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निगम में सफाई कर्मचारियों की भर्ती पर शासन से बैठी जांच
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:20 AM IST
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सफाई कर्मचारियों की भर्ती पर शासन से बैठी जांच
मेरठ। नगर निगम में दस नए वार्डों के लिए आउट सोर्सिंग पर की जा रही 200 सफाई कर्मचारियों की भर्ती पर शासन ने जांच बैठा दी है। भाजपा के एक पार्षद ने नगर विकास मंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद शासन ने नगर निगम अधिकारियों से सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर रिपोर्ट मांगी है। वहीं पूरे मामले में कुछ पार्षद और भाजपा नेता फंसते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सफाई कर्मचारियों ऐसे भी शामिल हैं जिनको सफाई का कोई अनुभव नहीं है।
शहर की बढ़ती जनसंख्या के आधार पर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड में 400 आउट सोर्सिंग कर्मचारियों का प्रस्ताव पास किया गया था। जिनमें से एक माह पहले नगर निगम प्रशासन ने 200 सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए दो कंपनियों को पत्र लिखा। जिनमें से एक कंपनी ने 100 सफाई कर्मचारियों की सूची बनाकर नगर निगम प्रशासन को सौंप दी। इतना ही नहीं नई भर्ती में शामिल सफाई कर्मचारियों को वार्डों में उतारे जाने की भी बात कही गयी। जब वार्डों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचे तो भर्ती प्रक्रिया से लेकर वार्डों में तैनाती तक भ्रष्टाचार का खुलासा होना शुरू हो गया। कमिश्नर और डीएम से भी शिकायत की गई। भाजपा पार्षद राजेश रुहेला ने पिछले माह मेरठ आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को भ्रष्टाचार की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी दी। नगर विकास मंत्री ने उस शिकायत के आधार पर जांच बैठा दी है। शासन से मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम प्रशासन से सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया की रिपोर्ट मांगी है। उधर, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई है।
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मेरठ। नगर निगम में दस नए वार्डों के लिए आउट सोर्सिंग पर की जा रही 200 सफाई कर्मचारियों की भर्ती पर शासन ने जांच बैठा दी है। भाजपा के एक पार्षद ने नगर विकास मंत्री से शिकायत की थी। इसके बाद शासन ने नगर निगम अधिकारियों से सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर रिपोर्ट मांगी है। वहीं पूरे मामले में कुछ पार्षद और भाजपा नेता फंसते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सफाई कर्मचारियों ऐसे भी शामिल हैं जिनको सफाई का कोई अनुभव नहीं है।
शहर की बढ़ती जनसंख्या के आधार पर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड में 400 आउट सोर्सिंग कर्मचारियों का प्रस्ताव पास किया गया था। जिनमें से एक माह पहले नगर निगम प्रशासन ने 200 सफाई कर्मचारियों को रखने के लिए दो कंपनियों को पत्र लिखा। जिनमें से एक कंपनी ने 100 सफाई कर्मचारियों की सूची बनाकर नगर निगम प्रशासन को सौंप दी। इतना ही नहीं नई भर्ती में शामिल सफाई कर्मचारियों को वार्डों में उतारे जाने की भी बात कही गयी। जब वार्डों में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचे तो भर्ती प्रक्रिया से लेकर वार्डों में तैनाती तक भ्रष्टाचार का खुलासा होना शुरू हो गया। कमिश्नर और डीएम से भी शिकायत की गई। भाजपा पार्षद राजेश रुहेला ने पिछले माह मेरठ आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को भ्रष्टाचार की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी दी। नगर विकास मंत्री ने उस शिकायत के आधार पर जांच बैठा दी है। शासन से मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम प्रशासन से सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया की रिपोर्ट मांगी है। उधर, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई है।
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