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दलित समाज की महापंचायत में 5 गिरफ्तार, लाठीचार्ज
Updated Fri, 31 Aug 2018 03:00 AM IST
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पुलिस ने नहीं होने दी महापंचायत, लाठीचार्ज
मेरठ। उल्देपुर प्रकरण में दलित समाज की महापंचायत को लेकर पुलिस बृहस्पतिवार को अलर्ट रही। इसमें वेस्ट यूपी के अलावा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से हजारों की संख्या में लोगों को पहुंचना था। लोगों को रोकने के लिए पुलिस के साथ भारी संख्या में पीएसी भी देहात और बाहर के रास्तों पर लगाई गई। कई जगह लाठी चार्ज करते हुए पुलिस ने ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों को नहीं आने दिया। महापंचायत का नेतृत्व कर रहे सुशील गौतम समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
दलित मोर्चा के बैनर तले कमिश्नरी पार्क में होने वाली महापंचायत में भाजपाइयों सहित कई पार्टियों के नेता व 52 गांव के लोग शामिल होने थे। बृहस्पतिवार सुबह महापंचायत की तैयारी चल रही थी। सूचना पर सीओ सिविल लाइन श्रीराम अर्ज, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला, सीओ ब्रह्मपुरी अखिलेश भदौरिया, सीओ एलआईयू, मजिस्ट्रेट पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस अफसरों ने कहा कि महापंचायत नहीं होने दी जाएगी, शहर में धारा 144 लागू है। यदि जबरन धरना देने या पंचायत करने की कोशिश की तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। इस दौरान सुशील गौतम के नेतृत्व में सैकड़ों लोग कमिश्नरी पार्क में पहुंच गए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। भीड़ ने कमिश्नरी के बाहर जाम लगाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सुशील गौतम, अग्नि शरद, मुकेश राव, दीपक सिंह प्रताप, प्रमोद कुमार और कामेश रतन को गिरफ्तार कर घसीटते हुए जीप में बैठाकर थाने भेज दिया। भीड़ ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
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एसपी देहात ने निर्देश दिए कि देहात और हाईवे से महापंचायत के लिए कोई भी ट्रैक्टर ट्राली किसी भी कीमत पर शहर में नहीं आने दी जाए। जिसके बाद पुलिस ने मोदीपुरम, मवाना रोड, इंचौली, कंकरखेड़ा में दर्जनों ट्रैक्टरों को रोककर वापस कर दिया। इंस्पेक्टर सिविल लाइन नीरज मलिक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी छह लोगों को निजी मुचलके पर थाने से छोड़ दिया गया। वहीं बताया गया कि महापंचायत में भीम आर्मी की टीम को भी आना था, लेकिन वो नहीं आई।
यह था प्रकरण
गंगानगर क्षेत्र के उल्देपुर गांव में नौ अगस्त को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इसमें दलित समाज के रोहित की मौत हो गई थी। आरोप था कि सवर्ण समाज के लोगों ने रोहित की हत्या की थी। बाद में पुलिस फोर्स ने दलित समाज के लोगों पर लाठीचार्ज कर शव को जबरन पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने रोहित पक्ष पर भी केस किया था। इसी को लेकर दलित आंदोलन कर रहे हैं।
यह थी मांग
रोहित के पिता देेवेंद्र ने मांग की कि उनके पक्ष पर दर्ज किया गया मुकदमा वापस हो। अभी पांच नामजद आरोपी फरार चल रहे हैं उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले सीओ का ट्रांसफर हो। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शासन से आर्थिक सहायता दिलाई जाए। 20 अगस्त को एसपी देहात राजेश कुमार ने छात्र के पिता देवेंद्र से मिलकर सभी मांगे पूरी कराने का आश्वासन दिया था।
पुलिस को याद आया दो अप्रैल
एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के फैसले के विरोध में दो अप्रैल को हजारों की संख्या में लोगों ने जमकर बवाल काटा था। ऐसे में दलित समाज की महापंचायत को रोकने को लेकर पुलिस ने पूरी प्लानिंग की थी। बृहस्पतिवार दोपहर तक एसएसपी का चार्ज एसपी देहात राजेश कुमार पर था। एसपी देहात ने सभी थाना प्रभारियों से कहा था कि यदि महापंचायत में भीड़ जुटी तो सख्त कार्रवाई होगी। एसपी देहात ने युवक के पिता देवेंद्र सिंह से भी बात की थी कि वह पंचायत न करें। वहीं देवेंद्र ने कहा कि उनके पास पंचायत के लिए परमिशन थी, लेकिन पुलिस ने परमिशन फाड़ते हुए जेल भेजने की धमकी दी।
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मेरठ। उल्देपुर प्रकरण में दलित समाज की महापंचायत को लेकर पुलिस बृहस्पतिवार को अलर्ट रही। इसमें वेस्ट यूपी के अलावा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से हजारों की संख्या में लोगों को पहुंचना था। लोगों को रोकने के लिए पुलिस के साथ भारी संख्या में पीएसी भी देहात और बाहर के रास्तों पर लगाई गई। कई जगह लाठी चार्ज करते हुए पुलिस ने ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों को नहीं आने दिया। महापंचायत का नेतृत्व कर रहे सुशील गौतम समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
दलित मोर्चा के बैनर तले कमिश्नरी पार्क में होने वाली महापंचायत में भाजपाइयों सहित कई पार्टियों के नेता व 52 गांव के लोग शामिल होने थे। बृहस्पतिवार सुबह महापंचायत की तैयारी चल रही थी। सूचना पर सीओ सिविल लाइन श्रीराम अर्ज, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला, सीओ ब्रह्मपुरी अखिलेश भदौरिया, सीओ एलआईयू, मजिस्ट्रेट पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे।
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पुलिस अफसरों ने कहा कि महापंचायत नहीं होने दी जाएगी, शहर में धारा 144 लागू है। यदि जबरन धरना देने या पंचायत करने की कोशिश की तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। इस दौरान सुशील गौतम के नेतृत्व में सैकड़ों लोग कमिश्नरी पार्क में पहुंच गए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। भीड़ ने कमिश्नरी के बाहर जाम लगाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सुशील गौतम, अग्नि शरद, मुकेश राव, दीपक सिंह प्रताप, प्रमोद कुमार और कामेश रतन को गिरफ्तार कर घसीटते हुए जीप में बैठाकर थाने भेज दिया। भीड़ ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
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एसपी देहात ने निर्देश दिए कि देहात और हाईवे से महापंचायत के लिए कोई भी ट्रैक्टर ट्राली किसी भी कीमत पर शहर में नहीं आने दी जाए। जिसके बाद पुलिस ने मोदीपुरम, मवाना रोड, इंचौली, कंकरखेड़ा में दर्जनों ट्रैक्टरों को रोककर वापस कर दिया। इंस्पेक्टर सिविल लाइन नीरज मलिक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी छह लोगों को निजी मुचलके पर थाने से छोड़ दिया गया। वहीं बताया गया कि महापंचायत में भीम आर्मी की टीम को भी आना था, लेकिन वो नहीं आई।
यह था प्रकरण
गंगानगर क्षेत्र के उल्देपुर गांव में नौ अगस्त को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इसमें दलित समाज के रोहित की मौत हो गई थी। आरोप था कि सवर्ण समाज के लोगों ने रोहित की हत्या की थी। बाद में पुलिस फोर्स ने दलित समाज के लोगों पर लाठीचार्ज कर शव को जबरन पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने रोहित पक्ष पर भी केस किया था। इसी को लेकर दलित आंदोलन कर रहे हैं।
यह थी मांग
रोहित के पिता देेवेंद्र ने मांग की कि उनके पक्ष पर दर्ज किया गया मुकदमा वापस हो। अभी पांच नामजद आरोपी फरार चल रहे हैं उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले सीओ का ट्रांसफर हो। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शासन से आर्थिक सहायता दिलाई जाए। 20 अगस्त को एसपी देहात राजेश कुमार ने छात्र के पिता देवेंद्र से मिलकर सभी मांगे पूरी कराने का आश्वासन दिया था।
पुलिस को याद आया दो अप्रैल
एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के फैसले के विरोध में दो अप्रैल को हजारों की संख्या में लोगों ने जमकर बवाल काटा था। ऐसे में दलित समाज की महापंचायत को रोकने को लेकर पुलिस ने पूरी प्लानिंग की थी। बृहस्पतिवार दोपहर तक एसएसपी का चार्ज एसपी देहात राजेश कुमार पर था। एसपी देहात ने सभी थाना प्रभारियों से कहा था कि यदि महापंचायत में भीड़ जुटी तो सख्त कार्रवाई होगी। एसपी देहात ने युवक के पिता देवेंद्र सिंह से भी बात की थी कि वह पंचायत न करें। वहीं देवेंद्र ने कहा कि उनके पास पंचायत के लिए परमिशन थी, लेकिन पुलिस ने परमिशन फाड़ते हुए जेल भेजने की धमकी दी।