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बिजनौर में तमंचा बनाने की फैक्टरी पकड़ी, मौके से चार आरोपी दबोचे, असलहा बरामद
Sun, 27 Sep 2020 07:14 PM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
Published by: कपिल kapil
Updated Sun, 27 Sep 2020 07:14 PM IST
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मामले की जानकारी देते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में स्वाट टीम व शहर कोतवाली पुलिस ने धर्मनगरी जाने वाले रास्ते पर छापा मारकर अवैध शस्त्र बनाने की फैक्टरी पकड़ी। पुलिस ने मौके से चार लोगों को दबोचा है। फैक्टरी से सात बने व एक अधबना तमंचा और शस्त्र बनाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। फैक्टरी में 315 बोर के 202 कारतूस भी मिले हैं। इतने कारतूस फैक्टरी चलाने वाले ने किन लाइसेंसी शस्त्र धारकों से लिए, इसकी जांच शुरू करा दी गई है।
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एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के मुताबिक स्वाट टीम व शहर कोतवाली पुलिस ने बैराज रोड से गांव धर्मनगरी को जाने वाले रास्ते पर ईंख के खेत में अवैध शस्त्र बनाने की फैक्टरी पकड़ी है। फैक्टरी से सात बने व एक अधबना 315 बोर का तमंचा, शस्त्र बनाने के उपकरण और अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस ने फैक्टरी से 315 बोर के 202 कारतूस भी बरामद किए हैं।
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पुलिस ने अमरोहा जिले के अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के गांव नारायणपुर निवासी सतपाल, धामपुर थाने के गांव तिबड़ी निवासी इतेंद्र, अफजलगढ़ की डूग कॉलोनी निवासी सुहैल उर्फ सोनू व नूरपुर थाने के गांव पुरैना निवासी अतुल को दबोचा है। एसपी ने बताया कि जिले में अवैध शस्त्र के क्रय और विक्रय अभियान के तहत यह फैक्टरी पकड़ी गई है।
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आरोपी सतपाल ने पुलिस को बताया कि कारतूस अतुल उपलब्ध कराता था। अतुल के पास से 120 कारतूस मिले हैं। चारों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि आगामी चुनाव के मद्देनजर जिले में अवैध असलहों की मांग तेजी से बढ़ गई थी। वह तमंचे बनाकर अच्छे दामों में बेचकर मुनाफा कमाते थे। तमंचा पांच से दस हजार रुपये तक बेचते थे।
एसपी के मुताबिक फैक्टरी चलाने वालों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि 315 बोर के असली कारतूस इन लोगों के पास कहां से आए, यह भी जांच कराई जा रही है। ये बात साफ है कि कारतूस इनके पास लाइसेंसी शस्त्र धारकों के पास से आए हैं। किन शस्त्र धारकों ने ये कारतूस दिए इसका पता किया जा रहा है। शस्त्र धारकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। पुलिस यह भी पता निकाल रही है कि जिन शस्त्र धारकों के लाइसेंस निरस्त हुए हैं, उन्होंने तो ये कारतूस नहीं बेचे।
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