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कागजों में ही ओडीएफ हुई मलिन बस्ती, मूलभूत सुविधाओं से भी लोग वंचित
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स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में लोगों को जागरूक कर रही पालिका
वार्ड 22 के बारे में स्वयं जागरूक नहीं पालिका कर्मचारी
शरद गुप्ता
मवाना। जिले की नगर पंचायत एवं नगर पालिकाओं ने बीती दो अक्तूबर को अपने सभी वार्डों को ओडीएफ घोषित कर दिया था। हालांकि सच्चाई इसके उलट है। यहां बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिनके यहां शौचालय नहीं हैं। ये मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नगर पालिका मवाना के वार्ड 22 के मोहल्ला मुन्नालाल की निवासी आज भी स्वयं नाली साफ कर रहे हैं। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर पालिका लोगों को जागरूक कर रही है। इस वार्ड के बारे में आज तक नगर पालिका स्वयं जागरूक नहीं हुई है।
टायलेट सीट है पर चारदीवारी नहीं
मोहल्ला मुन्नालाल निवासी नदीम मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। उसके घर में पत्नी शकीला एवं बच्चे हैं। वह तालाब किनारे बने कच्चे मकान में जीवन यापन करता है। नदीम ने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनांर्तगत उसने भी पक्का शौचालय के लिए भी आवेदन किया। उसका आज तक शौचालय नहीं बन सका है। वह शौचालय का निर्माण खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए वह सिर्फ शौचालय की सीट ला सका है। टायलेट सीट कोचारों ओर से कपड़े से कवर किया गया है। इसी वार्ड में निवासी नफीस के यहां भी शौचालय नहीं बन सका है। आलम यह है कि वे आज भी पुरानी प्रथा को ढोने के लिए मजबूर हैं।
कनेक्शन हैं, खंभे नहीं
वार्ड 22 निवासी सईद, रहीमउल्लाह, महबूबउल्लाह, आशु आदि ने बताया कि उनकी बस्ती में लगभग 100 परिवार रहते हैं। इन सभी के घरों में विद्युत कनेक्शन हैं, लेकिन खंभे नहीं लगाए गए हैं। जिस कारण बल्लियों पर ही तार लगाकर घरों तक केबल पहुंचाया गया है। बल्लियां खड़ी हैं, जिससे हादसे का डर बना रहता है।
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न पक्का खड़ंजा, न सफाई व्यवस्था
वार्ड में आज भी कच्ची गलियां हैं। पक्का खड़ंजा नहीं होने से बरसात में यहां कीचड़ हो जाने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। यही नहीं नालियों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते हैं। जिससे लोगों को स्वयं ही सफाई करनी पड़ती है।
फैसल, वार्ड वासी
वोट है पर पालिका में दर्ज नहीं
वैसे तो नगर पालिका के चुनाव में सभासद एवं चेयरमैन पद के प्रत्याशी यहां वोट मांगने के लिए आते हैं। यहां रहने वाले सभी परिवारों की वोट बनी हुई हैं। जब विकास की बात आती है तो पालिका यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि अभी यह कॉलोनी पालिका में दर्ज नहीं है। जिस कारण यहां मूलभूत सुविधा नहीं दी जा सकती है।
नूर मोहम्मद, वार्डवासी
नहीं होती नाले की सफाई
निकासी के लिए पालिका नाले की सफाई नहीं कराती है। जिस कारण नाले से उठती बदबू के कारण यहां रहने वालों का जीना मुहाल हो रहा है। मुन्ना, वार्डवासी
पेयजल के लिए स्वयं घर में लगाए हैंडपंप
नगर पालिका द्वारा वार्ड में कुछ ही जगह पर पेयजल पाइप लाइन बिछाई गई है। जिस कारण सभी परिवारों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है। वार्ड में सरकारी हैंडपंप भी नहीं लगाए गए हैं। जिस कारण बहुत से परिवारों ने पेयजल के लिए अपने घरों में स्वयं हैंडपंप लगाए हैं।
आरिफ अंसारी, वार्डवासी
यहां की मलिन बस्ती में कुछ परिवारों ने तालाब की जमीन पर मकान बनाए हुए हैं। जिन पर मुकदमा चल रहा है। विवाद के चलते यहां निर्माण कार्य नहीं कराए जा रहे हैं।-मौ. अय्यूब कालिया, चेयरमैन मवाना
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वार्ड 22 के बारे में स्वयं जागरूक नहीं पालिका कर्मचारी
शरद गुप्ता
मवाना। जिले की नगर पंचायत एवं नगर पालिकाओं ने बीती दो अक्तूबर को अपने सभी वार्डों को ओडीएफ घोषित कर दिया था। हालांकि सच्चाई इसके उलट है। यहां बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिनके यहां शौचालय नहीं हैं। ये मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नगर पालिका मवाना के वार्ड 22 के मोहल्ला मुन्नालाल की निवासी आज भी स्वयं नाली साफ कर रहे हैं। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर पालिका लोगों को जागरूक कर रही है। इस वार्ड के बारे में आज तक नगर पालिका स्वयं जागरूक नहीं हुई है।
टायलेट सीट है पर चारदीवारी नहीं
मोहल्ला मुन्नालाल निवासी नदीम मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। उसके घर में पत्नी शकीला एवं बच्चे हैं। वह तालाब किनारे बने कच्चे मकान में जीवन यापन करता है। नदीम ने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनांर्तगत उसने भी पक्का शौचालय के लिए भी आवेदन किया। उसका आज तक शौचालय नहीं बन सका है। वह शौचालय का निर्माण खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए वह सिर्फ शौचालय की सीट ला सका है। टायलेट सीट कोचारों ओर से कपड़े से कवर किया गया है। इसी वार्ड में निवासी नफीस के यहां भी शौचालय नहीं बन सका है। आलम यह है कि वे आज भी पुरानी प्रथा को ढोने के लिए मजबूर हैं।
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कनेक्शन हैं, खंभे नहीं
वार्ड 22 निवासी सईद, रहीमउल्लाह, महबूबउल्लाह, आशु आदि ने बताया कि उनकी बस्ती में लगभग 100 परिवार रहते हैं। इन सभी के घरों में विद्युत कनेक्शन हैं, लेकिन खंभे नहीं लगाए गए हैं। जिस कारण बल्लियों पर ही तार लगाकर घरों तक केबल पहुंचाया गया है। बल्लियां खड़ी हैं, जिससे हादसे का डर बना रहता है।
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न पक्का खड़ंजा, न सफाई व्यवस्था
वार्ड में आज भी कच्ची गलियां हैं। पक्का खड़ंजा नहीं होने से बरसात में यहां कीचड़ हो जाने से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। यही नहीं नालियों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते हैं। जिससे लोगों को स्वयं ही सफाई करनी पड़ती है।
फैसल, वार्ड वासी
वोट है पर पालिका में दर्ज नहीं
वैसे तो नगर पालिका के चुनाव में सभासद एवं चेयरमैन पद के प्रत्याशी यहां वोट मांगने के लिए आते हैं। यहां रहने वाले सभी परिवारों की वोट बनी हुई हैं। जब विकास की बात आती है तो पालिका यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि अभी यह कॉलोनी पालिका में दर्ज नहीं है। जिस कारण यहां मूलभूत सुविधा नहीं दी जा सकती है।
नूर मोहम्मद, वार्डवासी
नहीं होती नाले की सफाई
निकासी के लिए पालिका नाले की सफाई नहीं कराती है। जिस कारण नाले से उठती बदबू के कारण यहां रहने वालों का जीना मुहाल हो रहा है। मुन्ना, वार्डवासी
पेयजल के लिए स्वयं घर में लगाए हैंडपंप
नगर पालिका द्वारा वार्ड में कुछ ही जगह पर पेयजल पाइप लाइन बिछाई गई है। जिस कारण सभी परिवारों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है। वार्ड में सरकारी हैंडपंप भी नहीं लगाए गए हैं। जिस कारण बहुत से परिवारों ने पेयजल के लिए अपने घरों में स्वयं हैंडपंप लगाए हैं।
आरिफ अंसारी, वार्डवासी
यहां की मलिन बस्ती में कुछ परिवारों ने तालाब की जमीन पर मकान बनाए हुए हैं। जिन पर मुकदमा चल रहा है। विवाद के चलते यहां निर्माण कार्य नहीं कराए जा रहे हैं।-मौ. अय्यूब कालिया, चेयरमैन मवाना