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गांधी जयंती विशेष: ...जब बापू ने राजनीतिक गलियारे में मचा दी थी हलचल, यहां 1920 में की थी कई जनसभाएं

Wed, 02 Oct 2019 03:29 PM IST
कपिल kapil दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 02 Oct 2019 03:29 PM IST
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Gandhi Jayanti 2019: Mahatma Gandhi had several public meetings in Meerut in 1920
महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

जनवरी 1920 में क्रांतिधरा पर कदम रखते ही महात्मा गांधी ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी। इस दौरान देवनागरी कॉलेज से घंटाघर तक निकाले गए जुलूस में लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता का परिचय दिया था। जिमखाना और कैसल व्यू पर हुई जनसभाओं में गांधी जी ने खिलाफत और असहयोग आंदोलन को एक सूत्र में पिरोया। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अमर उजाला ने बीते चार दिनों में गांधी जी के मेरठ प्रवास के बारे में जानकारी दी। आगे पढ़िए गांधी जी से जुड़े संस्मरण इतिहासकार प्रो. केडी शर्मा की जुबानी। 

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देवनागरी कॉलेज में स्वागत समारोह के बाद गांधी जी ने जुलूस का नेतृत्व किया। खिलाफत और असहयोग आंदोलन में जुड़ने के लिए लोगों को संदेश देने पहुंचे गांधी जी के साथ काफी संख्या में हिंदू-मुस्लिम समूह जुड़ गया। जुलूस में हिंदुओं ने अपनी ड्रेस पर चांद-सितारा चिन्ह और मुस्लिमों ने पीला टीका लगा रखा था। जुलूस के बाद गांधी जी ने घंटाघर (कंबोह गेट) पर जनसभा की। इसमें असहयोग और खिलाफत आंदोलन में एक साथ जुड़कर इसके सफल बनाने की अपील की गई।

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कहां गया बापू तेरा भारत प्यारा...
वरिष्ठ कवि डॉ. ईश्वर चंद गंभीर ने महात्मा गांधी के 150वीं जयंती पर कविता लिखी है। डॉ. ईश्वर चंद पर्यावरण, स्वच्छता आदि देशहित मुद्दों पर पुस्तक लिख चुके हैं। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के भी ब्रांड एंबेस्डर रह चुके हैं। उनका स्वच्छता पर लिखा गाना काफी लोकप्रिय रहा। चंद लाइनें..

कहां गया बापू तेरा भारत प्यारा, 
भूल गए सब सत्य अहिंसा का नारा।
ऊंच नीच से समरसता भी बिखर गई
परंपरा और संस्कृति भी छितर गई
आज स्वार्थ में भाई ने भाई को मारा।

यह भी पढ़ें: मेरठ कॉलेज में खड़े बरगद के पेड़ को लोग विदेशों से आते हैं देखने, बापू की याद दिलाता है ये दरख्त

पौधरोपण कर भूल गए गांधी उपवन
भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर नौ अगस्त को परतापुर कताई मिल के पीछे गांधी उपवन में पौधरोपण किया गया था। इसके बाद एमडीए इसका संरक्षण भूल गया है। बाउंड्रीवॉल करने के बाद लगाए गए मुख्य गेट गिरने की स्थिति में हैं। इस उपवन में गांधी जी के प्रिय रहे 150 पौधों को लगाने की प्लानिंग थी। इस कार्यक्रम के बाद उपवन की ओर किसी ने नहीं देखा। 

यह भी पढ़ें: गांधी आश्रम का जनक बना था 'असहयोग आंदोलन', अब यहां 600 में से घटकर रह गए सिर्फ 71 कर्मचारी

गांधी आश्रम में अखंड चरखा यज्ञ
गांधी जी की 150वीं जयंती पर गांधी आश्रम में अखंड चरखा यज्ञ का आयोजन हुआ। आश्रम के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि इसके तहत दो अक्तूबर सुबह 11 बजे तक चरखा काता जाएगा। दो-दो घंटे के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसका उद्देश्य आम लोगों को चरखा कातने की परंपरा से जोड़ना है।

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