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Meerut News: रोजेदारों ने मांगी मगफिरत और बरकत की दुआ
Fri, 20 Feb 2026 08:27 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 20 Feb 2026 08:27 PM IST
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रमजान मास के पहले जुमे पर नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों मे उमड़ी अकीदतमंदों की भीड
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। पाक रमजान-उल-मुबारक के पहले जुमे पर शुक्रवार को क्षेत्र में अकीदतमंदों ने पूरी शिद्दत और अकीदत के साथ नमाज अदा की। नगर समेत ग्रामीण
क्षेत्रों की विभिन्न मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज के बाद रोजेदारों ने खुदा से समस्त मानवता पर अपनी रहमत और बरकत बरसाने की दुआ मांगी।
मस्जिदों में बयान करते हुए उलेमाओं ने कहा कि रमजान का महीना रहमत, मगफिरत और बरकत का महीना है। इसे इबादत, परहेजगारी और सादगी के साथ गुजारना चाहिए। उन्होंने बताया कि तीस दिनों के इस मुकद्दस महीने में तरावीह की नमाज का विशेष महत्व है। रमजान इंसान को सब्र और संयम की सीख देता है, ताकि वह भूख-प्यास का एहसास कर जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी विकसित कर सके। शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने कहा कि रोजे का मकसद केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं है, बल्कि इंसान के जिस्म का हर हिस्सा रोजे की पाबंदी में होना चाहिए। रोजे के दौरान बुरा देखने, बुरा सुनने और बुरे कामों से खुद को दूर रखना जरूरी है। झूठ, चुगली, बदनीयती और हर छोटी-बड़ी बुराई से परहेज करना ही रोजे की असल रूह है। जामिया सबील उल फलाह के मोहतमिम मुफ्ती इसराइल ने कहा कि इस्लाम में अल्लाह की इबादत और वक्त की पाबंदी को बेहद अहम माना गया है। रमजान में नमाज और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। जुमे की नमाज अदा करने से इंसान के गुनाहों की माफी की उम्मीद बढ़ती है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी क्षेत्र में गश्त करते रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। पाक रमजान-उल-मुबारक के पहले जुमे पर शुक्रवार को क्षेत्र में अकीदतमंदों ने पूरी शिद्दत और अकीदत के साथ नमाज अदा की। नगर समेत ग्रामीण
क्षेत्रों की विभिन्न मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज के बाद रोजेदारों ने खुदा से समस्त मानवता पर अपनी रहमत और बरकत बरसाने की दुआ मांगी।
मस्जिदों में बयान करते हुए उलेमाओं ने कहा कि रमजान का महीना रहमत, मगफिरत और बरकत का महीना है। इसे इबादत, परहेजगारी और सादगी के साथ गुजारना चाहिए। उन्होंने बताया कि तीस दिनों के इस मुकद्दस महीने में तरावीह की नमाज का विशेष महत्व है। रमजान इंसान को सब्र और संयम की सीख देता है, ताकि वह भूख-प्यास का एहसास कर जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी विकसित कर सके। शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने कहा कि रोजे का मकसद केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं है, बल्कि इंसान के जिस्म का हर हिस्सा रोजे की पाबंदी में होना चाहिए। रोजे के दौरान बुरा देखने, बुरा सुनने और बुरे कामों से खुद को दूर रखना जरूरी है। झूठ, चुगली, बदनीयती और हर छोटी-बड़ी बुराई से परहेज करना ही रोजे की असल रूह है। जामिया सबील उल फलाह के मोहतमिम मुफ्ती इसराइल ने कहा कि इस्लाम में अल्लाह की इबादत और वक्त की पाबंदी को बेहद अहम माना गया है। रमजान में नमाज और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। जुमे की नमाज अदा करने से इंसान के गुनाहों की माफी की उम्मीद बढ़ती है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी क्षेत्र में गश्त करते रहे।