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गांधी आश्रम का जनक बना था 'असहयोग आंदोलन', अब यहां 600 में से घटकर रह गए सिर्फ 71 कर्मचारी

Tue, 01 Oct 2019 04:46 PM IST
कपिल kapil दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 01 Oct 2019 04:46 PM IST
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Gandhiji 150 Birth Anniversary, JB Kripalani resigned from BHU and opened an ashram in Meerut
गांधी आश्रम - फोटो : अमर उजाला

महात्मा गांधी पूरे देश में असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनसभा कर रहे थे। वहीं, दूसरी ओर बनारस हिंदू विवि से इस्तीफा देकर आचार्य जेबी कृपलानी अपने 20 छात्रों के साथ गांधी आश्रम की नींव रखने में व्यस्त थे। गांधी आश्रम की स्थापना 30 नवंबर 1920 में हुई। सुविधा और कार्य की दृष्टि से गांधी आश्रम का प्रधान कार्यालय बनारस से वर्ष 1926 में मेरठ लाया गया। मेरठ में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिमखाना और कैसल व्यू में जनसभा की थी। वहीं इस आश्रम के इतिहास में तेजी से कर्मचारियों की संख्या घटती रही। कभी आश्रम में 600 कर्मचारी काम करते थे। आज यह संख्या मात्र 71 रह गई।

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गांधी जी के द्वारा चलाया गया असहयोग आंदोलन प्रथम जन आंदोलन था। इस आंदोलन को व्यापक जनाधार मिला। आंदोलन का प्रस्ताव कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में दिसंबर 1920 को पास हुआ। इसमें अंग्रेजी सरकार के साथ सभी ऐच्छिक संबंधों के परित्याग का पालन करने को कहा गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1921 में 396 हड़ताल हुईं। इसमें छह लाख से अधिक श्रमिक शामिल रहे। आंदोलन में छात्र-छात्राओं ने भी स्कूल और विवि जाना छोड़ दिया था। आचार्य जेपी कृपलानी के साथ विचित्र नारायण शर्मा, राजाराम शर्मा, कपिल देव पांडेय, रामसूरत मिश्र आदि छात्र मौजूद रहे। 
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आज से अखंड चरखा यज्ञ
गांधी जी के 150वीं जयंती पर क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में 24 घंटे का अखंड चरखा यज्ञ कार्यक्रम रखा गया है। मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि एक अक्तूबर सुबह 11 बजे से इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। इसमें आश्रम के सभी कर्मचारियों की दिन-रात शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। इसमें आमलोग भी चरखा कात सकते हैं। इसका समापन दो अक्तूबर को होगा। इस मौके पर डीएम आदि मौजूद रहेंगे।

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60 रुपये प्रतिमाह किराये पर चला आश्रम
गांधी आश्रम के लिए लाला प्रसाद अयोध्या की कोठी को 60 रुपये मासिक किराये पर लिया गया। इसके बाद असौड़ा के जमींदार चौ. रघुवीर नारायण सिंह वर्तमान कार्यालय कोठी को 35 हजार नीलामी में प्राप्त करके गांधी आश्रम को समर्पित कर दिया। इसके बाद वर्ष 1969 में 35 हजार रुपये वापस करके गांधी आश्रम के नाम करा ली गई। गांधी आश्रम की स्थापना के समय जिन लोगों का समर्पण हुआ, उसमें मुख्य रूप से आचार्य जेबी कृपलानी के साथ पंडित जवाहर लाल नेहरु, बाबू शिवप्रसाद गुप्त, जमना लाज बजाब, चौ.रघुवीर नाराण सिंह शामिल रहे। 

600 में से रह गए 71 कर्मचारी
गांधी आश्रम के इतिहास में तेजी से कर्मचारियों की संख्या घटती रही। कभी आश्रम में 600 कर्मचारी काम करते थे। आज यह संख्या मात्र 71 रह गई। वहीं, कारीगरों में सूत कातने वाले 650 और 48 बुनकर हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष गांधी आश्रम चार करोड़ की आय सरकार को देता है। वहीं, जिले में छह स्थानों पर गांधी आश्रम का सामान बिकता है। जिसमें गढ़ रोड, घंटाघर, आपका बाजार, सुभाष बाजार, साबुन गोदाम, मवाना, किठौर, खरखौदा, सरधना में दुकानें खोली गईं हैं। - पृथ्वी सिंह रावत, गांधी आश्रम के मंत्री  

तीन प्रकार का होता है चरखा
- पुस्तक चरखा - जिसे गांधी जी अपने पास रखते थे, इसका साइज छोटा होता है।    
- पेटी चरखा - आमतौर पर इस चरखे से काम किया जाता है, अखंड चरखा यज्ञ में इसी का उपयोग किया जाएगा। 
- यर्वदा चरखा - इस चरखे का उपयोग बड़े स्थानों पर किया जाता है।

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