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और बदलते निर्णय ने दौराला में नहीं खिलने दिया कमल
Updated Fri, 01 Dec 2017 09:58 PM IST
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पहली बार सामान्य कोटा में आई सीट
सांसद और विधायक भी नहीं खिला सके कमल
मोहित कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम।
देश और प्रदेश में भाजपा का डंका बज रहा है। इसके बावजूद दौराला में बदले निर्णय के चलते कमल नहीं खिल सका। पद पहली बार सामान्य जाति के लिए आरक्षित हुआ तो सवर्ण जातियों को मौका मिला और निर्दलीय प्रत्याशी जीत गई। भाजपा ने पहले ब्राह्मण और फिर जाट समाज को टिकट देकर चुनावी जंग को धार दे दी थी। आखिरकार बाजी निर्दलीय प्रत्याशी के हाथ लगी।
नगर पंचायत चुनाव को लेकर पहले से ही दौराला में घमासान मचा था। इस सीट को क्षेत्रीय विधायक और सांसद ने एससी से सामान्य कोटे में कराया था। भाजपा ने इस बार सिंबल से चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया तो टिकट लेने वालों की फेहरिस्त लंबी हो गई। आखिरकार क्षेत्रीय इकाई दौराला से रीमा शर्मा को टिकट दे दिया। टिकट घोषित होने के बाद उन्होंने नामांकन की तैयारी कर ली। हालांकि भाजपा विधायक संगीत सोम और क्षेत्रीय सांसद संजीव बालियान ने जाट समाज से मोनू अहलावत की मां जितेंद्री को चुनाव चिह्न दिलाने का आश्वासन दे रखा था। सूची जारी हुई तो इसमें रीमा शर्मा का नाम शामिल था। इस पर भाजपा के दोनों नेताओं ने नामांकन से दो घंटे पहले रीमा का टिकट बदलवा दिया। उन्होंने जितेंद्री देवी को दिला दिया। इसके बाद दौराला में चुनाव को लेकर माहौल बदल गया। दौराला में भाजपा प्रत्याशी को चुनाव जिताने के लिए सांसद, विधायक के अतिरिक्त स्थानीय नेताओं ने भी जोर लगाया। शुक्रवार को मतगणना हुई तो बाजी निर्दलीय रीमा शर्मा के हाथ लगी। दौराला में भाजपा नेता भी कमल नहीं खिला सके ।
भाजपा नेता ने लगाया जोर
मोदीपुरम। भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष विमल शर्मा और ब्राह्मण नेता सुनील भराला ने रीमा शर्मा की पैरवी की थी। हालांकि सांसद और विधायक के हस्तक्षेप के चलते उनका टिकट कट गया था। रीमा रिश्ते में विमल शर्मा की बहन हैं। बहन का टिकट कटने से भाजपा नेता नाराज थे। इसलिए बहन के लिए मैनेजमेंट किया और रीमा शर्मा को जीत दिला दी। रीमा शर्मा के चुनाव में तमाम ब्राह्ममण नेता लगे हुए थे।
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लोकसभा पर दिख सकता है असर
मोदीपुरम। दौराला नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पहले रीमा शर्मा को टिकट मिला, फिर जितेंद्री देवी को दे दिया गया। रीमा शर्मा का टिकट कटने से ब्राह्मण समाज में नाराजगी थी। ब्राह्मण समाज के लोगों का कहना था कि यदि जितेंद्री को टिकट देना था तो फिर रीमा शर्मा को क्यों दिया, यह ठीक नहीं है। ब्राह्मण लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट करता है। रीमा शर्मा का टिकट कटने का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
लावड़ में भी नहीं खिला फूल
मोदीपुरम। लावड़ में वर्तमान चेयरमैन महकार सैनी की पत्नी ललिता सैनी को भाजपा ने टिकट दे दिया, लेकिन उनकी नैया पार नहीं लग सकी। सैनी समाज के दो अन्य प्रत्याशियों के चलते हुए बंटवारे से ललिता सैनी हार गईं और निर्दलीय प्रत्याशी अनीसा हारूण ने जीत दर्ज की। यदि अन्य दो सैनी प्रत्याशी मैदान में नहीं होते तो भाजपा की जीत पक्की थी।
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सांसद और विधायक भी नहीं खिला सके कमल
मोहित कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम।
देश और प्रदेश में भाजपा का डंका बज रहा है। इसके बावजूद दौराला में बदले निर्णय के चलते कमल नहीं खिल सका। पद पहली बार सामान्य जाति के लिए आरक्षित हुआ तो सवर्ण जातियों को मौका मिला और निर्दलीय प्रत्याशी जीत गई। भाजपा ने पहले ब्राह्मण और फिर जाट समाज को टिकट देकर चुनावी जंग को धार दे दी थी। आखिरकार बाजी निर्दलीय प्रत्याशी के हाथ लगी।
नगर पंचायत चुनाव को लेकर पहले से ही दौराला में घमासान मचा था। इस सीट को क्षेत्रीय विधायक और सांसद ने एससी से सामान्य कोटे में कराया था। भाजपा ने इस बार सिंबल से चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया तो टिकट लेने वालों की फेहरिस्त लंबी हो गई। आखिरकार क्षेत्रीय इकाई दौराला से रीमा शर्मा को टिकट दे दिया। टिकट घोषित होने के बाद उन्होंने नामांकन की तैयारी कर ली। हालांकि भाजपा विधायक संगीत सोम और क्षेत्रीय सांसद संजीव बालियान ने जाट समाज से मोनू अहलावत की मां जितेंद्री को चुनाव चिह्न दिलाने का आश्वासन दे रखा था। सूची जारी हुई तो इसमें रीमा शर्मा का नाम शामिल था। इस पर भाजपा के दोनों नेताओं ने नामांकन से दो घंटे पहले रीमा का टिकट बदलवा दिया। उन्होंने जितेंद्री देवी को दिला दिया। इसके बाद दौराला में चुनाव को लेकर माहौल बदल गया। दौराला में भाजपा प्रत्याशी को चुनाव जिताने के लिए सांसद, विधायक के अतिरिक्त स्थानीय नेताओं ने भी जोर लगाया। शुक्रवार को मतगणना हुई तो बाजी निर्दलीय रीमा शर्मा के हाथ लगी। दौराला में भाजपा नेता भी कमल नहीं खिला सके ।
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भाजपा नेता ने लगाया जोर
मोदीपुरम। भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष विमल शर्मा और ब्राह्मण नेता सुनील भराला ने रीमा शर्मा की पैरवी की थी। हालांकि सांसद और विधायक के हस्तक्षेप के चलते उनका टिकट कट गया था। रीमा रिश्ते में विमल शर्मा की बहन हैं। बहन का टिकट कटने से भाजपा नेता नाराज थे। इसलिए बहन के लिए मैनेजमेंट किया और रीमा शर्मा को जीत दिला दी। रीमा शर्मा के चुनाव में तमाम ब्राह्ममण नेता लगे हुए थे।
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लोकसभा पर दिख सकता है असर
मोदीपुरम। दौराला नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पहले रीमा शर्मा को टिकट मिला, फिर जितेंद्री देवी को दे दिया गया। रीमा शर्मा का टिकट कटने से ब्राह्मण समाज में नाराजगी थी। ब्राह्मण समाज के लोगों का कहना था कि यदि जितेंद्री को टिकट देना था तो फिर रीमा शर्मा को क्यों दिया, यह ठीक नहीं है। ब्राह्मण लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट करता है। रीमा शर्मा का टिकट कटने का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
लावड़ में भी नहीं खिला फूल
मोदीपुरम। लावड़ में वर्तमान चेयरमैन महकार सैनी की पत्नी ललिता सैनी को भाजपा ने टिकट दे दिया, लेकिन उनकी नैया पार नहीं लग सकी। सैनी समाज के दो अन्य प्रत्याशियों के चलते हुए बंटवारे से ललिता सैनी हार गईं और निर्दलीय प्रत्याशी अनीसा हारूण ने जीत दर्ज की। यदि अन्य दो सैनी प्रत्याशी मैदान में नहीं होते तो भाजपा की जीत पक्की थी।