UP: गंगा की धरा पर ब्रिटिश काल की वीएलपी गन की नुमाइश, 1943 में बनी थी बिजनौर पुलिस का गहना
पुलिस ने गंगा स्नान मेले में लगा रखी है हथियारों की प्रदर्शनी लगा रखी है। इसमें वीपीएल गन भी रखी गई है। आस्ट्रेलिया में बनी वीएलपी गन 1943 में बिजनौर पुलिस को मिली थी। दो दशक पहले इस पिस्टल का इस्तेमाल बंद किया जा चुका है।
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वेरी लाइट पिस्टल (वीएलपी) नाम की गन अब इतिहास बन चुकी है, लेकिन अगर इसका दीदार करना है तो गंगा स्नान मेले में चले आइए। जी हां गंगा की धरा पर इस गन की भी नुमाइश लगी है, जो कि ब्रिटिश काल की यादों को ताजा कर रही है। यह गन बिजनौर पुलिस को 1943 में मिली थी, जिसे सिडनी में बनाया गया था। हालांकि दो दशक पहले इसे इस्तेमाल से बाहर कर दिया गया।
गंगा स्नान मेले का आगाज हो चुका है। तमाम विभाग वहां प्रदर्शनी लगाते हैं। वहीं पुलिस महकमा भी लोगों को असलहा की प्रदर्शनी लगाकर आकर्षित कर रहा है। एसपी दिनेश सिंह के निर्देश पर शनिवार की सुबह ही प्रतिसार निरीक्षक पुलिस के इस्तेमाल में आने वाले असलहा को लेकर मेले में पहुंच गए थे और प्रदर्शनी लगाई।
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असलहा की प्रदर्शनी रोमांच पैदा कर रही है। इसकी खास बात यह भी है कि इसमें एक एतिहासिक वीएलपी गन को भी रखा गया है। पीतल से बनी हुई यह गन मेड इन आस्ट्रेलिया है, जो कि साल 1943 में बिजनौर पुलिस को मिली थी। तब पुलिस की अंग्रेजी हुकूमत की हुआ करती थी। प्रतिसार निरीक्षक ने बताया कि वेरी लाइट पिस्टल को सिग्नल पिस्टल भी कहा जाता है।
इस पिस्टल का आविष्कार अमेरिकन नेवी के लेफ्टिनेंट एडवर्ड वेरी ने किया था, जिस वजह से इसका नाम वेरी भी पड़ा। किसी खतरे में या सहायता के लिए, कलरफुल कार्टिज फायर की जाती थी। दोनों विश्वयुद्घ में इसका खूब इस्तेमाल हुआ।
हवा में फायर करते ही यह गन आसमान में रोशनी का रंग-बिरंगा गुब्बार बना दिया करती थी। वजन अधिक होने की वजह से इसे बाहर कर दिया गया। हालांकि रखी सहेज कर जा रही है।
वीएलपी एक ऐतिहासिक असलहा है। जिसे इस्तेमाल नहीं होने पर भी संभाल कर रखा जा रहा है। अब इसकी जगह मिनी फ्लेयर आ गई है। वीएलपी को प्रदर्शनी में रखने का मकसद है कि लोगों को ऐतिहासिक वस्तुओं की जानकारी हो सके। -दिनेश सिंह, एसपी