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एमआईईटी कॉलेज
Updated Mon, 25 Sep 2017 02:47 AM IST
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मेरठ। राजा रवि वर्मा, एमएफ हुसैन और सुदर्शन पटनायक जैसे कलाकारों वाली हिंदुस्तानी धरती पर भावी इंजीनियरों ने चित्रकारी का हुनर दिखाया। रंगोत्सव 2017 के दूसरे दिन इंजीनियरिंग के छात्रों ने अल्फा-बीटा की जगह लाल, हरी आड़ी, तिरछी रेखाएं खींचकर अपनी रचनात्मकता दिखाई। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) में चल रहे दो दिवसीय रंगोत्सव-2017 में रविवार को कई प्रतियोगिताएं हुईं। कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर अमर उजाला है।
रंगों के उत्सव में दूसरे दिन कैलीग्राफी, नेलआर्ट, टी-शर्ट पेंटिंग, कसल आर्ट आदि प्रतियोगिताएं हुईं। 70 से अधिक प्रतिभागियाें ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। 15 मिनट के छोटे वक्त में कलाकारों ने कला का नया इंद्रधनुष रच दिया। कैलीग्राफी में स्लोगन पर राइटिंग डिजायन किया। अंत में कलर हंट और ग्रेफाइट डांस का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में विभिन्न कॉलेजों के 350 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। एमआईईटी के अलावा, एमआईटी, सुभारती विश्वविद्यालय, विद्या नॉलेज पार्क, आईआईएमटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी आदि के छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। रामू तिवारी, रजत पांडे, मेहुल, लोक, देवेंद्र, कोआर्डिनेटर यश अग्रवाल, भार्गव प्रेम ने सहयोग दिया।
नाखूनों पर नाचे भूत
नेल पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने नाखूनों को पेंटिंग कलर और नेलपेंट्स से सजाया। प्रमुख बात यह थी कि लड़कों ने लड़कियों और लड़कियों ने लड़कों के नाखून सजाए। नाखूनों को हेलोइन थीम में सजाया। महज एक से डेढ़ इंच के नाखून पर ब्रश, सुई, पेंसिल और टूथपिक की मदद से भूत, खोपड़ी की पेंटिंग बनाई। कुछ प्रतिभागियों ने इंडोवेस्टर्न, बैक टू पवेलियन, स्टोन एरा को नाखून पर दर्शाया।
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कॉफी पर नहीं कॉफी से बनाई पेंटिंग
कॉफी पेंटिंग यानि कॉफीमग में भरी कॉफी के फेथ पर सुंदर डिजायनिंग यही सोचते हैं। रंगोत्सव में कॉफी पेंटिंग का अंदाज एकदम नया और जुदा नजर आया। जहां कॉफी पर नहीं बल्कि गीली कॉफी से पेंटिंग हुई। कॉफी पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बाउल में ओरिजनल कॉफी बींस को घोलकर लिक्विड बनाया। इस लिक्विड से टी-शर्ट, चार्ट और ड्राइंग शीट पेंट किए। ब्रश, निब, टूथपिक और अंगुलियों के पोरों की मदद से बिना रंग के के वल कॉफी से पेंटिंग हुई। कॉफी से राशियों के चिन्ह, आध्यात्म चिन्ह, देवी-देवताओं के चेहरे, नारी आकृतियां बर्नाइं। महज 30 मिनट में कलाकारों ने सुंदर कॉफी पेंटिंग कर दी।
टी-शर्ट में उतारा जमाने का गुबार
जमाने में चल रही मुसीबतें, जे़हन में पल रहे विकारों का आईना टी-शर्ट बनी। रंगोत्सव में प्रतिभागियों ने टी-शर्ट पर जमाने का गुबार उतार दिया। प्रदूषण, पेड़ों का अंधाधुंध कटान, निर्भया कांड, बेरोजगारी से जूझता यंगिस्तान, अशिक्षा जैसे मुद्दों से टीशर्ट रंग दी। प्रतिभागियों ने फैब्रिक कलर से टी-शर्ट पर चित्रकारी सजाई।
15 मिनट में रेत से बनाया महल
हाथों से फिसलती रेत को हाथों की कारीगरी से सजाकर दुनियाभर में मशहूर हुए सुदर्शन पटनायक को रंगोत्सव में युवाओं ने फॉलो किया। प्रतियोगिता में कसल पेंटिंग (रेत से मॉडल बनाओ) प्रतियोगिता हुई। प्रतिभागियों ने 15 मिनट में रेत से महल खड़ा कर दिया। समूह में हुई प्रतियोगिता में गीली रेत से मॉडल बनाया। प्रतिभागियों की कला के साथ आपसी सामंजस्य और सोच का दूरदर्शिता को परखा गया। वेस्ट क्राकरी से रेत से आकृतियां बनाईं।
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रंगों के उत्सव में दूसरे दिन कैलीग्राफी, नेलआर्ट, टी-शर्ट पेंटिंग, कसल आर्ट आदि प्रतियोगिताएं हुईं। 70 से अधिक प्रतिभागियाें ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। 15 मिनट के छोटे वक्त में कलाकारों ने कला का नया इंद्रधनुष रच दिया। कैलीग्राफी में स्लोगन पर राइटिंग डिजायन किया। अंत में कलर हंट और ग्रेफाइट डांस का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में विभिन्न कॉलेजों के 350 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। एमआईईटी के अलावा, एमआईटी, सुभारती विश्वविद्यालय, विद्या नॉलेज पार्क, आईआईएमटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी आदि के छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। रामू तिवारी, रजत पांडे, मेहुल, लोक, देवेंद्र, कोआर्डिनेटर यश अग्रवाल, भार्गव प्रेम ने सहयोग दिया।
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नाखूनों पर नाचे भूत
नेल पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने नाखूनों को पेंटिंग कलर और नेलपेंट्स से सजाया। प्रमुख बात यह थी कि लड़कों ने लड़कियों और लड़कियों ने लड़कों के नाखून सजाए। नाखूनों को हेलोइन थीम में सजाया। महज एक से डेढ़ इंच के नाखून पर ब्रश, सुई, पेंसिल और टूथपिक की मदद से भूत, खोपड़ी की पेंटिंग बनाई। कुछ प्रतिभागियों ने इंडोवेस्टर्न, बैक टू पवेलियन, स्टोन एरा को नाखून पर दर्शाया।
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कॉफी पर नहीं कॉफी से बनाई पेंटिंग
कॉफी पेंटिंग यानि कॉफीमग में भरी कॉफी के फेथ पर सुंदर डिजायनिंग यही सोचते हैं। रंगोत्सव में कॉफी पेंटिंग का अंदाज एकदम नया और जुदा नजर आया। जहां कॉफी पर नहीं बल्कि गीली कॉफी से पेंटिंग हुई। कॉफी पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बाउल में ओरिजनल कॉफी बींस को घोलकर लिक्विड बनाया। इस लिक्विड से टी-शर्ट, चार्ट और ड्राइंग शीट पेंट किए। ब्रश, निब, टूथपिक और अंगुलियों के पोरों की मदद से बिना रंग के के वल कॉफी से पेंटिंग हुई। कॉफी से राशियों के चिन्ह, आध्यात्म चिन्ह, देवी-देवताओं के चेहरे, नारी आकृतियां बर्नाइं। महज 30 मिनट में कलाकारों ने सुंदर कॉफी पेंटिंग कर दी।
टी-शर्ट में उतारा जमाने का गुबार
जमाने में चल रही मुसीबतें, जे़हन में पल रहे विकारों का आईना टी-शर्ट बनी। रंगोत्सव में प्रतिभागियों ने टी-शर्ट पर जमाने का गुबार उतार दिया। प्रदूषण, पेड़ों का अंधाधुंध कटान, निर्भया कांड, बेरोजगारी से जूझता यंगिस्तान, अशिक्षा जैसे मुद्दों से टीशर्ट रंग दी। प्रतिभागियों ने फैब्रिक कलर से टी-शर्ट पर चित्रकारी सजाई।
15 मिनट में रेत से बनाया महल
हाथों से फिसलती रेत को हाथों की कारीगरी से सजाकर दुनियाभर में मशहूर हुए सुदर्शन पटनायक को रंगोत्सव में युवाओं ने फॉलो किया। प्रतियोगिता में कसल पेंटिंग (रेत से मॉडल बनाओ) प्रतियोगिता हुई। प्रतिभागियों ने 15 मिनट में रेत से महल खड़ा कर दिया। समूह में हुई प्रतियोगिता में गीली रेत से मॉडल बनाया। प्रतिभागियों की कला के साथ आपसी सामंजस्य और सोच का दूरदर्शिता को परखा गया। वेस्ट क्राकरी से रेत से आकृतियां बनाईं।