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कन्या विद्या धन फर्जीवाड़े में फंसे एसडीएम, तीन तहसीलदार 

Sun, 04 Jun 2017 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 04 Jun 2017 02:29 AM IST
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forgery in kanya vidhya dhan
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
समाजवादी पार्टी की 2002 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनी थी। उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कन्या विद्या धन योजना शुरू की थी। उसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। इस बीच दो सरकारें बदलीं, लेकिन जांच रिपोर्ट का खुलासा न होने से कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब नई सरकार बनने के बाद रिपोर्ट बाहर आई तो मेरठ जनपद में रहे एक एसडीएम, तीन तहसीलदार और 16 लेखपाल इस फर्जीवाड़े में फंस गए हैं। इन सभी पर कार्रवाई के लिए शासन से पत्र आया है।
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ये है पूरा मामला
कन्या विद्या धन योजना के अनुसार निर्धन 12वीं उत्तीर्ण कन्याओं को 20-20 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी गई थी। इस योजना में तहसील कर्मचारियों की साठगांठ से फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर ऐसे लोग भी लाभ उठा गये, जो पात्र ही नहीं थे। प्रदेश में यह घोटाला 2005-06 और 2006-07 में हुआ। इस योजना में हुए फर्जीवाड़े की शिकायत जब तक हुई, तब तक 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार आ चुकी थी। बसपा सरकार में इस मामले की जांच प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दी गई। पूरे प्रदेश के जनपदों में जांच हुई, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसके बाद 2012 में फिर से सपा सरकार आई और पूरी जांच रिपोर्ट दबा दी गई।
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मेरठ में 8.80 लाख का फर्जीवाड़ा
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही तमाम पिछले मामलों की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं। ऐसे में यह जांच रिपोर्ट भी उजागर हुई। जिसमें पता चला कि उत्तर प्रदेश में करीब 27 करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ था। जिसमें 8.80 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा मेरठ में हुआ था। मेरठ से 44 अपात्र लड़कियों के फर्जी आय के प्रमाण पत्र बनाकर उन्हें निर्धन बताया गया और कन्या विद्या धन दिला दिया गया। 
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इन पर कार्रवाई तय 
इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार मवाना इस्लाम मोहम्मद, तहसील सरधना कुंवरपाल सिंह और तहसील सदर नरेंद्र सिंह के साथ ही तहसीलदार से एसडीएम के लिए प्रोन्नत हुए एसडीएम सदर मनोज कुमार के खिलाफ कार्रवाई तय हुई है। वहीं इन फर्जी आय प्रमाण पत्रों पर रिपोर्ट लगाने वाले 16 लेखपालों के विरुद्ध भी कार्रवाई का आदेश मिला है। जिसमें इन सभी से यह धन ब्याज सहित वसूली के लिए कहा गया है। 


सभी का हो चुका है ट्रांसफर
इस मामले में कार्रवाई को लेकर मेरठ प्रशासन के सामने एक पेच फंसा है। इनमें दो अधिकारी इस्लाम मोहम्मद और कुंवरपाल जहां सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं मनोज कुमार और नरेंद्र सिंह दूसरे जनपदों में एसडीएम पद पर तैनात हैं। जबकि आधे लेखपाल भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

मुख्य बातें
जांच में 16 लेखपालों पर भी कार्रवाई के लिए आया निर्देश
मेरठ में 44 लोगों ने गलत आय प्रमाण पत्र बनवाकर लिया था योजना का लाभ
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