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नकली पेट्रोल-डीजल मामला: तेल की मजिस्ट्रेट जांच में घिरे तमाम विभाग, अब खुलेंगे गहरे राज

Sat, 07 Sep 2019 10:22 AM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Sep 2019 10:22 AM IST
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Meerut ADM City has asked for report in case of fake Petrol-Diesel after magistrate investigation
नकली पेट्रोल-डीजल का मामला - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में मिलावटी तेल मामले में शुरू हुई मजिस्ट्रेट जांच में अब तमाम विभाग घिरते नजर आ रहे हैं। एडीएम सिटी ने 2014 में पाइप लाइन से तेल चोरी के मामले वाली पत्रावली भी परतापुर थाने से मांगी है। नौ विभागों से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। साथ ही पाइपलाइन से तेल चोरी मामले में ज्ञानेंद्र चौधरी प्रकरण की फाइल भी खुलवा दी है। अगली स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-

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Meerut ADM City has asked for report in case of fake Petrol-Diesel after magistrate investigation
नकली पेट्रोल-डीजल मामला - फोटो : अमर उजाला

परतापुर थाना क्षेत्र में 20 अगस्त को पुलिस ने छापा मारकर दो केमिकल फैक्टरियों से भारी मात्रा में नकली पेट्रोल और डीजल बरामद किया था। आईजी ने एसआईटी गठित कर इसकी जांच एसपी देहात को सौंपी, तो जिलाधिकारी ने भी मजिस्ट्रेट जांच नियुक्त करते हुए अपर जिलाधिकारी नगर और एसपी सिटी को जांच की जिम्मेदारी दी। इस पूरे मामले में एडीएम सिटी ने आम जनता से 6 सितंबर तक साक्ष्य या कोई बयान देने के लिए तिथि तय की थी। एडीएम सिटी अजय तिवारी ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से इस मामले में मात्र 3-4 लोगों ने ही गोपनीय रूप से कुछ जानकारी दी है, वह भी नाम गोपनीय रखने की शर्त पर। क्योंकि मिलावटी तेल कारोबार से जुड़े लोग काफी प्रभावशाली हैं। ऐसे में उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को भी जांच में शामिल कर लिया गया है।

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Meerut ADM City has asked for report in case of fake Petrol-Diesel after magistrate investigation
नकली पेट्रोल-डीजल मामला - फोटो : अमर उजाला

वहीं दूसरी तरफ जांच के दौरान एडीएम सिटी ने अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी को लेकर जवाब मांगा। अग्निशमन विभाग का कहना है कि गणपति केमिकल फैक्टरी ने आवेदन किया था, जांच कर एनओसी दी गई थी। लेकिन पारस केमिकल की तरफ से आवेदन नहीं किया गया, तो उसकी जांच नहीं की गई। वह स्वयं अपने स्तर पर किसी की जांच नहीं करते हैं। अधिकारियों के कहने पर या एनओसी के लिए आवेदन करने पर ही जांच की जाती है। वहीं एडीएम सिटी ने तहसील से दोनों केमिकल फैक्टरी की जमीन को लेकर जानकारी मांगी है, तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग से भी एनओसी व की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड तलब किया है। एमडीए से भी जहां पर ये काम संचालित हो रहा था, उसका नक्शा स्वीकृति आदि की जानकारी मांगी है।

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नकली पेट्रोल-डीजल का मामला - फोटो : अमर उजाला

औद्योगिक विभागों से भी मांगा जवाब
एडीएम सिटी ने मिलावटी तेल बनाने वाली इकाइयों का पर्दाफाश होने के बाद उद्योगों से जुड़े विभागों को भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। क्योंकि अहम रोल इन विभागों का भी सामने आ रहा है, जो कभी इन औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयों का भौतिक निरीक्षण नहीं करते हैं। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम से भी जवाब मांगा है।

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नकली पेट्रोल-डीजल मामला - फोटो : अमर उजाला

ऑयल कंपनी भी जांच के दायरे में 
मजिस्ट्रेट जांच में ऑयल कंपनियों को भी शामिल किया गया है। इसमें इंडियन ऑयल कारपोरेशन, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, एस्सार और रिलायंस कंपनियों को पत्र लिखा गया है। तेल डिलीवरी की पूरी चेन क्या है? इसमें किसकी जिम्मेदारी है? ट्रांसपोर्टर की भूमिका क्या है? डीलर की भूमिका क्या है? लापरवाही पर कौन जिम्मेदार है? अब तक क्या कोई कार्रवाई की? आदि तमाम बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। दो ऑयल कंपनियों ने अभी तक जवाब दिए हैं।

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नकली पेट्रोल-डीजल मामला - फोटो : अमर उजाला

ज्ञानेंद्र चौधरी की पत्रावली भी तलब 
पूठ्ठा के पास रिफाइनरी से ऑयल डिपो तक आने वाली पाइप लाइन में सेंधमारी कर 2014 में तेल चोरी की गई थी। इस मामले में राधा गार्डन निवासी ज्ञानेंद्र चौधरी और एक अन्य का नाम शामिल था। यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है। अपर जिलाधिकारी नगर ने इस मामले की एफआईआर सहित पूरी पत्रावली परतापुर थाने से तलब की है।

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