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कैंट बोर्ड ने हटाए 11 टावर, पांच घंटे चला ऑपरेशन
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कैंट बोर्ड ने हटाए 11 मोबाइल टावर
- करईगंज में चलाया अभियान, साल 2012 में लगाए गए थे
मेरठ।
कैंट बोर्ड टीम ने मंगलवार को करईगंज क्षेत्र में अभियान चलाकर 11 मोबाइल टावरों को हटाया। सीईओ प्रसाद चव्हाण के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। मकान संख्या 437, 438 में लगे टॉवरों को साल 2012 में लगाया गया था।
सीईई अनुज सिंह के नेतृत्व में पहुंची 25 सदस्यीय टीम ने अभियान चलाया। इस मामले में उमेश रस्तोगी ने मेरठ न्यायालय में टावर न हटाए जाने के लिए मुकदमा किया था। कैंट बोर्ड ने मामले में कोई भी स्टे ऑर्डर न होने के चलते सेक्शन नंबर 9 के तहत पीपीई एक्ट में यह कार्रवाई की। इन टॉवरों को तत्कालीन बोर्ड उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी के कार्यकाल में लगाया गया था। मामले में मेरठ न्यायालय में चल रहे केस का फैसला एक दिसंबर 2017 को टावर हटाने के पक्ष में हुआ था। लेकिन उमेश रस्तोगी ने दोबारा केस फाइल कर दिया। इसके बाद 29 सितंबर 2018 को एक बार फिर टावरों को हटाने पर फैसला दिया गया। इसके बाद इस मामले पर कोई स्टे ऑर्डर नहीं लिया गया। इस अभियान में पीयूष गौतम, अवधेश यादव, राधेश्याम, शंकरदयाल, कपिल, रंजीत मौजूद रहे।
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- करईगंज में चलाया अभियान, साल 2012 में लगाए गए थे
मेरठ।
कैंट बोर्ड टीम ने मंगलवार को करईगंज क्षेत्र में अभियान चलाकर 11 मोबाइल टावरों को हटाया। सीईओ प्रसाद चव्हाण के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। मकान संख्या 437, 438 में लगे टॉवरों को साल 2012 में लगाया गया था।
सीईई अनुज सिंह के नेतृत्व में पहुंची 25 सदस्यीय टीम ने अभियान चलाया। इस मामले में उमेश रस्तोगी ने मेरठ न्यायालय में टावर न हटाए जाने के लिए मुकदमा किया था। कैंट बोर्ड ने मामले में कोई भी स्टे ऑर्डर न होने के चलते सेक्शन नंबर 9 के तहत पीपीई एक्ट में यह कार्रवाई की। इन टॉवरों को तत्कालीन बोर्ड उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी के कार्यकाल में लगाया गया था। मामले में मेरठ न्यायालय में चल रहे केस का फैसला एक दिसंबर 2017 को टावर हटाने के पक्ष में हुआ था। लेकिन उमेश रस्तोगी ने दोबारा केस फाइल कर दिया। इसके बाद 29 सितंबर 2018 को एक बार फिर टावरों को हटाने पर फैसला दिया गया। इसके बाद इस मामले पर कोई स्टे ऑर्डर नहीं लिया गया। इस अभियान में पीयूष गौतम, अवधेश यादव, राधेश्याम, शंकरदयाल, कपिल, रंजीत मौजूद रहे।
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