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ब्रह्मज्ञान से मनुष्य को मिलती है दिव्य दृष्टि
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 17 Jun 2015 11:04 PM IST
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संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में नगर के राधोपट्टी स्थित सत्संग भवन पर निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर ओमप्रकाश जी ने कहा कि सद्गुरु निराकार से जब साकार रूप में आता है तो उसकी पहचान होती है। ब्रह्म का ज्ञान होने ही मनुष्य को दिव्य दृष्टि प्राप्त हो जाती है।
जिनके दर्शन मात्र से ही मानव जीवन सार्थक हो जाता है। वर्तमान समय में युगदृष्टा निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज संसार में ब्रह्मज्ञान प्रदान करके शरीर व जीव की पहचान करा रहे हैं। आत्मा परमात्मा की अनुभूति होने लगती है। कभी राम शबरी का जिक्र, संत तुका राम का जिक्र, विदुर का जिक्र किए। कहा कि सद्गुरु की शरण में आकर प्रभु की प्राप्ति ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। सद्गुरु ही जग का दाता है। युग दृष्टा की ये दृष्टि है अपनी ही तो कुल सृष्टि है। प्रत्येक मानव शरीर में ईश्वर अंश आत्मा का वास है। लेकिन आज मानव मोह माया व अन्य विभिन्नताओं में उलझ कर मानव जीवन पाने का उद्देश्य भूल गया है। अंधकार से निकलकर सत्संग की प्राप्ति सारे कष्टों का समाधान है। संतों की सेवा, सत्संग व सुमिरन से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आत्मा का पति परमात्मा है जो सब में रम रहा है जो कि साकार है और निराकार भी। वह प्रभु परमात्मा है। इस अवसर पर आनंद कुमार राय, साहबदीन यादव, डा. बैजनाथ, डा. लालजी, राजेंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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जिनके दर्शन मात्र से ही मानव जीवन सार्थक हो जाता है। वर्तमान समय में युगदृष्टा निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज संसार में ब्रह्मज्ञान प्रदान करके शरीर व जीव की पहचान करा रहे हैं। आत्मा परमात्मा की अनुभूति होने लगती है। कभी राम शबरी का जिक्र, संत तुका राम का जिक्र, विदुर का जिक्र किए। कहा कि सद्गुरु की शरण में आकर प्रभु की प्राप्ति ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। सद्गुरु ही जग का दाता है। युग दृष्टा की ये दृष्टि है अपनी ही तो कुल सृष्टि है। प्रत्येक मानव शरीर में ईश्वर अंश आत्मा का वास है। लेकिन आज मानव मोह माया व अन्य विभिन्नताओं में उलझ कर मानव जीवन पाने का उद्देश्य भूल गया है। अंधकार से निकलकर सत्संग की प्राप्ति सारे कष्टों का समाधान है। संतों की सेवा, सत्संग व सुमिरन से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आत्मा का पति परमात्मा है जो सब में रम रहा है जो कि साकार है और निराकार भी। वह प्रभु परमात्मा है। इस अवसर पर आनंद कुमार राय, साहबदीन यादव, डा. बैजनाथ, डा. लालजी, राजेंद्र सिंह आदि शामिल थे।
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