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अंतराष्ट्रीय कॉफी दिवस स्टोरी
Updated Sun, 01 Oct 2017 02:27 AM IST
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मेरठ। कॉफी दिलों को जोड़ने और दोस्ती बढ़ाने का मौका देती है। इससे सेहत के भी कई लाभ हैं। प्रतिदिन एक कप कॉफी पीने से रक्तचाप नियंत्रित होता है, आंतों की गड़बड़ियों को ठीक करती है। कॉफी से लीवर भी दुरुस्त होता है साथ ही पाचन क्रिया ठीक चलती है। रोजाना एक कप कॉफी से लीवर कैंसर का खतरा कम होता है। कॉफी के एंटीऑक्सीडेंट इम्युनिटी बढ़ाते हैं। साथ ही टाइप टू मधुमेह व पर्किसन रोग से बचाते हैं। कॉफी के इन्हीं फायदों ने इसकी मांग में लगातार इजाफा किया है। शहर में होटल, रेस्टोरेंट के अलावा ब्रांडेड कॉफी चेन भी है जहां कॉफी कई तरीकों से सर्व की जा रही है। शहर में कई कॉफी शॉप्स हैं, जहां आपको बेहतरीन स्वाद की कॉफी मिलेगी। इनमें सीसीडी, बरिस्ता प्रमुख हैं।
हॉट कॉफी, कॉफी केक और पिनाके
प्याले में छलकती सामान्य सी कॉफी को शहर में सर्व किया जा रहा है। रेस्टोरेंट, होटल और कॉफी चेन में कॉफी की कई रेसिपी प्रयोग हो रही हैं। कॉफी शॉप्स पर एक्सप्रेसो, कैफीचीनो, कैफीलॉटे, कैफे पिनाके, कोल्ड कॉफी, कैफे मोका, कॉफी विद आइसक्रीम, कॉफी संडे, ग्रीन कॉफी, कॉफी स्मूदी, फिल्टर कॉफी और ब्लैक कॉफी मिलेगी। आइसक्रीम कोन, ब्राउनी विद आइसक्रीम की सर्विंग में भी कॉफी खूब प्रयोग हो रही है। कॉफी केक, कॉफी कप केक भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। बेफर कोन, वनिला आइसक्रीम के साथ कॉफी सीरप को सर्व किया जा रहा है। ऊपर से वास्तविक कॉफी पाउडर डालते हैं। ब्राउनी, कप केक बनाने और सर्विंग में कॉफी प्रयोग हो रही है। ड्रिंक्स में भी कॉफी को इनोवेटिव तरीके से परोसा जा रहा है।
बीजों से बनती है सच्ची कॉफी
आमतौर पर कॉफी को बाजार में विभिन्न कंपनियों के पाउच और बोतल में मिलने वाला पाउडर समझा जाता है। सच्ची कॉफी पाउडर नहीं, बल्कि कॉफी के बीज होते हैं। काली मिर्च, लौंग की तरह कॉफी भी पेड़ पर लगने वाला फल है। जो गेहूं के आकार में बीज के रूप में पेड़ पर उगता है। पूरा पकने के बाद काला होकर स्वयं पेड़ से गिरता है। इसके बाद इसे 210 डिग्री तापमान पर भूना जाता है, इन्हीं भुने बीजों को कॉफी बनाने में प्रयोग होता है। कॉफी बनाने के लिए कॉफी के बीजों को तुरंत ग्राइंड करके छानकर प्रयोग होता है। इसी से कॉफी सीरप तैयार होता है।
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अंग्रेजों से भारत आई कॉफी
हिंदुस्तान में कॉफी को प्रचलित करने का श्रेय अंग्रेजों को है। आजादी से पहले ब्रितानी अफसर बैठकों व दावतों में कॉफी का प्रयोग करते थे। ब्लैक कॉफी, एक्सप्रेसो, मोका और कै फीचीनो खासतौर से परोसे जाते थे। आजादी के बाद कॉफी संभ्रात परिवारों का प्रमुख पेय बन गया।
कॉफी के प्रकार
अरेबिका - यह सबसे फाइन कॉफी सीड्स होते हैं, महंगे होने के बाद भी इनकी मांग काफी होती है
रोबास्टा- कम पका कॉफी सीड होता है, जो पेड़ से झड़कर गिर जाता है। क्वालिटी और रेट दोनों में ही कम होता है।
पुब्राक - ये ऐसे काफी बीज होते हैं जो शुरुआत में ही पेड़ से झड़कर गिर जाते हैं। बीज की प्रारंभिक अवस्था है इनकी गुणवत्ता, स्वाद और दाम तीनों ही निम्न होते हैं।
भारत है कॉफी का बड़ा निर्यातक
चाय क ी तरह भारत में कॉफी का बड़ा कारोबार है। कॉफी के बागान भी हमारे देश में हैं। बंगलूरू में बड़ी मात्रा में कॉफी का उत्पादन होता है, जो विदेशों में निर्यात होती है। कॉफी की सबसे बड़ी खपत ब्राजील में है।
कॉफी दिल, दिमाग के लिए बेहतर
कॉफी कम्युनिकेशन ट्रेंड के साथ टाइम पास का जरिया बन चुकी है। मूड फ्रेश करने, तनाव भगाने और रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए भी लोग कॉफी पीते हैं। कॉफी दिल, दिमाग और दिन तीनों के लिए बेहतर है। छोटे शहरों के युवाओं में कॉफी का चलन तेजी से बढ़ा है। - दीपांशु, फूड एंड बेवरेज मैनेजर होटल कंट्री इन
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हॉट कॉफी, कॉफी केक और पिनाके
प्याले में छलकती सामान्य सी कॉफी को शहर में सर्व किया जा रहा है। रेस्टोरेंट, होटल और कॉफी चेन में कॉफी की कई रेसिपी प्रयोग हो रही हैं। कॉफी शॉप्स पर एक्सप्रेसो, कैफीचीनो, कैफीलॉटे, कैफे पिनाके, कोल्ड कॉफी, कैफे मोका, कॉफी विद आइसक्रीम, कॉफी संडे, ग्रीन कॉफी, कॉफी स्मूदी, फिल्टर कॉफी और ब्लैक कॉफी मिलेगी। आइसक्रीम कोन, ब्राउनी विद आइसक्रीम की सर्विंग में भी कॉफी खूब प्रयोग हो रही है। कॉफी केक, कॉफी कप केक भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। बेफर कोन, वनिला आइसक्रीम के साथ कॉफी सीरप को सर्व किया जा रहा है। ऊपर से वास्तविक कॉफी पाउडर डालते हैं। ब्राउनी, कप केक बनाने और सर्विंग में कॉफी प्रयोग हो रही है। ड्रिंक्स में भी कॉफी को इनोवेटिव तरीके से परोसा जा रहा है।
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बीजों से बनती है सच्ची कॉफी
आमतौर पर कॉफी को बाजार में विभिन्न कंपनियों के पाउच और बोतल में मिलने वाला पाउडर समझा जाता है। सच्ची कॉफी पाउडर नहीं, बल्कि कॉफी के बीज होते हैं। काली मिर्च, लौंग की तरह कॉफी भी पेड़ पर लगने वाला फल है। जो गेहूं के आकार में बीज के रूप में पेड़ पर उगता है। पूरा पकने के बाद काला होकर स्वयं पेड़ से गिरता है। इसके बाद इसे 210 डिग्री तापमान पर भूना जाता है, इन्हीं भुने बीजों को कॉफी बनाने में प्रयोग होता है। कॉफी बनाने के लिए कॉफी के बीजों को तुरंत ग्राइंड करके छानकर प्रयोग होता है। इसी से कॉफी सीरप तैयार होता है।
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अंग्रेजों से भारत आई कॉफी
हिंदुस्तान में कॉफी को प्रचलित करने का श्रेय अंग्रेजों को है। आजादी से पहले ब्रितानी अफसर बैठकों व दावतों में कॉफी का प्रयोग करते थे। ब्लैक कॉफी, एक्सप्रेसो, मोका और कै फीचीनो खासतौर से परोसे जाते थे। आजादी के बाद कॉफी संभ्रात परिवारों का प्रमुख पेय बन गया।
कॉफी के प्रकार
अरेबिका - यह सबसे फाइन कॉफी सीड्स होते हैं, महंगे होने के बाद भी इनकी मांग काफी होती है
रोबास्टा- कम पका कॉफी सीड होता है, जो पेड़ से झड़कर गिर जाता है। क्वालिटी और रेट दोनों में ही कम होता है।
पुब्राक - ये ऐसे काफी बीज होते हैं जो शुरुआत में ही पेड़ से झड़कर गिर जाते हैं। बीज की प्रारंभिक अवस्था है इनकी गुणवत्ता, स्वाद और दाम तीनों ही निम्न होते हैं।
भारत है कॉफी का बड़ा निर्यातक
चाय क ी तरह भारत में कॉफी का बड़ा कारोबार है। कॉफी के बागान भी हमारे देश में हैं। बंगलूरू में बड़ी मात्रा में कॉफी का उत्पादन होता है, जो विदेशों में निर्यात होती है। कॉफी की सबसे बड़ी खपत ब्राजील में है।
कॉफी दिल, दिमाग के लिए बेहतर
कॉफी कम्युनिकेशन ट्रेंड के साथ टाइम पास का जरिया बन चुकी है। मूड फ्रेश करने, तनाव भगाने और रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए भी लोग कॉफी पीते हैं। कॉफी दिल, दिमाग और दिन तीनों के लिए बेहतर है। छोटे शहरों के युवाओं में कॉफी का चलन तेजी से बढ़ा है। - दीपांशु, फूड एंड बेवरेज मैनेजर होटल कंट्री इन