाइटीज एंड चिट्स कार्यालय में पंजीकृत है। इस सोसायटी में नसीम अहमद खां पुत्र अब्दुल वहीद खां प्रबंधक और उनकी पत्नी रोशन जहां अध्यक्ष हैं। इस सोसायटी के तहत एक मदरसा हजरत बिलाल अलीजान वाली गली शकूर नगर में संचालित है। जिसमें एक प्रधानाचार्या सहित पांच शिक्षक-शिक्षिकाएं नियुक्त हैं। इन नियुक्तियों में नियम विरुद्ध इतना बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया कि सोसायटी की अध्यक्ष रोशन जहां को मदरसा की प्रधानाचार्या नियुक्त दर्शाया गया तो उनकी पुत्री अमरीन नसरीन, फरहीन और हिना नसीम को शिक्षिका दर्शाया गया है। इन चारों की नियुक्ति 2004 में दर्शायी गयी और शासन की योजना के तहत सपा सरकार में हर साल इन चारों ने इन नियम विरुद्ध नियुक्तियों के तहत हर साल साढ़े चार लाख रुपये का चूना लगाया।
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दूसरा मामला यकसान एजूकेशन वेलफेयर सोसायटी शकूर नगर का है। इस सोसायटी में एक ही परिवार से सफीया उपाध्यक्ष, समर जहां सचिव और सुभान सदस्य हैं। वहीं, ये तीनों ही इस सोसायटी के तहत संचालित मदरसा जामा समर लिलबनात, उमर गार्डर श्यामनगर में शिक्षक/शिक्षिका के रूप में नियुक्त दर्शाए गए हैं। इन तीनों ने एक साल में राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मिलने वाले मदरसा शिक्षक वेतन मानदेय के नाम पर हर साल 99 हजार रुपये वसूले।
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ये है नियुक्ति का नियम
अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे का कहना है कि पुराने नियम में सचिव या प्रबंधक और प्रधानाचार्य के निकटतम रिश्तेदार जिसमें उनके पति, पत्नी, पिता, माता, पुत्र, पुत्री, भाई और बहन आते हैं, उनकी नियुक्ति नहीं हो सकती है। लेकिन वर्ष 2016 में इस नियम के तहत अध्यक्ष भी शामिल हो गए हैं। ऐसे में यदि वास्तव में ये एक ही परिवार से हैं तो नियुक्तियां पूरी तरह अवैध हैं और तथ्य छिपाकर वेतन मानदेय लिया गया है। इस मामले की शिकायत आने पर जांच कराते हुए कार्रवाई तय करायी जाएगी।
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