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खुशखबर: आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित होगा हस्तिनापुर, बनेगा पुरातात्विक म्यूजियम, रखे जाएंगे खोदाई में मिले अवशेष

Sat, 19 Feb 2022 12:08 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 19 Feb 2022 12:08 AM IST
सार

हस्तिनापुर में प्राचीन पांडव टीला उल्टा खेड़ा में भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे खोदाई कार्य में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें मिट्टी से बने प्राचीन बर्तन, खिलौने, लोहे के हथियार, प्राचीन महलों की दीवार, जानवरों की हड्डियां, मछली और कछुआ के अवशेष और पक्की ईंटों की दीवारें हैं।

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Hastinapur to be develop as iconic site archeological museum to be built read full story
हस्तिनापुर होगा ऑकोनिक साइट के रूप में विकसित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुरातात्विक महत्व के पांच स्थलों में शामिल किए गए हस्तिनापुर को आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित किया जाएगा। जिससे न केवल पर्यटन बल्कि सर्वेक्षण आदि को भी बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी जिलाधिकारी के. बालाजी ने दी। उन्होंने बताया कि हस्तिनापुर में 5 एकड़ जमीन पर पुरातात्विक स्थल म्यूजियम (ऑर्कियोलॉजिकल साइट म्यूजियम) बनाया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ बैठक की और भूमि का जल्द से जल्द चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिये।

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जिलाधिकारी ने बताया कि इस म्यूजियम में देश के गौरवशाली विरासत को और खोदाई में मिल रहे अवशेषों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने उक्त म्यूजियम के लिए 5 एकड़ भूमि को चिह्नित करने के लिए एसडीएम मवाना, पर्यटन विभाग व एएसआई को निर्देशित किया।
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म्यूजियम बनाने व उसमें प्रदर्शित की जाने वाली विभिन्न चीजों का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर एसडीएम मवाना अमित कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अंजू चौधरी, एसडीओ फोरेस्ट सुभाष चौधरी, आरएसओ जीडी बारीकी आदि शामिल रहे।

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मछली और कछुए के अवशेष मिले

हस्तिनापुर में प्राचीन पांडव टीला उल्टा खेड़ा में भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे खोदाई कार्य में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें मिट्टी से बने प्राचीन बर्तन, खिलौने, लोहे के हथियार, प्राचीन महलों की दीवार, जानवरों की हड्डियां, मछली और कछुआ के अवशेष और पक्की ईंटों की दीवारें हैं। अवशेषों की उम्र का पता लगाने के लिए इन्हें लैब भेजा जाएगा।


पांडव टीले पर कई दिनों से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने डेरा डाल रखा है। टीम का उद्देश्य यहां दबे रहस्य और प्राचीन अवशेषों को लोगों के सामने लाना है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में चार दर्जन श्रमिक खोदाई कार्य में लगे हैं।


प्राचीन अवशेषों के साथ यहां मिट्टी की जांच भी की जा रही है। इससे यह पता लगाया जा रहा है कि कौन से युग की मिट्टी किस सतह पर मौजूद है। खोदाई 8 से 10 फीट तक पहुंच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यहां से मध्य युग की समाप्ति हो गई है। इसके नीचे खोदाई में ऐतिहासिक युग के अवशेष मिल रहे हैं।

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