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मेरठ कॉलेज में खड़े बरगद के पेड़ को लोग विदेशों से आते हैं देखने, बापू की याद दिलाता है ये दरख्त

Sat, 28 Sep 2019 03:34 PM IST
Dimple Sirohi दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 28 Sep 2019 03:34 PM IST
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banyan tree in meerut college meerut related to mhatma gandhi
बरगद के पेड़ के नीचे बापू को सुनने उमड़ पड़े थे छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

इस देश में जब कभी भी किसी आंदोलन को शुरू करने की तैयारी की गई तो क्रांतिधरा मेरठ का नाम सबसे आगे रहा। 1857 में क्रांति की जो ज्वाला शहर से उठी वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गई थी।

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महात्मा गांधी ने भी मेरठ में तीन बार आकर यहां के लोगों और छात्रों को संबोधित कर आजादी के आंदोलन में शामिल होने का न्यौता दिया। बापू सबसे पहले वर्ष-1920 में मेरठ आए। बापू की दो अक्तूबर को 150वीं जयंती पर उनके मेरठ में पांच स्थानों पर कदम पड़ने वाले स्थानों में पहले दिन मेरठ कॉलेज की कहानी।

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बापू के 1920 के दौरे के बारे इतिहासकार प्रोफेसर केडी शर्मा बताते हैं कि गांधी जी 22 जनवरी को मोटरकार से मेरठ पहुंचे थे। इस दिन शाम के समय उन्होंने मेरठ कॉलेज पहुंचकर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया था। उन्हें देखने के लिए शहर और गांवों से छात्र-छात्राएं उमड़ पड़े थे। बापू ने आजादी के आंदोलन में शामिल होने के लिए छात्रों को प्रेरित किया।

बापू की याद दिलाता बरगद
मेरठ कॉलेज में स्थित मंगल पांडे हॉल के पीछे पार्क में बरगद का पेड़ आज भी बापू की याद दिलाता है। उन्होंने इसी बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर छात्र-छात्राओं को संबोधित किया और यज्ञ में हिस्सा लिया था। केडी शर्मा बताते हैं कि मेरठ का जिक्र गांधी जी ने कई बार विदेश में भी किया। इस बरगद के पेड़ को देखने के लिए लोग बाहर से भी आते हैं।

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