{"_id":"605b5be48ebc3e59220c60c0","slug":"family-is-making-natural-colors-for-holi-with-tesu-flowers-in-bijnor-district-of-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी के इस जिले में टेसू के फूलों से होली के लिए प्राकृतिक रंग बना रहा परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी के इस जिले में टेसू के फूलों से होली के लिए प्राकृतिक रंग बना रहा परिवार
Thu, 25 Mar 2021 12:38 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 25 Mar 2021 12:38 AM IST
सार
- परंपरा और मर्यादाओं से मजबूत होते सामाजिक रिश्ते
विज्ञापन
पलाश का पौधा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
होली के पर्व को प्राकृतिक रंगो के साथ मनाने के लिए अनेक परिवार टेसू के फूलों से रंग बनाने में जुटे हैं। फूलों से रंग बनाने में लगे लोगों का कहना है कि पर्व को परंपरा और मर्यादा के साथ मनाने पर रिश्ते मजबूत होते हैं।उत्तर प्रदेश के बिजनौर में कालागढ़ निवासी एक परिवार इसी तरह टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंगों को तैयार करने में जुटा है।
विज्ञापन
फाल्गुन के महीने में जिले के कालागढ़ क्षेत्र में चारों ओर जहां भी निगाह जाती है । वहीं पर सड़कों व वनों में टेसू के पेड़ों पर फूलों की बहार आ रही है। मदमस्त करने वाली सुगंध के साथ वातावरण महक रहा है।ऐसे में होली के पर्व पर क्षेत्र में अनेक परिवार टेसू के फूलों से रंग बनाने में जुटे हैं।राजेन्द्र कुमार, माया देवी व उनके पुत्र संदीप कुमार ने बताया कि बुजुर्गों से विरासत में मिली परंपरा को आज भी कायम रखे हुए हैं।
विज्ञापन
पेड़ों से टेसू के फूलों को जमा कर छाया में सुखाकर उनको पानी में भिगोकर जो रंग बनाया जाता है। वह किसी अमृत से कम नहीं है। इससे मन को शांति व त्वचा को शांति मिलती है। इससे कोई बीमारी आदि नहीं होती है। होली का पर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्धि प्रदान करता है।
विज्ञापन
बाजारों में मिलने वाले रंग मशीनों व रसायनों से बनते हैं। इनके असंतुलन से समस्या भी पैदा हो सकती है। होली पर खेतों में गेहूं भी पकने लगता है। ऐसे में गेहूं व पेड़ों पर फूलों की सौंधी सुगंध के बीच प्राकृतिक टेसू के फूलों से बना रंग मन को संतोष व शरीर को शीतलता प्रदान करता है।
दीपक मैंदोला, उपेन्द्र डोबरियाल, कैलाश कुमार आदि का कहना है कि कालागढ़ क्षेत्र में होली के पर्व पर इस फूल के रंग पर्व में चार चांद लगा देते हैं।