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जांबाज अफसर की कहानी: किट्टू से मिलकर भावुक हुए पूर्व डीजीपी, 30 साल पहले हुआ था अपहरण, नई जिंदगी मिली तो बनाई बड़ी पहचान

Mon, 13 Dec 2021 06:09 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 13 Dec 2021 06:09 PM IST
सार

मेरठ में 30 साल पहले एक बच्ची का अपहरण हुआ तो हाहाकार मच गया था। पूर्व डीजीपी ने 27 घंटे ऑपरेशन चलाकर बच्ची को सकुशल बरामद किया था। अब डॉक्टर किट्टू से मिलकर पूर्व डीजीपी भावुक हो गए।

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Meerut News: Doctor Kittu was kidnapped 30 years ago in Meerut, now former DGP Brijlal got emotional during meet
- बृजलाल, सदस्य राज्यसभा, सेवानिवृत्त डीजीपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चार साल की जिस बच्ची को सन 1991 में मेरठ के एसएसपी रहते हुए किडनैपर्स से छुड़ाया, आज वो डॉक्टर बनने के बाद मिली तो पूर्व डीजीपी बृजलाल भावुक हो गए। 30 साल बाद किट्टू उर्फ कात्यायनी सेठ ने उन्हें थैंक्स कहा। किट्टू ने कहा कि मम्मी अक्सर बताती थीं कि आपने 27 घंटे का ऑपरेशन चलाकर मुझे बचाया था। आप जैसे अफसरों की वजह से ही लोग सुरक्षित रह पाते हैं। 

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मैं कात्यायनी सेठ ‘किट्टू’ से मिला। ये वही किट्टू थी, जिसका चार साल की उम्र में फिरौती के लिए एक जुलाई 1991 को गैंग ने अपहरण कर लिया था। शहर से डॉक्टर दंपती की बेटी के अपहरण से मेरठ में हाहाकार मचा था। दो जुलाई 1991 को तत्कालीन डीजीपी वीके जैन ने मुझे कार्यालय में बुलाकर मेरठ का चार्ज लेने के लिए कहा। तीन जुलाई की शाम को मैं मेरठ सर्किट हाउस आ गया, जहां मेरठ के डॉक्टरों का ग्रुप मुझसे मिला और डॉ. दंपती दीपक सेठ-नीरा सेठ की पुत्री को किडनैपर गैंग से छुड़ाने के लिए कहा। मेडिकल कॉलेज सहित सभी अस्पताल विरोध में बंद थे। 
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मैं चार जुलाई को कार्यालय में बैठा था कि एक परिचित युवक ने कुछ सूचना दी। मैं उस पर विश्वास करके अपने पेशकार एपी सिंह के साथ उस व्यक्ति के साथ उसी की गाड़ी से मवाना पहुंच गया। वहां संदिग्ध व्यक्तियों के घर गया। चार जुलाई की शाम पुलिस टीम के साथ मवाना में रेड की। वहां से सीधे नोएडा गया। वहां से गैंग के सदस्य को पकड़कर पांच जुलाई को सुबह आठ बजे मेरठ में भी एक बदमाश को पकड़ लिया। बदमाशों से पूछताछ के बाद पुलिस लाइन मेरठ में गाड़ियों में तेल भरवाकर सुबह बिना नाश्ता किए स्याना बुलंदशहर के लिए रवाना हो गया।

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एक गांव से किट्टू के कपड़े तो मिले लेकिन बच्ची नहीं मिल पाई। मैंने गन्ने के खेतों में घुसकर फायर किया तो एक बच्ची के रोने की आवाज आई, जो किट्टू थी। महेंद्र फौजी गैंग उसे छोड़कर भाग रहा था। मैंने गोलियां चलाकर कई बदमाशों को पकड़ा। किट्टू को पांच जुलाई 1991 को शाम सात बजे माता-पिता को सौंप दिया। मेरठ के डॉक्टरों ने वचन दिया कि मेरे कार्यकाल में वे पुलिसजनों का मुफ्त इलाज करेंगे। आज किट्टू अमेरिका से पीएचडी करके आ चुकी हैं। रविवार को किट्टू की माता को ब्रजलाल के आने की जानकारी हुई तो वे बेटी के साथ उनसे मिलने पहुंचीं। बेटी को बताया कि यही वो अधिकारी हैं, जिन्होंने 27 घंटे ऑपरेशन चलाकर तुमको बचाया था। जिस बच्ची को बदमाशों से छुड़ाकर गोद में लाए थे, उसे डॉक्टर के रूप में देखकर ब्रजलाल भावुक हो गए। आशीर्वाद देते हुए बोले कि वो तो मेरा फर्ज था। लेकिन आज तुम्हें देखा तो फिर वही क्षण याद आ गया, जब तुमको मेरी गोद में देखकर तुम्हारे माता-पिता खुशी से रोने लगे थे। - बृजलाल, सदस्य राज्यसभा, सेवानिवृत्त डीजीपी

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