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आने वाली पीढि़यों के लिए वरदान है जैविक खेती : डॉ. भारत भूषण त्यागी
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राजकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल मुख्य अतिथि को सम्मानित करते प्राचार्य स्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। राजकीय महाविद्यालय में शुक्रवार को ऑर्गेनिक खेती के विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राचार्य प्रो. विनीता राठी, मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी, विशिष्ट अतिथि प्रो. आलोक देशवाल, प्रो. जितेंद्र कुमार आर्य द्वारा किया गया।
वक्ता प्रो. जितेंद्र कुमार आर्य ने ऑर्गेनिक फार्मिंग की भूमिका रखते हुए इसके चरणों, उद्यम के रूप में संभावनाओं तथा पर्यावरण, मृदा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने कहा कि जैविक खेती को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान है। उन्होंने प्रिंसिपल ऑफ प्रोस्पेरिटी, इकोलॉजी और डाइवर्सिटी की व्याख्या करते हुए जैविक खेती में एंटरप्रेन्योरशिप की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सरकार जैविक खेती के सर्टिफिकेशन को सरल बनाकर युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है। जैविक खेती के तीन प्रमुख घटक प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन पर भी उन्होंने जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. आलोक देशवाल ने पीटी के माध्यम से मृदा तत्वों की कमी और उससे होने वाली बीमारियों पर आंकड़ों सहित जानकारी दी। प्राचार्य ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत महाविद्यालय में ऑर्गेनिक फार्मिंग को स्किल डेवलपमेंट कोर्स के रूप में शामिल किया गया है। संचालन डॉ. मोनू सिंह ने किया।
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हस्तिनापुर। राजकीय महाविद्यालय में शुक्रवार को ऑर्गेनिक खेती के विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राचार्य प्रो. विनीता राठी, मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी, विशिष्ट अतिथि प्रो. आलोक देशवाल, प्रो. जितेंद्र कुमार आर्य द्वारा किया गया।
वक्ता प्रो. जितेंद्र कुमार आर्य ने ऑर्गेनिक फार्मिंग की भूमिका रखते हुए इसके चरणों, उद्यम के रूप में संभावनाओं तथा पर्यावरण, मृदा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने कहा कि जैविक खेती को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान है। उन्होंने प्रिंसिपल ऑफ प्रोस्पेरिटी, इकोलॉजी और डाइवर्सिटी की व्याख्या करते हुए जैविक खेती में एंटरप्रेन्योरशिप की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सरकार जैविक खेती के सर्टिफिकेशन को सरल बनाकर युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है। जैविक खेती के तीन प्रमुख घटक प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन पर भी उन्होंने जोर दिया।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. आलोक देशवाल ने पीटी के माध्यम से मृदा तत्वों की कमी और उससे होने वाली बीमारियों पर आंकड़ों सहित जानकारी दी। प्राचार्य ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत महाविद्यालय में ऑर्गेनिक फार्मिंग को स्किल डेवलपमेंट कोर्स के रूप में शामिल किया गया है। संचालन डॉ. मोनू सिंह ने किया।

राजकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल मुख्य अतिथि को सम्मानित करते प्राचार्य स्रोत
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