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महापौर खेमा की लामबंदी तेज, भाजपा बनी है उदासीन
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निगम कार्यकारिणी चुनाव
महापौर खेमा चार सदस्य जिताने की जुगत में
भाजपा ने तीन नाम तय कर दबाई सूची
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी के छह फरवरी को प्रस्तावित चुनाव में जहां भाजपा उदासीन नजर आ रही है। वहीं, महापौर खेमा सर्वदलीय पार्षदों को लामबंद कर छह में से चार सीट अपने पक्ष में करने में जुटा है। मौजूदा समीकरण के आधार पर दोनों खेमे तीन-तीन सदस्य ही निर्वाचित करा सकते हैं। लेकिन महापौर खेमा सारे हथकंडे अपनाते हुए चार सदस्यों को जिताने की कोशिश में है।
भाजपा ने चुनाव के लिए बैठक कर तीन प्रत्याशी तय कर उनके नाम अभी छिपा लिए हैं। माना जा रहा है कि चार फरवरी को सूची सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, सपा में शामिल होने के बाद महापौर सुनीता वर्मा सर्वदलीय पार्षद खेमे के पार्षदों के साथ बैठक कर चुनाव में उतरने वाले सदस्यों के बारे में न केवल चर्चा कर चुकी हैं, बल्कि सभी को साथ लेकर भाजपा को झटका देने के लिए सभी दलाें के बड़े नेताओं से भी संपर्क साध चुकी हैं। उम्मीद है कि महापौर खेमा चुनाव में चार प्रत्याशी उतारेगा।
पिछले चुनाव में 12 सदस्यों में से पांच भाजपा और सात महापौर खेमे से चुने गए थे। महापौर खेमा इस बार भी ऐसा ही समीकरण बैठाना चाहता है। जिसके लिए लगातार लामबंदी चल रही है। महापौर खेमा सपा पार्षदों के साथ ही बसपा, कांग्रेस और आसपा से संपर्क बनाए हुए हैं। चर्चा है कि चार का गणित पूरा करने के लिए भाजपा के कुछ पार्षदों से भी संपर्क साधा जा रहा है। हालांकि यदि तीन-तीन सदस्य भी दोनों खेमों के जीत कर आते हैं, तब भी महापौर खेमा हावी रहेग। क्योंकि अंतिम और निर्णायक वोट महापौर की रहेगी। लेकिन महापौर खेमा अंतिम समय में कुछ इधर उधर होने की सोच कर चलते हुए पहले से ही अपना बहुमत लेकर चलने की रणनीति तैयार कर रहा है। वहीं, भाजपा चुनावी रणनीति बनाना तो दूर अपने पार्षदों को भी एकजुट नहीं कर पाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। पिछली बार भी संगठन की उदासीनता के चलते भाजपा को मात मिली थी।
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महापौर खेमा चार सदस्य जिताने की जुगत में
भाजपा ने तीन नाम तय कर दबाई सूची
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी के छह फरवरी को प्रस्तावित चुनाव में जहां भाजपा उदासीन नजर आ रही है। वहीं, महापौर खेमा सर्वदलीय पार्षदों को लामबंद कर छह में से चार सीट अपने पक्ष में करने में जुटा है। मौजूदा समीकरण के आधार पर दोनों खेमे तीन-तीन सदस्य ही निर्वाचित करा सकते हैं। लेकिन महापौर खेमा सारे हथकंडे अपनाते हुए चार सदस्यों को जिताने की कोशिश में है।
भाजपा ने चुनाव के लिए बैठक कर तीन प्रत्याशी तय कर उनके नाम अभी छिपा लिए हैं। माना जा रहा है कि चार फरवरी को सूची सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, सपा में शामिल होने के बाद महापौर सुनीता वर्मा सर्वदलीय पार्षद खेमे के पार्षदों के साथ बैठक कर चुनाव में उतरने वाले सदस्यों के बारे में न केवल चर्चा कर चुकी हैं, बल्कि सभी को साथ लेकर भाजपा को झटका देने के लिए सभी दलाें के बड़े नेताओं से भी संपर्क साध चुकी हैं। उम्मीद है कि महापौर खेमा चुनाव में चार प्रत्याशी उतारेगा।
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पिछले चुनाव में 12 सदस्यों में से पांच भाजपा और सात महापौर खेमे से चुने गए थे। महापौर खेमा इस बार भी ऐसा ही समीकरण बैठाना चाहता है। जिसके लिए लगातार लामबंदी चल रही है। महापौर खेमा सपा पार्षदों के साथ ही बसपा, कांग्रेस और आसपा से संपर्क बनाए हुए हैं। चर्चा है कि चार का गणित पूरा करने के लिए भाजपा के कुछ पार्षदों से भी संपर्क साधा जा रहा है। हालांकि यदि तीन-तीन सदस्य भी दोनों खेमों के जीत कर आते हैं, तब भी महापौर खेमा हावी रहेग। क्योंकि अंतिम और निर्णायक वोट महापौर की रहेगी। लेकिन महापौर खेमा अंतिम समय में कुछ इधर उधर होने की सोच कर चलते हुए पहले से ही अपना बहुमत लेकर चलने की रणनीति तैयार कर रहा है। वहीं, भाजपा चुनावी रणनीति बनाना तो दूर अपने पार्षदों को भी एकजुट नहीं कर पाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। पिछली बार भी संगठन की उदासीनता के चलते भाजपा को मात मिली थी।
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