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आयुष्मान योजना: मरीज़ों के इलाज पर खर्च हुए 103 करोड़ रुपये
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आयुष्मान योजना: मरीज़ों के इलाज पर खर्च हुए 103 करोड़ रुपये
- मेरठ में 59 हज़ार लोगों को मिला इलाज
- 83 निजी अस्पताल हैं पंजीकृत
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत मरीज़ों को इलाज में 103 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। योजना को शुरू हुए पांच साल से ज्यादा हो गए हैं। 59 हज़ार 39 मरीज़ों को इलाज मिला है। 83 निजी अस्पताल इसमें पंजीकृत हैं, जबकि 15 सरकारी अस्पताल व सीएचसी हैं।
हालांकि योजना अभी पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ सकी है। लोगों को लाभ भी मिल रहा है, मगर ये नाकाफी है। और सुधार की ज़रूरत है। दरअसल, मेरठ जिले में 12,96,808 लाभार्थी हैं। 300 से ज्यादा निजी अस्पताल हैं। और अस्पतालों को जोड़ने की ज़रूरत है। वहीं, 6,65,796 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। अभी 6,31,012 ऐसे लाभार्थी हैं जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। इसके लिए जागरूकता की आवश्यकता है।
योजना के तहत लाभार्थी परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिलती है। सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि आयुष्मान योजना के कार्ड 2011 की जनगणना के अनुसार पात्र लाभार्थियों के ही बनाए जा रहे हैं। इसके परिवार जिनके राशन कार्ड में छह या छह से ज्यादा लोग हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जा रहा है। अगर कोई दूसरे माध्यम से योजना के कार्ड बनाने का प्रभोलन देता है, तो उसके झांसे में न आएं। अगर कोई ऐसा झांसा देता है तो तत्काल विभाग को सूचित करें। आयुष्मान कार्ड होने पर ही योजना के तहत उपचार की सुविधा मिलती है, इसलिए विभाग लगातार लाभार्थियों से अपील करता है कि सभी आयुष्मान कार्ड जरूर बनवा लें। आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. आर के सिरोहा ने बताया कि योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके इसके लिए बाकायदा विभाग की ओर से निगरानी की जाती है। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। कार्ड बनाए जाने की रफ्तार में लगातार इजाफा हो रहा है।
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आयुष्मान कार्ड बनाने की स्थिति...
योजना के तहत वर्ष 2020-21 में 68,680 आयुष्मान कार्ड,
वर्ष 2021-22 में 44,678,
वर्ष 2022-23 में 149706 कार्ड बनाए गए। वर्ष 2023-24 में 4,02,732 कार्ड बने हैं।
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- मेरठ में 59 हज़ार लोगों को मिला इलाज
- 83 निजी अस्पताल हैं पंजीकृत
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत मरीज़ों को इलाज में 103 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। योजना को शुरू हुए पांच साल से ज्यादा हो गए हैं। 59 हज़ार 39 मरीज़ों को इलाज मिला है। 83 निजी अस्पताल इसमें पंजीकृत हैं, जबकि 15 सरकारी अस्पताल व सीएचसी हैं।
हालांकि योजना अभी पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ सकी है। लोगों को लाभ भी मिल रहा है, मगर ये नाकाफी है। और सुधार की ज़रूरत है। दरअसल, मेरठ जिले में 12,96,808 लाभार्थी हैं। 300 से ज्यादा निजी अस्पताल हैं। और अस्पतालों को जोड़ने की ज़रूरत है। वहीं, 6,65,796 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। अभी 6,31,012 ऐसे लाभार्थी हैं जिनके गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। इसके लिए जागरूकता की आवश्यकता है।
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योजना के तहत लाभार्थी परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिलती है। सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि आयुष्मान योजना के कार्ड 2011 की जनगणना के अनुसार पात्र लाभार्थियों के ही बनाए जा रहे हैं। इसके परिवार जिनके राशन कार्ड में छह या छह से ज्यादा लोग हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जा रहा है। अगर कोई दूसरे माध्यम से योजना के कार्ड बनाने का प्रभोलन देता है, तो उसके झांसे में न आएं। अगर कोई ऐसा झांसा देता है तो तत्काल विभाग को सूचित करें। आयुष्मान कार्ड होने पर ही योजना के तहत उपचार की सुविधा मिलती है, इसलिए विभाग लगातार लाभार्थियों से अपील करता है कि सभी आयुष्मान कार्ड जरूर बनवा लें। आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. आर के सिरोहा ने बताया कि योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके इसके लिए बाकायदा विभाग की ओर से निगरानी की जाती है। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं। कार्ड बनाए जाने की रफ्तार में लगातार इजाफा हो रहा है।
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आयुष्मान कार्ड बनाने की स्थिति...
योजना के तहत वर्ष 2020-21 में 68,680 आयुष्मान कार्ड,
वर्ष 2021-22 में 44,678,
वर्ष 2022-23 में 149706 कार्ड बनाए गए। वर्ष 2023-24 में 4,02,732 कार्ड बने हैं।